बलौदाबाजार जिले में भाटापारा स्थित दाल मिल में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की छापेमारी में 8 लाख रुपये की 316 बोरी उड़द दाल और संदिग्ध केमिकल जब्त किए हैं।

कुश अग्रवाल- बलौदाबाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में उपभोक्ताओं की थाली तक ज़हर पहुंचाने का सनसनीखेज साजिश का खुलासा हुआ है। उड़द दाल को चमकदार और गहरा दिखाने के लिए उसमें खतरनाक रासायनिक काले रंग की मिलावट की जा रही थी। इस चौंकाने वाले मामले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए भाटापारा स्थित एक दाल मिल पर छापा मारा है।

मिली जानकारी के अनुसार, छापेमारी के दौरान अन्नपूर्णा ट्रेडर्स (दाल मिल), सुहेला रोड खोखली परिसर में टीम को एक ड्रम में संदिग्ध काला केमिकल रंग मिला। अधिकारियों को आशंका है कि, इसी रंग से उड़द दाल को कृत्रिम रूप से गहरा बनाकर बाजार में बेचा जा रहा था। यानी लोगों की सेहत के साथ खुला खिलवाड़ किया जा रहा था।

8 लाख की 316 बोरी उड़द दाल और संदिग्ध रासायनिक रंग जब्त
कार्रवाई के दौरान टीम ने करीब 8 लाख रुपये कीमत की 316 बोरी उड़द दाल और संदिग्ध रासायनिक रंग को मौके पर ही जब्त कर लिया। पूरे मामले के नमूने जांच के लिए रायपुर स्थित राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेज दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि, जांच रिपोर्ट आते ही दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करते हुए मामला न्यायालय में पेश किया जाएगा।नकली दवा कारोबारी से सांठ-गांठ
वहीं 12 फरवरी को एंटीबायोटिक की नकली दवा के प्रमुख संदेही के साथ राजधानी के होटल में बैठक करने वाले खाद्य एवं औषधि प्रशासन के सहायक नियंत्रक को राज्य शासन ने निलंबित कर दिया। अफसर जांच से जुड़े दस्तावेज आरोपियों को दिखाते हुए कैमरे में कैद हो गया था। मामले की बारह दिन तक चली जांच के बाद उसके निलंबन का आदेश जारी किया गया है। इस प्रकरण से जुड़े कुछ अन्य पर कार्रवाई किए जाने की तैयारी है।अफसरों को कारण बताओ नोटिस किया था जारी
नकली दवा के संवेदनशील मामले में एडीसी संजय नेताम जांच अधिकारी भी था। मामले की जांच उस दौरान विवादों में आ गई थी, जब रायपुर जिले के सहायक नियंत्रक ने लापरवाही का आरोप लगाकर कुछ जांच अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया था। इस मामले को लेकर विभागीय तनाव कायम ही था कि मामले में नया ट्विस्ट तब आया नोटिस जारी करने वाले अधिकारी संजय नेताम और मामले के प्रमुख संदेही का एक होटल में मीटिंग करते हुए वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो गया। 

अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई होने की संभावना
सारंगढ़ के दवा कारोबारी खेमराज केसरवानी और उनकी पत्नी के साथ सुभाष स्टेडियम के पिछले हिस्से में स्थित रेस्टॉरेट में मीटिंग करते हुए पकड़े गए। नेताम उन्हें मामले से संबंधित दस्तावेज दिखाने के साथ प्रकरण के बारे में कुछ समझा रहे थे। इस दौरान आशंका जताई गई थी कि, यह मीटिंग नकली दवाई की जांच को प्रभावित करने वाली थी। इसके साथ ही मामले में लेनदेन के आरोप भी लगे थे। इस मामले की जांच के बाद सौंपी गई रिपोर्ट के आधार पर संजय नेताम को निलंबित करने का आदेश भी जारी कर दिया गया। प्रकरण से जुड़े कुछ अन्य अधिकारियों पर भी आने वाले दिनों में कार्रवाई होने की संभावना है। निलंबन के बाद संजय नेताम को नवा रायपुर के संचालक खाद्य एवं औषधि प्रशासन के कार्यालय में अटैच किया गया है।

खाद्य अफसर भी थे मौजूद
इस मामले में संदेह इसलिए अधिक बढ़ गया है, क्योंकि जिस होटल की गैलेरी में औषधि निरीक्षक संदेही कारोबारी के साथ बैठक कर रहा था, वहीं भीतर खाद्य निरीक्षक मौजूद थे। उस दौरान भीतर अफसरों की पार्टी होने का दावा किया गया था, मगर बैठक के पहले एक महिला अधिकारी को संजय नेताम के साथ होटल से बाहर निकलते देखा गया था। इस महिला अफसर को रायपुर से हटाकर जशपुर भेज दिया गया है।

पांच साल जांच पेंडिंग
निलंबन के शिकार हुए अधिकारी संजय नेताम पर कोरिया की पोस्टिंग के दौरान व्यापक पैमाने पर दवा दुकान का लाइसेंस 30 से 40 हजार रुपए ले-लेकर जारी करने का आरोप लगा था। केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन की शिकायत पर लाइसेंस निरस्त किए गए थे। इस मामले की विभिन्न स्तर पर शिकायत हुई थी, मगर मामले में किसी भी तरह की कार्रवाई को पेंडिंग कर दिया गया था।