पंकज गुप्ते- बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म और हत्या जैसे जघन्य अपराध पर सख्त रुख अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ किया कि, जब वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य मजबूत हों, तो आरोपी को किसी भी तरह की राहत नहीं दी जा सकती। इसी के तहत बीजापुर के चर्चित मामले में दोषी की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया है।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वर्ष 2020 में बीजापुर जिले में हुई नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी की सजा को यथावत रखते हुए उसकी अपील खारिज कर दी है। डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि भले ही मामला प्रत्यक्षदर्शी गवाहों पर आधारित नहीं है, लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी इतनी मजबूत है कि आरोपी की संलिप्तता पूरी तरह साबित होती है।
लापता होने के बाद बरामद हुआ पीड़िता का शव
कोर्ट ने अपने फैसले में उल्लेख किया कि, पीड़िता को आखिरी बार आरोपी के साथ देखा गया था, जिसके बाद वह लापता हो गई और बाद में उसका शव बरामद हुआ। जांच के दौरान मिले साक्ष्य, मेडिकल रिपोर्ट और फोरेंसिक जांच को अदालत ने बेहद महत्वपूर्ण माना।
निर्णायक साबित हुई डीएनए रिपोर्ट
विशेष रूप से डीएनए रिपोर्ट इस मामले में निर्णायक साबित हुई, जिसमें घटनास्थल से मिले जैविक नमूनों का आरोपी से मेल होना पाया गया। कोर्ट ने कहा कि डीएनए साक्ष्य वैज्ञानिक रूप से अत्यंत विश्वसनीय होते हैं और इस मामले में उनकी कड़ी पूरी तरह सुरक्षित और प्रमाणित रही।
सभी तर्कों को कोर्ट ने किया खारिज
इसके अलावा, आरोपी द्वारा किया गया अतिरिक्त न्यायिक स्वीकारोक्ति भी अदालत को विश्वसनीय लगी, जिसे गवाहों ने पुष्ट किया। बचाव पक्ष के सभी तर्कों को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि, उपलब्ध साक्ष्य किसी अन्य संभावना को पूरी तरह नकारते हैं।
पॉक्सो एक्ट के तहत और गंभीर होता है मामला
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि, पीड़िता की उम्र घटना के समय 12 वर्ष से कम थी, जिससे मामला पॉक्सो एक्ट के तहत और गंभीर हो जाता है। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को सही ठहराया गया।
ट्रायल कोर्ट का फैसला बरकरार
अंत में हाईकोर्ट ने कहा कि, ऐसे जघन्य अपराधों में केवल प्रत्यक्षदर्शी के अभाव को आधार बनाकर आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती, यदि वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य मजबूत हों। कोर्ट ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
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