मुंबई. मैदान पर अपने प्रदर्शन के लिए पहचान रखने वाले हार्दिक पंड्या ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह सिर्फ क्रिकेटर ही नहीं, बल्कि बड़े दिल वाले इंसान भी हैं। टी20 वर्ल्ड कप जीत के बाद हार्दिक ने वानखेड़े स्टेडियम के ग्राउंड्समैन के लिए किया गया अपना वादा निभाया और उन्हें सम्मानित करते हुए तोहफे और आर्थिक मदद दी।
दरअसल, मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पांड्या ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 से पहले वानखेड़े स्टेडियम में लंबे समय तक अभ्यास किया था। उनकी प्रैक्टिस अक्सर देर रात तक चलती थी। इस दौरान स्टेडियम के ग्राउंड्समैन ने उन्हें हर संभव सुविधा दी, ताकि उनकी तैयारी बिना किसी रुकावट के चल सके। उसी समय हार्दिक ने उनसे वादा किया था कि वह उनकी मेहनत का सम्मान जरूर करेंगे।
हार्दिक ने वानखेड़े के ग्राउंड्समैन को दिया गिफ्ट
हार्दिक ने गुरुवार को यह वादा पूरा किया। उन्होंने वानखेड़े स्टेडियम पहुंचकर ग्राउंड स्टाफ को सम्मानित किया और उन्हें गिफ्ट्स के साथ पैसा भी दिया। यह कदम उनके उस जुड़ाव को दिखाता है, जो वह मैदान के पीछे काम करने वाले लोगों के साथ रखते हैं।
टी20 विश्व कप की तैयारी में की थी मदद
हार्दिक और टीम इंडिया की मेहनत रंग भी लाई थी। भारत ने घऱ में ही अपने टी20 विश्व कप टाइटल का बचाव किया था। फाइनल में भारत ने न्यूजीलैंड को 96 रन से हराया था। इस पूरे टूर्नामेंट में हार्दिक ने बल्ले और गेंद दोनों से अहम योगदान दिया था।
हार्दिक 2 टी20 विश्व कप जीतने वाले खिलाड़ी
इस जीत के साथ हार्दिक पंड्या दो बार टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाले खिलाड़ियों की सूची में शामिल हो गए। वह 2024 में भी खिताबी टीम का हिस्सा थे। हालांकि, इस बार उनकी मैदान के बाहर की यह पहल ज्यादा चर्चा में रही, जिसने लोगों का दिल जीत लिया।
हार्दिक साथी खिलाड़ियों की भी करते हैं मदद
हार्दिक का यह अंदाज नया नहीं है। वह अक्सर अपने साथियों, फैंस और क्रिकेट से जुड़े लोगों की मदद करते नजर आते हैं। भारतीय विकेटकीपर-बल्लेबाज जितेश शर्मा ने भी एक पॉडकास्ट में बताया था कि जब उन्हें वर्ल्ड कप टीम में जगह नहीं मिली थी, तब सबसे पहले हार्दिक ने ही उन्हें मैसेज किया था और हिम्मत दी थी।
जितेश ने यह भी कहा था कि हार्दिक बेहद मददगार इंसान हैं और कई बार बिना कहे ही बच्चों को बैट गिफ्ट कर देते हैं। उन्होंने खुद भी हार्दिक से एक बैट मिलने की बात साझा की।
हार्दिक पांड्या के लिए यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि उन लोगों के प्रति सम्मान जताने का तरीका था, जिन्होंने उनके कठिन समय में साथ दिया। वानखेड़े के ग्राउंड्समैन, जो अक्सर सुर्खियों से दूर रहते हैं, इस खास मौके पर खुद को सम्मानित महसूस कर रहे थे।









