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Pappu Yadav Bail: पटना की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने मंगलवार को सांसद पप्पू यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने 1995 के पुनाईचक मकान कब्जा मामले में पप्पू यादव को जमानत दे दी है। हालांकि, इस राहत के बावजूद वे अभी जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे।
दरअसल, शुक्रवार रात गिरफ्तारी के समय हुए हंगामे को लेकर पटना के बुद्धा कॉलोनी थाने में उनके खिलाफ एक नई एफआईआर दर्ज की गई थी। इस नए मामले में पुलिस ने उन्हें रिमांड पर ले लिया है, जिसकी वजह से उन्हें फिलहाल बेऊर जेल में ही रहना होगा।
बुधवार को होगी अगले मामले की सुनवाई
बुद्धा कॉलोनी थाने में दर्ज मामले पर अब बुधवार को अदालत में सुनवाई होगी। इसका मतलब है कि सांसद को कम से कम एक और रात जेल की सलाखों के पीछे बितानी पड़ेगी।
मंगलवार को कोर्ट में पेशी के दौरान पप्पू यादव काफी आक्रामक नजर आए। उन्होंने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी हत्या की साजिश रची जा रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है।
आधी रात की गिरफ्तारी
सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। शुक्रवार की आधी रात को पटना पुलिस 31 साल पुराने वारंट को लेकर उनके मंदिरी आवास पहुंची थी। करीब ढाई घंटे तक उनके समर्थकों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
गिरफ्तारी के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने का हवाला देते हुए उन्हें पहले आईजीआईएमएस और फिर पीएमसीएच के कैदी वार्ड में भर्ती कराया गया था। रविवार को स्वास्थ्य में सुधार की रिपोर्ट के बाद उन्हें बेऊर जेल भेजा गया था।
क्या था 31 साल पुराना वह विवाद?
यह पूरा मामला साल 1995 का है, जब पटना के पुनाईचक इलाके में एक मकान पर अवैध कब्जे का आरोप लगा था। शिकायतकर्ता विनोद बिहारी लाल के अनुसार, उनका मकान किराए पर लेकर उसे राजनीतिक कार्यालय में तब्दील कर दिया गया था। यह मामला पिछले तीन दशकों से एमपी-एमएलए कोर्ट में लंबित था। बार-बार समन भेजने के बाद भी जब पप्पू यादव पेश नहीं हुए, तो अदालत ने गैर-जमानती वारंट जारी किया था, जिसके आधार पर पिछले सप्ताह यह बड़ी कार्रवाई की गई।
