बालोद। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के कीट विज्ञान विभाग के पीएचडी शोधार्थी एकानंद ढीमर ने मछुवारा समाज के उत्थान की दिशा में एक नई और अभिनव पहल कर पचपेड़ी बांध को नई पहचान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। पचपेड़ी बांध, जो कि देवरी ‘क’ ग्राम में स्थित है और गुंडरदेही विकासखंड से लगभग 7 किलोमीटर उत्तर दिशा में स्थित है। जय भारती मत्स्य पालन सहकारी समिति, गुंडरदेही को मत्स्य पालन हेतु पट्टे पर आबंटित है। बीते कई वर्षों से कम जलग्रहण क्षेत्र, कम जलधारण क्षमता, कम गहराई, मछली चोरी, बेसरम (Ipomoea carnea), दूब (Cynodon dactylon), चितावार (Typha latifolia) एवं अन्य खरपतवारों की अधिकता के कारण समिति को मत्स्य पालन में लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा था।
मछली पालन को बचाने मखाना खेती की नई पहल
इन चुनौतियों से निपटने के लिए वर्ष 2024-25 में एकानंद ढीमर ने डॉ. गजेन्द्र चंद्राकर, वैज्ञानिक, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर के मार्गदर्शन में एक नई पहल के रूप में मखाना (फॉक्स नट) (Euryale ferox) की खेती को मछली पालन के साथ जोड़ने का प्रयोग किया। मखाना, जिसे काला हीरा भी कहा जाता है, एक जलीय फसल है, जिसकी खेती 1.5 से 2 फीट जलस्तर वाले तालाबों में मछली पालन के साथ की जा सकती है। इसमें लगभग 10 प्रतिशत क्षेत्र ऑक्सीजन के लिए खुला रखा जाता है। इससे न केवल मछली चोरी की संभावना कम होती है, बल्कि जलधारण क्षमता बढ़ती है। मखाना के पौधों के सड़ने के बाद जू-प्लैंकटन एवं फाइटो-प्लैंकटन की मात्रा में वृद्धि होती है, जिससे मछली उत्पादन भी बढ़ता है। यह मॉडल उपेक्षित एवं नुकसान झेल रहे तालाबों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर उभरा है।
पहले प्रयास में लागत अधिक, लाभ कम
विगत वर्ष जेसीबी से तालाब निर्माण, खरपतवार सफाई, समतलीकरण एवं ट्यूबवेल से पानी खरीदकर मखाना-सह-मछली पालन की शुरुआत की गई, जिसमें बहोत लागत आई। हालांकि अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाने के कारण यह खेती छोड़ने की स्थिति तक पहुँच गई थी।
मखाना बोर्ड की घोषणा से लौटी उम्मीद
लेकिन 19 नवंबर को केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के धमतरी प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ को मखाना बोर्ड में शामिल करने की घोषणा ने एक बार फिर मछुवारा समाज में नई उम्मीद जगा दी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त सहजा निगार के सकारात्मक वक्तव्य ने इस पहल को और मजबूती प्रदान की, जिससे मछुवारा समाज में उत्साह का संचार हुआ।
2026 में 50 एकड़ में व्यापक विस्तार
इसी उत्साह के साथ वर्ष 2026 में पचपेड़ी बांध क्षेत्र में 50 एकड़ में सफाई, गहरीकरण, समतलीकरण एवं जुताई का कार्य किया गया, जिस पर बहोत लागत आई। इस कार्य का अवलोकन डॉ. गजेन्द्र चंद्राकर द्वारा किया गया तथा उन्होंने आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान किया।इस परियोजना का दीर्घकालिक लक्ष्य पचपेड़ी बांध को छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा मखाना उत्पादन केंद्र बनाना है, जिसकी अपार संभावनाएं हैं।
सिंचाई जल की प्रतीक्षा
सिंचाई जल उपलब्ध कराने हेतु लगातार बलोद जिला कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा, अनुविभागीय अधिकारी एवं जल संसाधन उपसंभाग क्रमांक-1, आदमाबाद (बलोद) को आवेदन किया जा रहा है। सिंचाई जल उपलब्ध होते ही मखाना की रोपाई का कार्य तत्काल प्रारंभ किया जा सकेगा। यह पहल न केवल वैज्ञानिक नवाचार का उदाहरण है, बल्कि मछुवारा समाज के लिए आर्थिक सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी साबित हो सकती है।
