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डॉ. जयंतीलाल भंडारी का लेख : खत्म क्यों नहीं हो पा रहा भ्रष्टाचार

हाल ही में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के द्वारा ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर-एशिया सर्वे 2020 प्रकाशित किया गया है। इसमें भारत को एशिया का सबसे ज्यादा रिश्वतखोरी वाला देश बताया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक एशिया के दूसरे देशों में कंबोडिया दूसरे और इंडोनेशिया तीसरे नंबर पर है। एशिया के सबसे ईमानदार देशों में मालदीव और जापान संयुक्त रूप से पहले नंबर पर हैं। भारत में 39 फीसद लोगों ने कहा कि सरकारी सुविधाओं के लिए रिश्वत देनी पड़ी। देश में पुलिस व अफसर रिश्वत लेने में सबसे आगे हैं। भ्रष्टाचार को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए गए, लेकिन भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के प्रयासों के अनुरूप परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं।

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प्रतीकात्मक फोटो

डॉ. जयंतीलाल भंडारी

यकीनन देश में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी को नियंत्रित करने के लिए एक के बाद एक कई कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी पर नियंत्रण के प्रयासों के अनुरूप परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। हाल ही में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के द्वारा ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर-एशिया सर्वे 2020 प्रकाशित किया गया है। इसमें भारत को एशिया का सबसे ज्यादा रिश्वतखोरी वाला देश बताया गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक एशिया के दूसरे देशों में कंबोडिया दूसरे और इंडोनेशिया तीसरे नंबर पर है। एशिया के सबसे ईमानदार देशों में मालदीव और जापान संयुक्त रूप से पहले नंबर पर हैं।

गौरतलब है कि ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर एशिया का यह सर्वेक्षण इस वर्ष 2020 में जुलाई से सितंबर के बीच एशिया के 17 देशों में 20,000 लोगों के बीच छह सरकारी सेवाओं- पुलिस, अदालत, सरकारी अस्पताल, पहचान पत्र लेने की प्रक्रिया और बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए रिश्वत दिए जाने संबंधी प्रश्नों के उत्तरों पर आधारित है। भारत में 39 फीसद लोगों ने कहा कि उन्हें सरकारी सुविधाओं की इस्तेमाल करने के लिए रिश्वत देनी पड़ी। देश में पुलिस और स्थानीय अफसर रिश्वत लेने के मामले में सबसे आगे हैं। देश में व्याप्त रिश्वतखोरी को लेकर 47 फीसद भारतीयों की आम राय है कि बीते एक वर्ष में रिश्वतखोरी बढ़ी है।

नि:संदेह भारत में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी की स्थिति चिंताजनक है। दुनिया के कई ख्याति प्राप्त संगठनों के द्वारा प्रस्तुत की जा रही वैश्विक रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण से ही भारत आर्थिक-सामाजिक विकास की गति तेज कर सकता है। विगत 23 जनवरी, 2020 को विश्व आर्थिक मंच पर दावोस में ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के द्वारा जारी वैश्विक भ्रष्टाचार सूचकांक 2019 में दुनिया के 180 देशों की भ्रष्टाचार के मामले में प्रकाशित की गई सूची में भारत को 80वें स्थान पर रखा गया था। भारत वैश्विक भ्रष्टाचार सूचकांक 2018 की सूची में 78वें स्थान पर था। ऐसे में भारत भ्रष्ट देशों की सूची में दो स्थान फिसल गया है। निश्चित रूप से सरकार भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी पर नियंत्रण के लिए रणनीतिक कदमों के साथ आगे बढ़ी है। कई ऐसी सरकारी सेवाएं है जहां सरकार ने भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी पर बड़ा नियंत्रण किया है। देश में पासपोर्ट और रेल टिकट जैसी विभिन्न आम आदमी से जुड़ी सुविधाओं में डिजिटलीकरण और कम्प्यूटरीकरण किए जाने से रिश्वत और भ्रष्टाचार में कमी आई है। दुनिया की ख्यातिप्राप्त शोध अध्ययन संस्था टॉलबर्ग अध्ययन के अनुसार 97 फीसदी भारतीय मानते हैं कि आधार कार्ड और डिजिटल भुगतान की वजह से सरकारी राशन, सरकार के द्वारा किसानों को दी जाने वाली सहायता राशि और मनरेगा जैसे भुगतान काफी हद तक भ्रष्टाचार शून्य हो गए हैं।

