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रायपुर। गर्मी का अभी आगाज भी नहीं हुआ है, लेकिन बिजली की खपत में जरूर गर्मी के तेवर नजर आने लगे हैं। मार्च के प्रारंभ होते ही डिमांड पीक आवर में छह हजार मेगावाट के करीब पहुंच गई है। सामान्य समय में ही खपत 55 सौ मेगावाट से ज्यादा हो रही है। कृषि पंप चलने के साथ ही अभी से एसी और कूलर भी चलने लगे हैं, जिसके कारण खपत लगातार बढ़ती जा रही है। जहां तक अपने उत्पादन का सवाल है, तो छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर उत्पादन कंपनी के संयंत्रों में इस समय 25 सौ मेगावाट का ही उत्पादन हो रहा है। बिजली की पूर्ति करने के लिए सेंट्रल सेक्टर का सहारा लिया जा रहा है। इस बार गर्मी में खपत 65 सौ मेगावाट तक जा सकती है। पिछली बार खपत 62 सौ मेगावाट तक जा चुकी है।
प्रदेश में लगातार बिजली के उपभोक्ता बढ़ते जा रहे हैं, यही वजह है कि अब बिजली की खपत भी लगातार बढ़ने लगी है। पहले कभी फरवरी और मार्च के माह में इतनी खपत नहीं होती थी, जितनी अब होने लगी है। अब तो ठंड के समय ही खपत चार हजार मेगावाट के पार हो जाती है। इसके पीछे का एक और कारण मौसम भी है। अब गर्मी का मौसम महज चार माह का नहीं रहता है। उमस के कारण भी खपत बढ़ जाती है। पिछले साल तो बारिश के मौसम में खपत छह हजार मेगावाट के पार चली गई थी।
कृषि पंप, एसी-कूलर चल रहे
बिजली की खपत बढ़ने का सबसे बड़ा कारण यह है कि कृषि पंप चलने लगे हैं। कृषि पंपों पर ही रोज की खपत पांच से छह सौ मेगावाट हो जाती है। इसी के साथ अब फरवरी से ही एसी और कूलर चलने लगे हैं। मार्च में तो गर्मी के तेवर और तेज होने की संभावना पहले ही मौसम विभाग ने जता दी है। ऐसे में इस माह ही खपत का नया रिकॉर्ड बन सकता है।
अपना उत्पादन कम
एक तरफ बिजली की खपत लगातार बढ़ रही है तो दूसरी तरफ अपना उत्पादन अभी ज्यादा नहीं है। पॉवर कंपनी के संयंत्रों की क्षमता 2960 मेगावाट की है। इनमें से उत्पादन आमतौर पर 22 से 25 सौ मेगावाट के आस-पास ही रहता है। इस समय मार्च में खपत 58 से 59 सौ मेगावाट तक जा रही है, अपना उत्पादन 25 सौ मेगावाट हो रहा है। बिजली की पूर्ति के लिए जहां सेंट्रल सेक्टर से करीब तीन हजार मेगावाट बिजली ली जा रही है, वहीं निजी संयंत्रों से बिजली लेकर पूर्ति की जा रही है। सेंट्रल सेक्टर का अपना शेयर तीन हजार मेगावाट का है। अगर गर्मी में खपत 65 सौ मेगावाट तक गई तो इतना तय है इससे परेशानी होगी और बिजली कटौती भी हो सकती है।
