छत्तीसगढ़ में साड़ी खरीदी सुर्खियों में है। 1 लाख 94 हजार 590 नग साड़ियों की खरीदी में जमकर गोलमाल हुआ।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में साड़ी खरीदी सुर्खियों में है। 1 लाख 94 हजार 590 नग साड़ियों की खरीदी में जमकर गोलमाल हुआ। साड़ियां साइज में छोटी सप्लाई की गईं और उनका रंग भी पहली धुलाई में उड़ गया। साडी खरीदी खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने की। आपूर्ति से पहले जो मानक तय किए गए उनका पालन नहीं किया गया। 

विवाद और हंगामा होने के बाद सवाल महिला एवं बाल विकास विभाग पर उठे, लेकिन विभागीय पत्रों ने पूरे मामले की सच्चाई बर्या कर दी। विभाग द्वारा लिखे गए पत्र बताते हैं कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की दिलचस्पी सप्लायरों को भुगतान करने में ज्यादा रही। वहीं महिला एवं बाल विकास ने जांच के लिए समिति गठित की और रिपोर्ट मिलने के बाद भुगतान पर रोक लगा दी। 

सप्लायरों को ब्लैक लिस्ट करने की जा रही है तैयारी 
हरिभूमि को मिले पत्र बताते हैं कि,  करतूत खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की थी, खरीदी में नियमों का पालन नहीं किया गया। हंगामा होने के बाद भी सप्लायरों को पूर्ण भुगतान के लिए लगातार पत्र लिखे गए। वहीं, शिकायत मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग ने न केवल भुगतान रोका, बल्कि समितियां बनाकर गड़बड़ी की जांच की और अब सप्लायरों के 2 करोड़ 43 लाख रुपए के भुगतान पर रोक लगा दी है। सप्लायरों को ब्लैक लिस्ट करने की तैयारी की जा रही है। 

जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने जांच को आगे बढ़ाया
उल्लेखनीय है कि, सोशल मीडिया पर साड़ी की गुणवत्ता और मापदंडों पर सवाल उठ रहे थे। कुछ वीडियो सामने आए जिसमें साड़ी को पानी में भिगोते ही रंग निकल रहा था। महिला एवं बाल विकास ने जनवरी, 2026 को आधिकारिक आदेश जारी कर एक जांच समिति गठित कर दी गई। समिति को साफ निर्देश दिए गए कि 15 दिनों के भीतर पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। जांच में इस बात की पुष्टि की गई कि साड़ी आपूर्ति में सप्लायरों ने मानकों का पालन नहीं किया गया है। रंग निकलने और साइज कम होने की शिकायतें सही पाई गई। कई जिलों में पाया गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को दी गई साड़ियों की गुणवत्ता सही नहीं है। जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने जांच को और गंभीरता से लेते हुए जांच का दायरा बढ़ाया।

विभाग ने कहा-जिम्मेदारों पर एक्शन हो और साड़ी बदली जाएं
13 अप्रैल को संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग, डा. रेणुका श्रीवास्तव ने बोर्ड के प्रबंध संचालक को पत्र लिखा। जिसमें कहा गया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को साड़ी प्रदाय करने की जिम्मेदारी बोर्ड को दी गई थी। संचालनालय स्तर पर कराई गई जाच में गड़बड़ी की पुष्टि हुई है। इसकी वजह से विभाग की छवि खराब हो रही है। बोर्ड तत्काल जिम्मेदारों और संबंधितों के विरुद्ध उचित कार्यवाही करे और खराब साड़ियों को तत्काल बदले।

पूर्ण भुगतान चाहता था बोर्ड विभाग ने रोक लगाई
10 मार्च को खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के उप संचालक को लिखे पत्र क्रमांक 17915 में महिला एवं बाल विकास ने भुगतान को लेकर कड़ी आपत्ति जताई। उसमें लिख कि बोर्ड ने पत्र लिखकर शेष राशि के भुगतान का आग्रह किया है। लेकिन जिलों से आई रिपोर्ट के बाद आगामी भुगतान पर रोक लगाई जाती है। पत्र से स्पष्ट है कि खरीदी विवादों में आने और जांच में गड़बड़ी होने के बाद भी खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड जल्द से जल्द सप्लायरों को भुगतान कराना चाहता था। 7 करोड़ 29 लाख 71 हजार 250 रुपए का भुगतान किया जा चुका था। 25 फीसदी भुगतान करने के लिए बोर्ड ने पत्र लिखे। लेकिन जांच समिति की रिपोर्ट के बाद विभाग ने स्पष्ट आदेश दिया गया कि सप्लायर को दिया जाने वाला शेष 25 प्रतिशत भुगतान रोक दिया जाए। पत्र के बाद बची हुई 2 करोड़ 43 लाख रुपए की राशि पर तत्काल रोक लगा दी गई।

जांच का दायरा बढ़ा, बड़ी कमेटी बनी
06 अप्रैल 2026 को, डा. रेणुका श्रीवास्तव, संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग ने 6 सदस्यीय समिति का गठन किया। पत्र में लिखा गया कि दुर्ग, धमतरी, कबीरधाम और रायगढ़ में प्रदाय की गई साड़ी की जांच के लिए संचालनालय स्तर पर कमेटी बनाई गई। इसमें दिलदाल सिंह मरावी, संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास को बनाया गया। साथ ही भंडार, वित्त जैसी शाखाओं से जुड़े अफसरों को जांच समिति में शामिल किया गया। स्पष्ट निर्देश दिए गए कि साड़ियों की गुणवत्ता और आकार संबंधी जांच बारीकी से की जाए।

 

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