वाशिंगटन। अमेरिका में मार्च महीने में थोक महंगाई तीन साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है। यूएस ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (बीएलएस) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वार्षिक थोक महंगाई दर 4% तक पहुंच गई। यह वृद्धि मुख्य रूप से तेल और ऊर्जा कीमतों में तेज उछाल के कारण हुई है। खासतौर पर पेट्रोल (गैसोलीन) की कीमतों में 15.7% की वृद्धि ने बड़ा योगदान दिया। महीने दर महीने आधार पर भी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) में 0.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह वही दर है जो फरवरी में भी देखने को मिली थी। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान युद्ध के कारण तेल बाजार में अस्थिरता आई है। इसका सीधा असर उत्पादन लागत और थोक कीमतों पर पड़ा है।
उम्मीद से कहीं बेहतर रहे आंकड़े
नर्डवॉलेट की वरिष्ठ अर्थशास्त्री एलिजाबेथ रेंटर ने कहा कि ऊर्जा महंगाई इसका मुख्य कारण है। उन्होंने बताया कि युद्ध से पहले भी महंगाई लगातार बढ़ रही थी। नवंबर से ही हर महीने कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही थी। यानी महंगाई पहले से नियंत्रण में नहीं थी और अब और बढ़ गई है। हालांकि, महंगाई बढ़ने के बावजूद आंकड़े विशेषज्ञों की आशंका से थोड़े बेहतर रहे। अर्थशास्त्रियों ने अनुमान लगाया था कि कीमतें 1.1% तक बढ़ सकती हैं। और वार्षिक महंगाई दर 4.6% तक पहुंचने की संभावना जताई गई थी। लेकिन वास्तविक आंकड़े इससे कम रहे, जिससे कुछ राहत मिली। खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट और सेवाओं की स्थिर कीमतों ने असर को कम किया। इससे तेल कीमतों के झटके का पूरा प्रभाव नहीं दिखा।
कोर महंगाई में सीमित बढ़ोतरी
रिपोर्ट के आंकड़ों पर समय का भी प्रभाव पड़ा है। बीएलएस ने 13 मार्च वाले सप्ताह के डेटा को आधार बनाया। इस हिसाब से डेटा 10 मार्च तक का माना गया। यह समय अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर हमले के दो हफ्ते बाद का था। इस वजह से तेल संकट का पूरा असर आंकड़ों में शामिल नहीं हो पाया। आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। खाद्य और ऊर्जा जैसे अस्थिर घटकों को हटाने पर कोर पीपीआई में मामूली बढ़ोतरी हुई। मार्च में यह सिर्फ 0.1% बढ़ा। जबकि सालाना आधार पर यह 3.8% पर स्थिर रहा। यह संकेत देता है कि मूल महंगाई अभी नियंत्रित स्तर पर है। फिर भी ऊर्जा कीमतों का दबाव बना हुआ है। कुल मिलाकर, थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी भविष्य के लिए चिंता का संकेत है।









