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पटना सिविल कोर्ट को एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है। सांसद पप्पू यादव की जमानत पर सुनवाई से पहले मिली इस धमकी के कारण न्यायिक कार्य प्रभावित हुए हैं। जानें क्या है पूरा मामला।

Patna Civil Court Bomb Threat: पटना के बेऊर जेल में बंद निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की जमानत याचिका पर गुरुवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन सुबह-सुबह कोर्ट परिसर को बम से उड़ाने की धमकी भरे ईमेल ने हड़कंप मचा दिया। यह इस हफ्ते की तीसरी ऐसी धमकी है जिसने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।

इससे पहले सोमवार और बुधवार को भी इसी तरह की धमकी के कारण अदालत का काम प्रभावित हुआ था। बार-बार मिल रही इन धमकियों के चलते अब यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर कौन है जो पप्पू यादव की कानूनी राहत के रास्ते में रोड़ा अटकाना चाहता है।

वकीलों ने किया कार्य बहिष्कार
लगातार मिल रही धमकियों के बाद जिला अधिवक्ता संघ ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए वकीलों के लिए सूचना जारी की है। कोर्ट परिसर में सघन तलाशी अभियान चलाया गया और सुरक्षा बढ़ा दी गई। सुरक्षा चिंताओं के कारण दूसरे हाफ से ही न्यायिक कार्य शुरू करने का फैसला लिया गया।

ईमेल के जरिए मिली इस तीसरी धमकी में पूरी बिल्डिंग को उड़ाने की बात कही गई है, जिससे कर्मचारी और वकील काफी डरे हुए हैं। पुलिस साइबर सेल के जरिए धमकी देने वाले का पता लगाने की कोशिश कर रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है।

पप्पू यादव का तीखा पलटवार
इस बीच, पप्पू यादव के आधिकारिक एक्स (X) हैंडल से किए गए एक पोस्ट ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। पोस्ट में पटना पुलिस की कार्यक्षमता पर सवाल उठाते हुए लिखा गया कि जो पुलिस कोर्ट को बम की धमकी से नहीं बचा पा रही, उस पर धिक्कार है।

पोस्ट में आरोप लगाया गया कि पुलिस पप्पू यादव के नाम से कांपती है, इसलिए उन्हें जेल में रखा गया है। सांसद के समर्थकों का कहना है कि यह सब उन्हें जेल में रखने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।

जालसाजी और पुलिस कार्य में बाधा का मामला
पप्पू यादव को 7 फरवरी की रात गिरफ्तार किया गया था। उन पर 31 साल पुराने जालसाजी के एक मामले के साथ-साथ गिरफ्तारी के दौरान पुलिस कार्य में बाधा डालने का भी आरोप है।

मंगलवार को विशेष अदालत ने उन्हें 1995 के जालसाजी मामले में जमानत दे दी थी, लेकिन बुद्धा कॉलोनी थाने में दर्ज दूसरे मामले (72/2026) के कारण वह अब भी जेल में हैं। उनके वकील शिवनंदन भारती का आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर उनके मुवक्किल के खिलाफ नए मामले दर्ज किए हैं ताकि उनकी रिहाई में देरी की जा सके।

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