कोविड-19 के बीच देखा गया है कि सरकार ने गरीबों को दी जाने वाली धनराशि और किसानों को दिया जाने वाला भुगतान 100 फीसद सीधे उनके खाते में पहुंचाकर भ्रष्टाोचार पर बड़ा वार किया है। इसी प्रकार रिश्वतखोरी और भ्रष्टााचार को रोकने के लिए डिजिटल पेंमेंट को बढ़ावा दिया गया है। इसके तहत कई सरकारी सेवाओं के भुगतान को ऑनलाइन किया गया है। भ्रष्टाचार रोकने के लिए विजिलेंस सिस्टम को दुरुस्त किया गया है। कालाधन और बेनामी संपत्ति पर कठोर कानून बनाए हैं, भ्रष्टाचार-निरोधक कानून को सख्त बनाया गया है। चूंकि देश में भ्रष्टाचार का बड़ा कारण सरकार के कई विभागों में ऐसे अधिकारी और कर्मचारी बड़ी संख्या में हैं, जो अधिकारों का गलत इस्तेमाल करते हैं। इस परिप्रेक्ष्य में सरकार ने भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों में संलिप्त अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाने का अभियान चलाया है।

यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि देश में नौकरशाही को रिश्वत और भ्रष्टाचार से बचाने के लिए नौकरशाही की जवाबदेही हेतु केंद्र सरकार ठोस कदमों के साथ आगे बढ़ी है। आईएएस अधिकारियों को उनकी अचल संपत्ति घोषित कराने की डगर पर आगे बढ़ी है। जिन आईएएस अधिकारियों ने अचल संपत्ति संबंधी जानकारी नहीं दी है, उनके विरुद्ध केंद्र सरकार अनुशासनात्मक कार्रवाई की डगर पर आगे बढ़ी है। सरकार ने देश में नौकरशाही में सुधार के लिए विभिन्न क्षेत्रों की पेशेवर प्रतिभाओं को सरकारी तंत्र में लेटरल इंट्री से प्रशासन से जुड़ने और सहभागी बनाने के लिए कदम आगे बढ़ाए हैं। देश में आयकर सुधारों के द्वारा भी भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी पर नियंत्रण करने का प्रयास किया गया है। 25 सितंबर, 2020 से पूरे देशभर में करदाताओं के लिए पहचान रहित अपील व्यवस्था लागू हो गई है। इसके पहले आयकर विभाग करदाता चार्टर और पहचान रहित समीक्षा जैसे बड़े आयकर सुधार को लागू कर चुका है।

आयकर अपील में अपील का ई-आवंटन, ई नोटिस, ई-सत्यापन, ई-पूछताछ, ई-सुनवाई और फिर आदेश का ई-संचार सभी कुछ वर्चुअल और ऑनलाइन होने शुरू हो गए हैं। इससे सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब अपीलकर्ता और आयकर विभाग के बीच प्रत्यक्ष आमने-सामने की जरूरत नहीं है। ऐसे में आयकर मामलों में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार में कमी आ रही है। निसंदेह रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार केवल कुछ रुपयों की ही बात नहीं होती है, इसका सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और ईमानदार व्यक्ति उठाता है। रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार से देश के विकास को ठेस पहुंचती है। इनसे सामाजिक संतुलन तहस-नहस होता है। देश की व्यवस्था पर जो भरोसा होना चाहिए, रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार उस भरोसे पर हमला करते हैं। इसमें कोई दो मत नहीं कि सरकार ने अब तक रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं, किन्तु उस अनुपात में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के नियंत्रण में सफलता कम मिल पाई है।

ऐसे में अभी रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए मीलों चलना जरूरी है। देश के करोड़ों लोगों की खुशहाली, कोविड-19 के बीच देश अर्थव्यवस्था को गतिशील करने तथा विकास के ऊँचे सपने को साकार करने की डगर पर रिश्वतखोरी ओर भ्रष्टाचार की चुनौतियों को कम करने हेतु अधिक कारगर और ठोस प्रयासों की जरूरत है। निश्चित रूप से अब रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए सरकार के द्वारा नौकरशाही में सुधार, भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों के क्रियान्वयन में कठोरता, न्यायालय में त्वरित निपटारे, प्रशासनिक मामलों में पारदर्शिता, समाज में नैतिक मूल्यों के विकास सहित भ्रष्टाचार दूर करने के विभिन्न ठोस उपायों की डगर पर आगे बढ़ा जाना होगा। हम उम्मीद करें कि सरकार देश की आर्थिक-सामाजिक खुशहाली और देश के विकास के मद्देनजर ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ग्लोबल करप्शन बैरोमीटर -एशिया 2020 को ध्यान मे रखते हुए भारत में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के चिंताजनक परिदृश्य को बदलने के लिए और अधिक कारगर रणनीतिक प्रयास करेगी। (ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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