रायपुर। चार साल पहले एक्सीडेंट में लगी चोट की वजह से 31 वर्षीय मरीज का कंधा बेकार हो रहा था। चोट की वजह से उसके बाएं हाथ की नसें और मांसपेशी निष्क्रय हो चुकी थीं। एम्स के डाक्टरों ने दो चरणों में सर्जरी प्रक्रिया पूरी की और जांघ की मांसपेशी हाथ में प्रत्यारोपित कर उसे ठीक कर दिया। 31 वर्षीय मरीज अपनी समस्या लेकर इलाज के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) आया था। जांच के दौरान पता चला कि करीब चार साल पहले उसकी हाथ की नसों (ब्रैकियल प्लेक्सस) में गंभीर चोट लगी थी। इस चोट पर उसने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, जिसकी वजह से धीरे-धीरे हाथ की नस क्षतिग्रस्त होने लगी थी और मांसपेशियां भी काम करना बंद कर रही हैं।
चिकित्सकों के अनुसार , उसका बायां हाथ लगभग निष्क्रिय हो गया था। जांच के बाद डॉक्टरों की टीम ने पहले चरण में कंधे की गति सुधारने के लिए ट्रेपेजियस मांसपेशी का स्थानांतरण किया गया। दूसरे चरण में कोहनी की कार्यक्षमता वापस लाने के लिए जांघ से ग्रेसिलिस मांसपेशी को निकालकर माइक्रोसर्जरी तकनीक से हाथ में प्रत्यारोपित किया गया। ऑपरेशन को प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डा. जितेन मिश्रा, डॉ. शामेंद्र, डॉ. बिक्रम, डॉ. जलाज, डॉ. अविजीत और डॉ. धरनी तथा एनेस्थीसिया से डा. नूपुर करन की टीम ने पूरा किया। चिकित्सकीय टीम की सराहना करते हुए कार्यकारी निदेशक अशोक जिंदल ने कहा कि ऐसे प्रयास गंभीर चोटों वाले मरीजों के जीवन में बड़ा बदलाव लाते हैं।