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नौशाद अहमद-सूरजपुर। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में फादर्स डे के मौके पर हम आज आपको मिलाते हैं, दुनिया के सबसे अच्छे पापा से। जिन्होंने अपनी दोनों दिव्यांग बच्चियों के लिए अपना जीवन ही लगा दिया है। उनका एक ही लक्ष्य है अपनी बेटियों को खुश रखना और इसके लिए वह हर काम करते है। जिससे उनको थोड़ी सी ख़ुशी मिल सके।
दोनों बच्चियों के साथ खिलाते पिलाते हंसी मजाक के साथ बाइक में बैठा कर पान दुकान लाकर पान खिलाते पिता का नाम पारस कुशवाहा है। जो सूरजपुर के गोपालपुर में रहते हैं। इनकी दोनों ही बच्चिया दिव्यांग है पर यह कभी भी अपनी बच्चियों को इसका एहसास नहीं दिलाते हैं। इनकी हर खुशी के लिए अपना जीवन ही लगा दिया है। जहां वर्तमान समय में जहां दिव्यांग होना किसी श्राफ से काम नहीं है। ऐसे में लोग दिव्यांग बच्चों को किसी बोझ से कम नही समझते हैं और उन्हें उन्ही के हाल में छोड़ दिया जाता है। वहीं पारस कुशवाहा और उनकी पत्नी समाज के लिए मिशाल है जिन्होंने अपना जीवन दोनों दिव्यांग बच्चों के लिए लगा दिया है।
दोनों बच्चियों की करते हैं सेवा
पारस कुशवाहा है का एक ही मकसद है कि, वो इन बच्चों को कैसे खुश रख सकें। सुबह होते ही पारस इन दोनों को अपने हाथों से नास्ता कराते है। अपने बाइक में बैठा कर पान खिलाने के लिए एक किलोमीटर लेके जाते है और यह बस उस बच्ची की खुशी के लिए करते है। उनका कहना है कि, मेरे दोनों बच्ची को भगवान ने ऐसा ही बनाया, इसमें इनकी क्या गलती है। इनको कुछ तकलीफ़ ना हो इसका ध्यान देता हूं ये दोनों ही मेरी जिंदगी है। दोनों के पास बैठ कर अलग ही सुकून मिलता है। इनके लिए में जितना कर सकूं उतना ही कम है मेरी भगवान से एक ही मांग है कि, मेरी दोनों बेटियों को ठीक कर दे। फादर्स डे के मौके पर ऐसे माता पिता को मेरा सलाम है।
