अनिल सामंत- जगदलपुर। बस्तर जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक शुक्रवार को उस समय अभूतपूर्व मोड़ पर पहुंच गई जब सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्ष कांग्रेस के सदस्य एकजुट होकर बैठक का बहिष्कार करते हुए सभाकक्ष से बाहर निकल आए। जिला पंचायत सामान्य सभा के इतिहास में यह पहला अवसर माना जा रहा है जब पक्ष और विपक्ष दोनों ने एक साथ जिला पंचायत के सीईओ के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके तत्काल स्थानांतरण की मांग की।
बैठक के दौरान विभिन्न विभागों के प्रमुख अधिकारियों की अनुपस्थिति, योजनाओं में अनियमितता और जनप्रतिनिधियों के प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर नहीं मिलने पर माहौल लगातार गरमाता गया। सदस्यों ने आरोप लगाया कि कई विभागों में भ्रष्टाचार हो रहा है और ऐसे अधिकारियों को जिला पंचायत सीईओ का संरक्षण मिल रहा है। इसी बीच हंगामे के दौरान सीईओ द्वारा सदस्यों को सभाकक्ष से बाहर जाने का फरमान सुनाए जाने से जनप्रतिनिधि आक्रोशित हो उठे और उन्होंने इसे जनप्रतिनिधियों का अपमान बताते हुए बैठक का सामूहिक बहिष्कार कर दिया।
जोरदार ढंग से उठाए गए कई मुद्दे
बैठक में रेटावंद सड़क निर्माण, वन विभाग के पौधरोपण कार्य, माचकोट वन परिक्षेत्र में सड़क-पुलिया की कमी, आंगनबाड़ी केंद्रों में रंगाई-पुताई में अनियमितता तथा कई गांवों में बिजली समस्या जैसे मुद्दे जोरदार तरीके से उठाए गए। सदस्यों ने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर पौधरोपण के नाम पर राशि खर्च हो गई, जबकि मजदूरों का भुगतान तक नहीं किया गया। वहीं विद्युत व्यवस्था और लाइन विस्तार से जुड़ी शिकायतों पर भी विभागों द्वारा औपचारिक जवाब दिए जाने से सदस्य असंतुष्ट दिखाई दिए।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी सहित सदस्य चंद्रभान कश्यप, निर्देश दीवान, शकुंतला कश्यप, कामदेव बघेल, योगेश बघेल,वनवासी मोर्य, नीलिमा टीव्ही रवि, पदमनी कश्यप, सम्पति नाग, ललिता कश्यप, कांति मोर्य सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
'सीईओ ने सदस्यों का किया अपमान'
जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप ने कहा कि सामान्य सभा की बैठक जनप्रतिनिधियों के सवालों और जनता की समस्याओं के समाधान के लिए बुलाई जाती है, लेकिन लगातार विभागीय अधिकारियों द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिए जा रहे हैं। कई विभाग अपने प्रमुख अधिकारियों की जगह सहायक अधिकारियों को भेजकर औपचारिकता निभा रहे हैं।
इसी दौरान हंगामे के बीच जिला पंचायत सीईओ द्वारा यह कहना कि “इसी वजह से बैठक नहीं बुलाया जाता” और सदस्यों को कार्रवाई के दौरान सभाकक्ष से बाहर जाने का निर्देश देना जनप्रतिनिधियों का खुला अपमान है। अध्यक्ष ने कहा कि सभी सदस्यों की भावना का सम्मान करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भेजकर जिला पंचायत सीईओ और महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी को तत्काल हटाने की मांग की है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो सदस्य सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को विवश होंगे।









