रुचि वर्मा- रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित की जा रही पांचवी-आठवीं की परीक्षा मजाक बनकर रह गई है। शासकीय विद्यालयों में तो छात्र परीक्षा दिलाने पहुंच रहे हैं, लेकिन निजी विद्यालय सूने हैं। निजी विद्यालयों में भी केंद्राध्यक्ष के रूप में शासकीय शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। वे दिनभर छात्रों का इंतजार करते रहे कि बच्चे परीक्षा दिलाने पहुंचेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
दरअसल, सीजी बोर्ड से मान्यता प्राप्त करने के बाद भी थोक में ऐसे निजी स्कूल हैं जो सीबीएसई किताबों से पढ़ाई कराते हैं। केंद्रीकृत परीक्षा में नियमतः सीजी बोर्ड की किताबों से सवाल पूछे जा रहे हैं, इसलिए इन निजी स्कूल के विद्यार्थी परीक्षा दिलाने ही नहीं पहुंच रहे हैं। प्रदेश में 8500 निजी स्कूल हैं। इनमें से 6200 सीजी बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं। शेष स्कूलों में सीबीएसई माध्यम से पढ़ाई होती है। सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड संबद्ध स्कूलों को केंद्रीकृत परीक्षा से बाहर रखा गया है, जबकि सीजी बोर्ड संबद्ध स्कूलों के लिए यह परीक्षाअनिवार्य है। शिक्षा के अधिकार के लिए यह परीक्षा अनिवार्य है। शिक्षा के अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पहली से आठवीं कक्षा तक अनुत्तीर्ण छात्रों को भी अगली कक्षा में प्रमोट करना अनिवार्य है। उन्हें किसी भी स्थिति में रोका नहीं जा सकता है। यही कारण है कि निजी स्कूल भी छात्रों के परीक्षा में नहीं पहुंचने को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
इधर, सोने पर सुहागा... राजधानी में बंटे कटे हुए प्रश्नपत्र
पांचवी कक्षा की परीक्षा की शुरुआत सोमवार को हिंदी विषय के साथ हुई थी। गणित विषय के साथ आठवीं की परीक्षा की शुरुआत मंगलवार से हुई। राजधानी रायपुर में शिक्षकों और बच्चों के होश उस वक्त उड़ गए, जब उन्हें कटे हुए प्रश्नपत्र मिले। प्रश्नपत्रों की छपाई इस तरह से हुई थी कि प्रश्नपत्र के लगभग सभी पन्नों से ऊपर के सवाल गायब थे अथवा तिरछे छपाई होने के कारण आधे प्रश्न कागज से बाहर चले गए। उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज करने के बाद अंततः शिक्षकों ने छात्रों को प्रश्न लिखवाए। गौरतलब है कि रायपुर में 952 निजी स्कूल हैं। इनमें से 800 सीजी बोर्ड संबद्ध हैं।
परीक्षा समिति करेगी जांच
रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारतीय ने बताया कि, प्रश्नपत्र कटे हुए मिलने के मामले में परीक्षा समिति जांच करेगी।
परीक्षा का अपमान
निजी स्कूल संघ के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने बताया कि, आधी-अधूरी तैयारी के साथ परीक्षा आयोजित कराना परीक्षा का ही अपमान है। आधे से ज्यादा समय हम छात्रों को कटे हुए प्रश्न ही लिखवाते रहे।