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आतंक रूपी महादैत्य को परास्त करना होगा

आतंक रूपी महादैत्य बीते तीन-चार दशक से भारत सहित विश्व के अनेक देशों के लिए भारी सिरदर्द बना हुआ है।

आतंक रूपी महादैत्य को परास्त करना होगा
दो दिन पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत के लिए इस बार का वियदशमी पर्व कुछ खास है। जाहिर है, उनका इशारा पीओके में की गई सजिर्कल स्ट्राइक के बाद विश्व भर में पाकिस्तान के अलग-थलग होने और भारत के शक्तिशाली होकर उभरने की ओर ही था। देश में विजयदशमी व दशहरा पर्व का वैसे भी विशेष सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। बुराई और असत्य के प्रतीक रावण पर भगवान राम की विजय को सहस्रों वर्षों से मनाया जा रहा है। देखें तो आतंक रूपी महादैत्य बीते तीन-चार दशक से भारत सहित विश्व के अनेक देशों के लिए भारी सिरदर्द बना हुआ है।
सभी अवगत हैं कि पाकिस्तान और कुछ दूसरे देश आतंकवाद को अघोषित सरकारी नीति के तौर पर अपनाते हुए पालते-पोसते रहे हैं। उसका उपयोग दुरुपयोग उन देशों के खिलाफ करते रहे हैं, जिन्हें वे ब्लैकमेल करना चाहते हैं। अथवा उनके विकास का रास्ता अवरूद्ध करना चाहते हैं। विश्व की महाशक्ति माने जाने वाला अमेरिका हो या साधन संपन्न विकसित यूरोपीय देश अथवा एशिया और दूसरे महाद्वीपों के भारत जैसे विकासशील देश। सब इसके शिकार बन चुके हैं।
चीन जैसे पाकिस्तान के रणनीतिक, सामरिक और आर्थिक मित्र देश को छोड़ दें तो रावण रूपी आतंक से हर कोई हमेशा के लिए छुटकारा पाना चाहता है। चीन भी अनेक अवसरों पर इसके खिलाफ जंग की बात कर चुका है, परन्तु जब भारत के खिलाफ जेहाद छेड़ने वाले कुछ नामी-गिरामी आतंकी सरगनाओं की गिरफ्तारी अथवा उनके संगठनों पर पाबंदी लगाने की बात आती है, तब वह सुरक्षा परिषद में पाक के हितों की सुरक्षा के नाम पर गलत जगह खड़ा नजर आने लगता है। भारत का चीन के साथ भले ही सौ अरब डॉलर से अधिक का व्यापारिक रिश्ता है।
परन्तु एनएसजी की सदस्यता का सवाल हो या मसूद अजहर जैसे खूंखार आतंकी सरगना पर मुश्कें कसने की मुहिम, चीन इन सबमें अड़ंगेबाजी करता आ रहा है। जाहिर है, पाक की परोक्ष-प्रत्यक्ष मदद के चक्कर में चीन खुद भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेनकाब हो रहा है। पाकिस्तान में बैठे आतंकी सरगना, वहां की सेना और उग्रवादी जमातें अब तक यही मानकर हमारे विभिन्न शहरों को लहूलुहान करते आ रहे थे कि उदारवादी समझा जाने वाला भारत ऐसी कोई कार्रवाई नहीं करेगा, जिससे उसकी सुरक्षा परिषद की सदस्यता पर आंच आए।
लेकिन पठानकोट और उरी हमलों के बाद भारत सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए तय कर लिया कि अब इस कुटिल व दुष्ट पड़ोसी को सबक सिखाए बगैर काम नहीं चलेगा। सजिर्कल स्ट्राइक के बाद पाक पूरी तरह बेकनाब ही नहीं हुआ, बल्कि पूरी दुनिया में अलग-थलग भी पड़ गया है। अपनी सुरक्षा में भारत की तरफ से किए गए इस अहम आपरेशन की हर देश ने हिमायत की है। यहां तक कि चीन भी इसका विरोध नहीं कर सका। जाहिर है, आतंक नाम के इस रावण को पालने वाले पाकिस्तान में भी अब एक बड़ा तबका सरकार और सेना की आतंकवादियों को पालने की नीति का खुला विरोध करता हुआ नजर आ रहा है।
पहली बार सेना बैकफुट पर दिखाई दे रही है। उसे इसका अहसास है कि कम से कम इस मुद्दे पर पूरी दुनिया में उसे कहीं से सर्मथन मिलने वाला नहीं है। एक-एक कर उसके सहयोगी देशों ने भी पाक से आंखें फेर ली हैं। भारत ने साफ कर दिया है कि अब बहुत हो चुका। अगर सीमा पार से उकसावे की कोई भी हरकत हुई तो इसी तरह जवाब दिया जाएगा। कुछ पार्टियों के नेताओं की बयानबाजी को छोड़ दें तो इस मामले को लेकर पूरा देश एकजुट होकर सरकार और सेना के साथ मजबूती से खड़ा दिखाई दे रहा है। यह शुभ संकेत है।
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