छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में कई बड़े जलाशय मौजूद हैं। लेकिन मार्च के पहले सप्ताह में ही उनका पानी इतना घट गया है कि, जल संकट पैदा होने का खतरा मंडरा रहा है।

कुश अग्रवाल- बलौदा बाजार। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार जिले में जलाशयों और भूजल का तेजी से गिरता स्तर अब गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। मार्च महीने के पहले सप्ताह में ही जिले के कई क्षेत्रों में पानी की कमी के संकेत मिलने लगे हैं। भूजल के अत्यधिक दोहन और कम वर्षा के कारण पारंपरिक जल स्रोत तेजी से सूखते नजर आ रहे हैं, जिससे आने वाले समय में पेयजल और सिंचाई संकट की आशंका बढ़ गई है।

तेजी से घट रहा बड़े जलाशयों का पानी
जिले में आधा दर्जन से अधिक बड़े जलाशय मौजूद हैं, जिनमें कसडोल का बलार डेम, पलारी का बालसमंद जलाशय और बलौदा बाजार का कुकुरदी जलाशय प्रमुख हैं। इन जलाशयों का जल स्तर लगातार कम होता जा रहा है। कई जलाशयों में तो क्षमता का 30 प्रतिशत पानी ही बचा है। वहीं कई गांवों के तालाबों में भी पानी तेजी से घट रहा है। पहले जहां इन तालाबों में अप्रैल–मई तक पानी बना रहता था, वहीं इस बार मार्च महीने में ही इनके सूखने की स्थिति बनती नजर आ रही है।

रबी फसलों की सिंचाई को माना जा रहा संकट का कारण
कई गांवों में भूजल स्तर नीचे जाने के कारण अभी से पेयजल की समस्या शुरू हो गई है। हैंडपंप और बोरवेल का पानी का स्तर भी कम होने लगा है, जिससे शहरी क्षेत्रों के अलावा ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। जल संकट का सबसे बड़ा कारण गर्मी के मौसम में होने वाली रबी फसलों की सिंचाई को माना जा रहा है। किसान बड़ी संख्या में बोर खनन कर जमीन के भीतर से पानी निकालकर खेतों की सिंचाई कर रहे हैं। प्रतिबंध के बावजूद कई क्षेत्रों में अधिक पानी वाली फसलों जैसे धान की खेती भी की जा रही है, जिससे भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है।

गंगरेल बांध से भरा जाता है जलाशयों में पानी
पूरे बलौदा बाजार जिले के जलाशयों को भरने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से धमतरी स्थित गंगरेल बांध से आने वाले पानी पर निर्भर है। पिछले वर्षों में अप्रैल और मई महीने में गंगरेल बांध से नहरों के माध्यम से जलाशयों और तालाबों को भरा जाता था। लेकिन इस बार जिस तेजी से जल स्तर गिर रहा है, उसे देखते हुए समय से पहले ही जल संकट की आशंका जताई जा रही है।

'मोर गांव मोर पानी' अभियान चलाएगा प्रशासन 
इधर प्रशासन ने भी स्थिति को देखते हुए “मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत सोखता गड्ढों के निर्माण और जल संरक्षण के कार्यों को तेज करने की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जल संरक्षण और भूजल दोहन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले महीनों में बलौदा बाजार जिले को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।