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आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसे लेकर अब राष्ट्रीय बाल सरंक्षण आयोग भी चिंतित है और कहा- जहां खेल मैदान हो, वहां न डालें खाना। 

रायपुर। शहरों से लेकर गांवों तक में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। इसे लेकर अब राष्ट्रीय बाल सरंक्षण आयोग भी चिंतित है। आयोग ने बच्चों पर आवारा कुत्तों के हमले रोकने और सुरक्षा के उपाय जुटाने के संबंध में सिफारिशें की हैं। आयोग ने कहा है कि खेल मैदानों के आसापास कुत्ते को खाना खिलाने पर रोक लगाई जानी चाहिए। दरअसल, यह बात कुत्ते को खिलाने का विनियमन में पशु जन्म नियंत्रण (एसीबी) में भी कही गई है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को भेजे गए पत्र में बच्चों पर आवारा कुत्तों के हमलों को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों के तत्काल क्रियान्वयन के संबंध में अपने अधिदेश के तहत बाल अधिकार संरक्षण आयोग (सीपीआरसी) अधिनियम के तहत सिफारिशें की हैं।

आयोग का मानना है कि, निर्माण स्थल और जहां मजदूर रहते हैं वहां कुत्ते काटने की घटनाएं अधिकतर रूप से पाई जाती हैं। ये स्थान जोखिम पैदा करते हैं। विशेषकर मजदूरों के बच्चों के लिए जो अक्सर ऐसे वातावरण में रहते और खेलते हैं। ऐसी जगहों पर कुत्तों की मौजूदगी से बच्चों के आक्रामक व्यवहार या हमलों का सामना करने की संभावना बढ़ जाती है। इस संबंध में आयोग की सिफारिश है कि निर्माण स्थलों पर फ्रेंच की सुविधा और डे केयर अनिवार्य रूप से होना चाहिए, ताकि मजदूरों के बच्चों को सड़क या साइटों पर सुरक्षित रखा जा सके।

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कुत्तों को खिलाने का विनियमन क्या है

आयोग ने अपनी सिफारिशों में कुत्तों के खिलाने के विनियमन का उल्लेख विशेष रूप से किया है। यह विनियमन पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) नियम 2023 है। इसमें कहा गया खेल मैदानों के आसपास कुत्ते को खाना खिलाने पर रोक लगाई जाए। इसी तरह पालतू पशु स्वामित्व नीति में कहा गया है कि बच्चों को कुत्ते काटने की घटना को कम करने के लिए पालतू पशु स्वामित्व नीतियां बनाई और लागू की जानी चाहिए। इसमें सभी पालतू जानवरों के लिए अनिवार्य पंजीकरण, नसबंदी और टीकाकरण का रिकार्ड रखा जा सके। आयोग ने ये भी कहा है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कुत्तों की नसबंदी (बधियाकरण) करनी चाहिए। खासकर उन क्षेत्रों में जहां आंगनबाड़ी और स्कूल हैं।

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