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बालोद जिले के खैरतराई गांव में तालाब में डूबने से नीलगाय की मौत हो गई। जंगल से भटककर शहर में पहुंची नीलगाय का शव तालाब में मिला, वन विभाग ने पोस्टमार्टम कर जांच शुरू की।

राहुल भूतड़ा- बालोद। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में वन्यजीवों के शहरी क्षेत्रों की ओर भटकने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में एक दुखद मामला सामने आया है, जहां शहर से लगे ग्राम खैरतराई में एक नीलगाय की तालाब में डूबने से मौत हो गई।

मिली जानकारी के अनुसार, यह नीलगाय पास के जंगल से भटककर शहरी इलाके में पहुंच गई थी। शुक्रवार को इसे जिला मुख्यालय के वार्ड क्रमांक 01 स्थित एक तालाब के पास देखा गया था, जिससे क्षेत्र में लोगों के बीच कौतूहल का माहौल बना हुआ था। हालांकि, अगले ही दिन शनिवार सुबह ग्राम खैरतराई के तालाब में नीलगाय का शव तैरता हुआ मिला।

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम पहुंची
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को जानकारी दी। सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को तालाब से बाहर निकलवाया गया। प्रारंभिक तौर पर मामला तालाब में घुसने और डूबने से मौत का माना जा रहा है।

पोस्टमार्टम के बाद होगा अंतिम संस्कार
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, नीलगाय के शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिसके बाद नियमानुसार अंतिम संस्कार किया जाएगा। यह पूरा मामला बालोद वन परिक्षेत्र का है। 

रायगढ़ जिले में दो हाथी शावकों की मौत
वहीं एक हफ्ते पहले रायगढ़ जिले से हाथियों की मौत की खबर मिली थी। घरघोड़ा वन परिक्षेत्र के सुहाई जंगल में कुरकुट नदी किनारे दो शावकों के शव मिले हैं। मिली जानकारी के मुताबिक, करीब दो-ढाई साल उम्र के दो हाथियों की संदिग्ध मौत की सूचना ग्रामीणों ने वन विभाग को दी। सूचना मिलने पर SDO फॉरेस्ट आशुतोष मंडावा और रेंजर विक्रांत सिंह टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पशु चिकित्सकों की मौजूदगी में दोनों शावकों का पोस्टमार्टम किया जा रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही दोनो शावकों के मौत के कारणों का खुलासा होगा। फिलहाल वन विभाग जांच में जुटी हुई है। 

पहले भी हुई है रायगए़ जिले में हाथियों की मौतें
उल्लेखनीय है कि, इससे पहले भी पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में सबसे ज्यादा हाथियों के मौतों की खबर रायगढ़ जिले से ही आती रही है। कई बार ग्रामीणों द्वारा खेतों की रक्षा जंगली जानवरों से करने के लिए बिछाए गए बिजली करंट की चपेट में आने से भी हाथियों की मौतें इस जिले में हुई हैं।

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