बिहार विधानसभा में 'ब्राह्मणवाद' शब्द पर जमकर बवाल हुआ। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने विपक्ष पर समाज में जहर बोने का आरोप लगाया, वहीं स्पीकर ने विवादित शब्द को सदन की कार्यवाही से हटाने का आदेश दिया।

Bihar News: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शुक्रवार को 'ब्राह्मणवाद' शब्द के इस्तेमाल को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। सदन में यूजीसी (UGC) के नियमों और जातिगत भेदभाव के मुद्दे पर चर्चा के दौरान माहौल उस समय गरमा गया जब माले विधायक ने एक विशेष टिप्पणी की। इस विवाद के बाद विधानसभा अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा।

सदन में कैसे शुरू हुआ विवाद?
विवाद की शुरुआत भाकपा माले के विधायक संदीप सौरव द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव का मुद्दा उठाने से हुई। उन्होंने सदन में कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों में जातियों के आधार पर भेदभाव को रोकने के लिए यूजीसी के नए नियमों को बिहार में कड़ाई से लागू किया जाना चाहिए।

सौरव ने आरोप लगाया कि जब इन नियमों को लाने की कोशिश हुई, तो 'ब्राह्मणवादी' मानसिकता के लोगों ने इसका विरोध किया, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने रोहित वेमुला और अन्य छात्रों की मौतों का जिक्र करते हुए कहा कि 2019 से 2024 के बीच जातिगत विवादों में 118 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

विजय सिन्हा का पलटवार: 'समाज के साथ गद्दारी कर रहे ये लोग'
माले विधायक की टिप्पणी पर उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करने वालों को ऐसी भाषा शोभा नहीं देती। डिप्टी सीएम ने भावुक होते हुए अपना उदाहरण दिया और कहा कि जब वह मुजफ्फरपुर में टेक्निकल कॉलेज में पढ़ते थे, तब भूमिहार ब्राह्मण समाज से होने के कारण उनकी भी रैगिंग हुई थी और उन्हें हॉस्टल छोड़ने पर मजबूर किया गया था।

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि बाबा साहब अंबेडकर के 'जाति विहीन समाज' के सपने को तार-तार किया जा रहा है और ऐसे लोग समाज के साथ गद्दारी कर रहे हैं।

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग
इस बहस में राजद विधायक आलोक मेहता भी कूद पड़े। उन्होंने विजय सिन्हा के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि "चोर की दाढ़ी में तिनका" वाली स्थिति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधायक ने किसी जाति विशेष पर नहीं बल्कि एक खास 'मानसिकता' पर बात की है।

वहीं भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इन लोगों को ब्राह्मणों से तकलीफ है। उन्होंने पौराणिक उदाहरण देते हुए कहा कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने गरीब ब्राह्मण सुदामा के पैर धोए थे, ऐसे में ब्राह्मण समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

स्पीकर ने कार्यवाही से शब्द हटाया
सदन में बढ़ते शोर-शराबे और पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी तकरार को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने मोर्चा संभाला। उन्होंने दोनों पक्षों को शांत रहने का निर्देश दिया और विवाद की जड़ रहे 'ब्राह्मणवाद' शब्द पर कड़ा एक्शन लिया।

स्पीकर ने आदेश दिया कि सदन की कार्यवाही (प्रोसीडिंग) से 'ब्राह्मणवाद' शब्द को पूरी तरह हटा दिया जाए ताकि भविष्य में इसका रिकॉर्ड न रहे। इस फैसले के बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ सकी, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस मुद्दे पर चर्चा अभी भी जारी है।