पंकज गुप्ते- बिलासपुर। बिलासपुर शहर में लगातार बढ़ रही चोरी और लूट की घटनाओं के बीच अब एक नया तरीका सामने आ रहा है, जिससे अपराधी आसानी से नकदी हासिल कर रहे हैं। आरोप है कि, चोरी के जेवरात सीधे गोल्ड लोन देने वाली कंपनियों और बैंकों में गिरवी रखे जा रहे हैं, जिससे न केवल अपराधियों को फायदा हो रहा है, बल्कि जांच एजेंसियों के लिए भी चुनौती बढ़ गई है।
कार्रवाई में बड़ा खुलासा
हाल ही में सिविल लाइन थाना पुलिस ने एक मामले का खुलासा करते हुए एक शातिर चोर और मणिपुरम फाइनेंस के मैनेजर को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि मैनेजर ने चोरी के जेवरात को गिरवी रखकर लोन दिया और बाद में उसे गलाकर ठिकाने लगाने की कोशिश की गई। पुलिस ने आरोपियों के पास से करीब 40 ग्राम गला हुआ सोना भी बरामद किया है।
सराफा एसोसिएशन ने जताई नाराजगी
इस पूरे मामले को लेकर बिलासपुर सराफा एसोसिएशन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष कमल सोनी ने कहा कि अपराधी अब चोरी का माल खपाने के लिए बैंकों का सहारा ले रहे हैं, क्योंकि वहां कागजी औपचारिकताओं के बाद आसानी से नकदी मिल जाती है।
जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल
एसोसिएशन का आरोप है कि कई बैंक और गोल्ड लोन कंपनियां बिना उचित बिल, आभूषणों की शुद्धता की जांच किए बिना ही लोन स्वीकृत कर देती हैं। इससे चोरी के मामलों को अप्रत्यक्ष बढ़ावा मिल रहा है। व्यापारियों का कहना है कि वे संदिग्ध ग्राहकों से लेनदेन से बचते हैं, लेकिन जब चोरी का माल बैंक में जमा होता है, तो इसकी बदनामी सराफा कारोबारियों पर ही आती है। इससे उनकी छवि और व्यवसाय दोनों प्रभावित होते हैं।
प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग
सराफा एसोसिएशन ने प्रशासन से मांग की है कि गोल्ड लोन देने से पहले सख्त जांच प्रक्रिया लागू की जाए। गोल्ड लोन देते समय मूल खरीदी बिल अनिवार्य किया जाए। बड़ी मात्रा में जेवर लेकर आने वालों की सूचना पुलिस को दी जाए और केवाईसी प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जाए।
साझा नेटवर्क बनाने का सुझाव
एसोसिएशन ने यह भी सुझाव दिया है कि बैंक, पुलिस और सराफा व्यापारियों के बीच एक समन्वित नेटवर्क तैयार किया जाए। इससे संदिग्ध लेनदेन की तुरंत पहचान हो सकेगी और चोरी के माल की खरीद पर रोक लगाई जा सकेगी।
बढ़ती चिंता का विषय
गोल्ड लोन सुविधा जहां आम लोगों के लिए मददगार साबित हो रही है, वहीं इसका दुरुपयोग अब कानून व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। ऐसे में समय रहते सख्त नियम लागू करना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
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