रायपुर। छत्तीसगढ़ में बरसों बरस से जंगली हाथियों के हमले झेल रहे राज्य के लोगों को अब एआई के जरिए राहत मिलने की उम्मीद बंधी है। दरअसल तमिलनाडु और केरल की तरह यहां भी एआई आधारित कैमरे लगाने की तैयारी है। इन कैमरों की रेंज में जैसे ही हाथी आएंगे, उसका तेज आवाज का अलार्म बजना शुरू होगा और हाथियों को भागना पड़ेगा।
यही नहीं, एक नए प्रयोग के तौर पर अब हैंगिंग फैंसिंग लगाने की तैयारी भी है, इससे फैंसिंग से टच होते ही हाथी को करंट का झटका लगेगा। यह उपाय भी हाथियों से लोगों की सुरक्षा करेगा।
ये है मामला
राज्य में पिछले कई बरसों से जंगली हाथियों की आमद और उनके हमले बढ़े हैं। वन विभाग के अनुमान के मुताबिक प्रभावित जिलों में करीब 400 हाथियों के दल यहां वहां भ्रमण कर रहे हैं। इन हाथियों के हमले से बड़ी संख्या में जनहानि, फसल हानि और लोगों के कच्चे घर नेस्तनाबूद हो चुके हैं। राज्य में सबसे अधिक हाथी प्रभावित वन मंडलों में रायगढ़, धरमजयगढ़, कोरबा, कटघोरा, सूरजपुर, जशपुर प्रभावित हैं। इनके साथ ही धमतरी और गरियाबंद क्षेत्र में जंगली हाथियों के झुंड़ आ जाते हैं और खतरा पैदा करते हैं।
'गजसंकेत' ऐप से मानव-हाथी संघर्ष में बड़ी कमी
इन प्रयोगों से पहले वन विभाग ने छत्तीसगढ़ में मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए वन विभाग द्वारा विकसित 'गजसंकेत ऐप प्रभावी साबित हो रहा है। इस तकनीक आधारित पहल से गांवों में समय रहते अलर्ट पहुंचने लगे हैं, जिससे जनहानि और फसल नुकसान में उल्लेखनीय कमी आई है। यह ऐप विशेष रूप से गरियाबंद और धमतरी जिलों में शुरू किया गया, जिसे बाद में पूरे राज्य में लागू कर दिया गया। ऐप के जरिए हाथियों के झुंड की गतिविधियों को ट्रैक कर आसपास के 10 किलोमीटर दायरे में रहने वाले ग्रामीणों को रियल-टाइम वॉयस कॉल, एसएमएस और व्हाट्सऐप के माध्यम से अलर्ट भेजा जाता है।
तीन साल के प्रयोग से कम हुए हमले
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव प्रबंधन एवं जैव विविधता संरक्षण-सह-मुख्य वन्यजीव वार्डन) अरुण कुमार पांडेय के मुताबिक पिछले तीन साल हाथियों के हमले कम करने के लिए किए गए प्रयोगों से सफलता मिली है। हर साल जहां 80 से अधिक संख्या में जनहानि होती थी, उसकी संख्या कम होकर 50 से 60 तक हो गई है। अब दो नए प्रयोग करने की तैयारी है।
अब इन तरीकों से होगी रक्षा
राज्य शासन का वन विभाग हाथियों के हमलों से लोगों को बचाने के लिए लंबे समय से कोई न कोई उपाय जुटाने की कोशिश में रहता है, इस क्रम में कई तरीके अपनाने के बाद अब हाथी प्रभावित राज्यों तमिलनाडु और केरल की तर्ज पर यहां भी प्रयोग करने की तैयारी है। बताया गया है कि इस सिलसिले में एआई आधारित स्ट्रीट लाइट लगाने की तैयारी है। यह सिस्टम इस तरह काम करेगा कि जैसे ही जंगली हाथी लाइट के रेंज में आएंगे, सिस्टम से अलार्म बजना शुरु होगा। इसकी आवाज सुनकर ही हाथी भागने लगेंगे। इसी तरह एक और नया प्रयोग भी करने की तैयारी है। सोलर आधारित हैंगिग (झूलती हुई) फेंसिंग लगाई जाएगी। यह फैसिंग जैसे ही हाथी से टकराएगी, हाथी को करंट का झटका लगेगा जो हाथी को भागने पर मजबूर कर देगा।
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