बिहार चुनाव में हार के बाद कांग्रेस ने बड़ी कार्रवाई की है। पूर्व विधायक छत्रपति यादव और एआईसीसी सदस्य आनंद माधव को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया है।

Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद कांग्रेस के भीतर उठा विवाद अब अनुशासनात्मक कार्रवाई में बदल गया है। पार्टी ने पूर्व विधायक छत्रपति यादव और एआईसीसी सदस्य सह पूर्व प्रवक्ता आनंद माधव को 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया है।

प्रदेश कांग्रेस अनुशासन समिति के अध्यक्ष कपिलदेव यादव ने बुधवार को इस फैसले की आधिकारिक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन नेताओं पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने और संगठन की छवि धूमिल करने के गंभीर आरोप थे, जिसकी गहन जांच के बाद शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है।

सदाकत आश्रम में हुआ था भारी बवाल
यह पूरा विवाद बिहार चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे को लेकर शुरू हुआ था। आनंद माधव और अन्य नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने टिकट वितरण में धांधली का दावा करते हुए पटना स्थित कांग्रेस मुख्यालय 'सदाकत आश्रम' में जोरदार प्रदर्शन किया था।

प्रदर्शन के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई थी। चुनाव परिणाम आने के बाद विवाद और गहरा गया, जब इन नेताओं ने खुलेआम प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और प्रभारी कृष्णा अल्लावरू पर टिकट बेचने जैसे संगीन आरोप लगाए।

हार के बाद फूट का नतीजा
बिहार चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार ने पार्टी के भीतर कलह को सतह पर ला दिया था। बागी गुट लगातार वर्तमान नेतृत्व को हार का जिम्मेदार ठहराते हुए इस्तीफे की मांग कर रहा था। पार्टी मुख्यालय में हुए बवाल और टिकटों की खरीद-फरोख्त के आरोपों ने कांग्रेस आलाकमान को असहज कर दिया था।

माना जा रहा है कि इन दो बड़े नामों पर कार्रवाई करके पार्टी ने अन्य बागियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अनुशासन समिति की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई
अनुशासन समिति के अनुसार, दोनों नेताओं के खिलाफ पर्याप्त सबूत पाए गए थे कि उन्होंने संगठनात्मक मर्यादाओं को पार किया है। आनंद माधव जहां एआईसीसी के सदस्य होने के साथ पार्टी का बड़ा चेहरा थे, वहीं छत्रपति यादव की भी जमीन पर मजबूत पकड़ मानी जाती थी।

इन दोनों के जाने से बिहार कांग्रेस के समीकरणों पर क्या असर पड़ेगा, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन फिलहाल पार्टी ने आंतरिक कलह को दबाने के लिए 'सर्जिकल स्ट्राइक' कर दी है।