यशवंत गंजीर - कुरुद। समाज की कठोर परंपराओं को पीछे छोड़ कर छत्तीसगढ़ के कुरुद क्षेत्र में एक ऐसा उदाहरण सामने आया है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और संबंधों की वास्तविक शक्ति को उजागर कर दिया। सिर्री गांव में शोभाराम पटेल ने अपनी बहू सरोजनी पटेल को बेटी का सम्मान देकर उसका पुनर्विवाह कराते हुए सामाजिक रूढ़िवादिता के विरुद्ध एक नया अध्याय लिख दिया है।
पति की असमय मृत्यु के बाद टूटा परिवार
करीब छह वर्ष पहले शोभाराम पटेल के पुत्र डेसमन पटेल के आकस्मिक निधन ने परिवार को भीतर तक हिला दिया था। इस कठिन दौर में सरोजनी पटेल ने धैर्य और संयम का परिचय देते हुए अपने जीवन को सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ाया और वर्तमान में अस्पताल में नर्स के रूप में कार्यरत हैं।
ससुर बने पिता- नई खुशियों के लिए उठाया बड़ा कदम
सरोजनी के जीवन में नई रोशनी लाने की जिम्मेदारी उठाते हुए शोभाराम पटेल ने वह निर्णय लिया, जिसकी मिसाल समाज में कम ही मिलती है। 10 फरवरी को आयोजित विवाह समारोह में उन्होंने पिता का कर्तव्य निभाते हुए जांजगीर-चांपा निवासी राजा पटेल के साथ अपनी बहू का पुनर्विवाह पूरी विधि-विधान के साथ संपन्न कराया। उन्होंने कहा- 'यदि हर परिवार बहू को बेटी का सम्मान दे, तो घर सच में स्वर्ग बन सकता है।'
समाज के गणमान्य जन पहुँचे
इस प्रेरणादायी विवाह में पटेल समाज के कई वरिष्ठ पदाधिकारी साक्षी बने- बंशीलाल पटेल और सुनील नायक। सादगीपूर्ण वातावरण, वैदिक मंत्रों की ध्वनि और भावनात्मक क्षणों के बीच सम्पन्न इस विवाह ने उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया। सभी ने यह माना कि, यह पहल समाज को नई दिशा दिखाने का सामर्थ्य रखती है।
मानवता की मिसाल- रिश्तों की नई परिभाषा
यह विवाह केवल एक रस्म नहीं, बल्कि विचार और दृष्टिकोण का परिवर्तन है। यह बताता है कि रिश्ते खून से नहीं, बल्कि मन की विशालता और संवेदनशीलता से महान बनते हैं। सरोजनी पटेल के लिए यह जीवन का नया अध्याय है, और समाज के लिए ऐसी सीख जो पीढ़ियों तक प्रेरणा देगी।
