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अक्षय साहू/राजनांदगांव- छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में वन तस्कर कीमती लकड़ी की बेधडक़ कटाई कर रहे हैं। तस्करों ने खुलेआम सुकुलदैहान से मुसरा के बीच सैकड़ों पेड़ काटकर सड़क किनारे रख दिए हैं। जितने भी पेड़ आसपास लगे हैं, उसको भी काटने की पूरी तैयारी कर रहे हैं। क्योंकि उस पेड़ को गोल काटकर छोड़ दिया गया है। इसके बावजूद प्रशासन इस तरफ अनदेखा कर रहा है। 

धड़ल्ले से की जा रही कटाई 

ग्रामीणों ने बताया कि, कुछ लोग पैसे की लालच में कीमती पेड़ों को भी काट रहे हैं। जंगल में कई औषधीय युक्त कीमती पेड़ हैं, उसे भी नहीं छोड़ रहे। सड़क के किनारे खेत में लगे कहुआ, रिया और बबूल के पेड़ों की धड़ल्ले से कटाई की जा रही है।  प्रशासन की लापरवाही के चलते क्षेत्र में धड़ल्ले से हरे पेड़ों की कटाई की जा रही है। इधर, प्रशासन माफियाओं पर शिकंजा कसने में नाकाम साबित हो रहा है।

पेड़ काटकर सड़क किनारे रखा गया

तस्करों ने खुलेआम सुकुलदैहान से मुसरा के बीच सैकड़ों पेड़ काटकर सड़क किनारे रखा दिया है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि, क्या इन तस्करों को प्रशासन का संरक्षण मिल रहा है? इन पेड़ों में अधिकतर ऐसे पेड़ हैं, जिन्हें काटने की अनुमति ही नहीं है। लेकिन तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि, वे प्रशासनिक अमलों को कुछ समझ ही नहीं रहे। तस्करों के हौसले बुलंद होने का कारण यह भी है कि प्रशासन भी इन पेड़ों की कटाई करने वाले लोगों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है। आए दिन जंगलों और खेतों से कई वाहन लकड़ी बाहर भी भेजी जा रही है।

ग्रामीण इलाकों में हरे-भरे पेड़ों की अवैध कटाई

गांवों से लगातार हरे-भरे पेड़ों की कटाई की जा रही है। जिससे पर्यावरण संकट बढ़ रहा है। माफियाओं ने कीमती पेड़ों की कटाई कर जंगलों को वृक्षविहीन बनाने का कार्य चल रहा है। पेड़ों की अवैध कटाई से आने वाले दिनों में प्रदूषण बढऩे की आशंका बढ़ती जा रही है। इससे कई लोग मालामाल हो रहे हैं। वहीं, प्रकृति से हरियाली घटती जा रही है। प्रशासन की लापरवाही के कारण जंगलों का उजाड़ा जा रहा है। कई जगहों पर कीमती बीजा पेड़ की अंधाधुंध कटाई की जा रही है और औने-पौने दाम में बेची जा रही है। 

वृक्षारोपण के नाम पर करोड़ों खर्च 

पेड़ लगाने के नाम पर सरकार हर साल करोड़ों रुपए खर्च करती है। ताकि पर्यावरण में अनुकूलता बनी रही। आज पेड़ों की कमी की वजह से लगातार मौसम में परिवर्तन देखा जा रहा है। वृक्ष को लगाने के साथ-साथ उसकी सुरक्षा का जिम्मा विभाग के अधिकारी को सौंपी जाता है। ताकि पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सके, लेकिन वृक्ष लगाने के बाद वहां प्रशासनिक अमला झांकने तक नहीं जाता है। पेड़ों को पर्याप्त मात्रा में पानी तक नहीं मिलता है। जिसके कारण पेड़ पूरी तरह से फल-फूल भी नहीं पाते। 

प्रशासन उदासीन या तस्करों को संरक्षण!

प्रशासन की उदासीनता और लापरवाही के कारण पेड़ काटने वालों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही है और न ही पेड़ों की कटाई पर प्रतिबंध नहीं लग पा रहा है। वन माफियाओं पर रोकथाम नहीं होने के कारण जहां कभी घना जंगल हुआ करता था, वहां पर अब ठूंठ ही नजर आते हैं। इस समय सागौन के अलावा आम, इमली, बबूल, जामुन, बरगद, नीम प्रजाति के पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से जारी है। इन पेड़ों की हो रही कटाई से वन क्षेत्रों को तो नुकसान हो रहा है, इसके अलावा पर्यावरण पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिसका परिणाम गर्मी के मौसम में देखने को मिलता है।