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रायपुर जिले के आरंग विकासखंड अंतर्गत ग्राम निस्दा में 10 हेक्टेयर जलभराव भूमि पर मखाना (फॉक्स नट) की खेती की शुरुआत की गई।

आरंग। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के आरंग विकासखंड अंतर्गत ग्राम निस्दा में आज मखाना (फॉक्स नट) की खेती का रोपाई कार्य विधिवत पूजा-अर्चना के साथ प्रारंभ किया गया। यह कार्य इंदिरा गांधी कृषि विश्व विद्यालय के प्रमुख वैज्ञानिक एवं मखाना विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र चंद्राकर के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम निस्दा के अनुपयोगी एवं जलभराव वाले क्षेत्र का वैज्ञानिक पद्धति से समतलीकरण कर लगभग 10 हेक्टेयर क्षेत्र में मखाना की खेती प्रारंभ की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि, यह फसल जलयुक्त भूमि के लिए अत्यंत उपयुक्त है तथा कम लागत में बेहतर लाभ देने वाली फसल के रूप में उभर रही है। इससे स्थानीय किसानों को अतिरिक्त आय का नया स्रोत प्राप्त होगा।

1जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुआ शुभारंभ
रोपाई कार्य के शुभारंभ अवसर पर ग्राम पंचायत निस्दा के सरपंच मानसिंग निषाद, उपसरपंच खुम्मन सिन्हा सहित पंचगण एस. कुमार साहू, अनीता साहू, सूर्यकांत साहू, तोमीन साहू, चंदनलाल कन्नौज, हिरौंदी साहू, भूखन साहू, टुकेश्वर निषाद, लता ध्रुव, कोमल प्रसाद साहू, नागेश साहू, लक्ष्मी नारायण साहू, केनू निषाद, सुनीता साहू, कुंती साहू, कुमारी निषाद, योगेश्वरी निषाद, सरिता निषाद एवं दुर्गा साहू उपस्थित रहे। सभी जनप्रतिनिधियों एवं ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना कर रोपाई कार्य का शुभारंभ किया। ग्रामीणों में इस नई पहल को लेकर उत्साह देखा गया। स्थानीय किसानों का कहना है कि यदि मखाना उत्पादन सफल रहता है तो यह क्षेत्र के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी सिद्ध होगा।

2'सुपरफूड' के रूप में स्थापित करने की अपार संभावनाएं 
इस अवसर पर डॉ. गजेंद्र चंद्राकर ने कहा कि, छत्तीसगढ़ में जलभराव एवं अनुपयोगी जल क्षेत्रों की कोई कमी नहीं है। यदि वैज्ञानिक पद्धति से मखाना की खेती की जाए तो यह किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। मखाना एक उच्च मूल्य की फसल है, जिसकी देश और विदेश दोनों बाजारों में मांग लगातार बढ़ रही है। हमारा प्रयास है कि, किसानों को प्रशिक्षण, उन्नत तकनीक और उचित मार्गदर्शन देकर इसे आय का स्थायी स्रोत बनाया जाए। उन्होंने आगे बताया कि, मखाना की खेती से जुड़े प्रसंस्करण एवं विपणन की व्यवस्था विकसित होने पर ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

2मखाना बोर्ड की भूमिका
उल्लेखनीय है कि, मखाना बोर्ड भारत सरकार द्वारा स्थापित एक संगठन है, जिसका उद्देश्य मखाना की खेती, प्रसंस्करण एवं विपणन को बढ़ावा देना है। यह बोर्ड किसानों को उन्नत बीज, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग प्रदान करने के साथ-साथ किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को प्रोत्साहित करता है, ताकि उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके। विशेषज्ञों का मानना है कि, मखाना को वैश्विक स्तर पर 'सुपरफूड' के रूप में स्थापित करने की अपार संभावनाएं हैं। ग्राम निस्दा में प्रारंभ की गई यह पहल आने वाले समय में पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक मॉडल परियोजना सिद्ध हो सकती है।2

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