रायपुर। छत्तीसगढ़ में साल-दर-साल जनसंख्या बढ़ती जा रही है। बढ़ती हुई आबादी के साथ ही राज्य में उन लोगों की संख्या बढ़नी थी, जो लिख-पढ़ सकते हों, लेकिन तस्वीर इसके उलट नजर आ रही है। राज्य में निरक्षर लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। यह ऐसे समय पर हो रहा है, जब छत्तीसगढ़ में दशकों से साक्षरता अभियान चलाया जा रहा है। छोटे- छोटे गांवों में प्रायमरी शिक्षा के लिए स्कूल खोले जा रहे हैं।
सवाल ये है आखिर यह क्यों हो रहा है? जबकि जनसंख्या बढ़ने के साथ पढ़े-लिखों की संख्या बढ़कर बेहतर स्थिति में आनी चाहिए, पर ये तस्वीर तो बदतर नजर आ रही है। राज्य में आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग ने वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर और उसके बाद हर साल बढ़ने वाली अनुमानित जनसंख्या के गणितीय अनुमान के हिसाब से 2026 तक के संभावित आंकड़े निकाले हैं, जिसमें यह बात सामने रखने की कोशिश की है कि 1 मार्च 2026 की स्थिति में राज्य कुल निरक्षरों की अनुमानित संख्या कितनी है। यही नहीं, राज्य के सभी 33 जिलों के लिए यही हिसाब-किताब निकाला गया है।
रायपुर: बिलासपुर में बढ़ रहे निरक्षर : 6,65,731 से बढ़कर 6,75,924 हुआ है।
रायपुरः राजधानी में यह आंकड़ा
बिलासपुरः यहां निरक्षर आबादी 5,93,310 से बढ़कर 6,61,368 तक पहुंच गई है। कबीरधामः यहां भी बड़ी बढ़त देखी गई है, जहां संख्या 4,08,359 से बढ़कर 5,12,609 हो गई है।
राज्य की वर्तमान स्थिति
आंकड़ों के अनुसार, 2011 में छत्तीसगढ़ की कुल निरक्षर जनसंख्या 1 करोड़ 1 लाख, 65 हजार 276 थी, जिसके 1 मार्च 2026 तक 1 करोड़ 4 लाख 52 हजार 902 होने के अनुमान हैं। हालांकि यह संख्या बढ़ी हुई दिख रही है, लेकिन राज्य के कई प्रमुख जिलों ने जमीनी स्तर पर शिक्षा के प्रसार में उल्लेखनीय काम किया है।
पुराने जिलों में साक्षरता पर अच्छा काम
1 मार्च 2026 के ये आंकड़े बताते हैं कि छत्तीसगढ़ के पुराने और स्थापित जिलों ने साक्षरता के मोर्चे पर अच्छी प्रगति की है। हालांकि, नए जिलों और तेजी से विकसित हो रहे शहरी केंद्रों में अभी भी शिक्षा के व्यापक प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है, ताकि निरक्षरता के इस कलंक को पूरी तरह मिटाया जा सके। राज्य की निरक्षर आबादी में बदलाव के मिश्रित संकेत मिल रहे हैं। जहां एक ओर दुर्ग, राजनांदगांव और कोरबा जैसे जिलों ने निरक्षरता कम करने में बड़ी सफलता हासिल की है, वहीं जनसंख्या वृद्धि के कारण कुछ जिलों में निरक्षरों का आंकड़ा पहले के मुकाबले बढ़ा है।
इन जिलों में निरक्षरता में कमी
दुर्गः यहां सबसे शानदार सुधार देखा गया है। 2011 में 4,74,058 निरक्षर थे, जो अब घटकर 4,13,615 रह गए हैं।
कोरबा: औद्योगिक जिले कोरबा में निरक्षरता का आंकड़ा 4,57,881 से घटकर 3,87,144 पर आ गया है।
दंतेवाड़ा (दक्षिण बस्तर): नक्सल प्रभावित होने के बावजूद यहां सकारात्मक बदलाव दिखा है। निरक्षर जनसंख्या 1,66,706 से कम होकर 1,53,921 हो गई है।
धमतरी: यहां भी साक्षरता दर में सुधार के संकेत हैं, निरक्षरों की संख्या 2,52,948 से गिरकर 2,25,252 हो गई है।
बालोद: जिले में निरक्षर आबादी 2,40,222 से घटकर 2,05,750 रह गई है।
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