Logo
कोतबा में बजट 2026-27 के प्रावधानों पर चर्चा; किसानों को एआई (AI), आधुनिक तकनीक और उच्च मूल्य वाली फसलों चंदन, कोको, काजू की खेती के लिए जागरूक किया गया।

मयंक शर्मा- कोतबा। कोतबा-जशपुर में 'कृषि एवं ग्रामीण रूपांतरण' विषय पर एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य केंद्रीय बजट 2026-27 के प्रावधानों से किसानों को अवगत कराना, उन्हें आधुनिक तकनीक से जोड़ना और उत्पादकता बढ़ाकर रोजगार के नए अवसर पैदा करना था। ​इस वेबिनार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअली जुड़कर आगामी कृषि बजट की रूपरेखा और सरकार के विज़न को साझा किया।

उद्यानिकी महाविद्यालय कोतबा के सभागार में आयोजित इस वेबिनार का प्रारंभ प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आगामी बजट की रूपरेखा साझा करने के साथ हुई। इस वेबिनार में भारत सरकार के केंद्रीय बजट कार्यक्रम में विशेष रूप से उच्च मूल्य वाली फसलें जैसे नारियल, चंदन, कोको, काजू, अगर के पेड़, बादाम, अखरोट और चिलगोजा की खेती के लिए सरकारी सहायता और रणनीतियों पर चर्चा की गई। उन्होंने बताया कि कैसे सरकार कृषि एवं उद्यानिकी विभाग, किसानों, पशुपालकों, मत्स्यपालकों और कृषि उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। 

Calendars distributed to farmers
किसानों को बाटें गए कैलेंडर 

किसानों की आय में वृद्धि करना हमारा लक्ष्य 
उन्होंने स्पष्ट किया कि बजट 2026-27 का मुख्य लक्ष्य कृषि क्षेत्र में उत्पादकता को बढ़ाना, किसानों की आय में वृद्धि करना और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। प्रधानमंत्री का भाषण भारतीय कृषि को मजबूत करने में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) की संभावनाओं पर केंद्रित था, विशेष रूप से लघु एवं सीमांत किसानों के उत्थान के उद्देश्य से। उन्होंने 'भारत विस्तार' योजना के तहत कृषि के लिए एआई-संचालित डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के निर्माण पर जोर दिया। उनका मानना है कि इस तकनीक से किसानों को सटीक डेटा और मौसम की जानकारी मिलेगी, जिससे खेती अधिक वैज्ञानिक और कम जोखिम वाली होगी। किसानों से पारंपरिक खेती के साथ-साथ नारियल, चंदन, कोको, काजू, और अगर के पेड़ों जैसी कीमती फसलों की ओर बढ़ने का आह्वान किया गया है। 

2030 तक भारत को वैश्विक ब्रांड लीडर बनाने का लक्ष्य
'राष्ट्रीय काजू और कोको विकास कार्यक्रम' के माध्यम से भारत को 2030 तक इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर और एक वैश्विक ब्रांड लीडर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि बादाम, अखरोट और चिलगोजा जैसे मेवों के लिए भविष्य की रणनीतियां तैयार की जा रही हैं। ताकि, इनका आयात कम हो और स्थानीय प्रसंस्करण से किसानों को बेहतर दाम मिल सकें। चंदन और अगरवुड की खेती को बढ़ावा देकर किसानों के लिए आय के स्थायी और दीर्घकालिक स्रोत बनाने की योजना है। उन्होंने कहा कि जब खेती आधुनिक तकनीक और उच्च मूल्य वाले उत्पादों से जुड़ेगी, तभी ग्रामीण अर्थव्यवस्था का वास्तविक रूपांतरण होगा। इस बजट का उद्देश्य छोटे किसानों को वैश्विक बाजार से जोड़ना और उन्हें एक 'उद्यमी' के रूप में स्थापित करना है। माननीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान जी ने कृषकों से आह्वान किया कि इन योजनाओं का लाभ उठाकर 'अन्नदाता' के साथ-साथ 'उद्यमी' भी बनें। 

Information provided to farmers about crops
किसानों को फसलों के बारे में दी गई जानकारी 

किसानों को कैलेंडर किया गया वितरित 
इस कार्यक्रम में उद्यानिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता (अरबिन्द कुमार साय), शिक्षकगण, कर्मचारीगण, छात्र-छात्राएं अवाम प्रगतिशील किसान सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के माध्यम से कृषकों को जागरूक किया गया। ताकि, वे केंद्र सरकार की इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकें। कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित किसानों को विश्वविद्यालय का वर्ष 2026 का कैलेंडर वितरित किया गया, और बताया कि इस तरह के आयोजनों से कृषक नवीन सरकारी योजनाओं और सब्सिडी के बारे में जागरूक होकर अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकेंगे।

5379487