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व्यंग्य : पांच सौ जीबी के बकवासी

नई पीढ़ी तमाम चीजों को नए संदर्भों में समझती है, डिजिटल जेनरेशन है।

व्यंग्य : पांच सौ जीबी के बकवासी
आलोक पुराणिक
नई पीढ़ी तमाम चीजों को नए संदर्भों में समझती है, डिजिटल जेनरेशन है। एमबी, जीबी की भाषा नई जेनरेशन को खूब समझ में आती है। कलमाड़ी छोटे भ्रष्टाचारी थे, ए के राजा वड्डे भ्रष्टाचारी थे, ये बात समझाने के लिए नई पीढ़ी को यह बताना ज्यादा बेहतर होगा कि कलमाड़ी 5 जीबी के करप्ट थे और ए के राजा 500 जीबी के करप्ट थे। बोफोर्स टुन्नू सा आधा जीबी का घपला था, टेलीकॉम घोटाला 800 जीबी का था। इस तरह से बात एक झटके में समझ में आती है।
फर्क साफ समझ में आता है। यही तो डिजिटल-समझदारी है। मेगा-बाइट यानी एमबी भी तकनीकी टर्म है। तमाम पार्टियों के प्रवक्ता-नेता जो बकर-चकर टीवी चैनलों से बोलते हैं-उसे बाइट कहते हैं। नेताओं को मेगाबाइट के हिसाब से तोला जाएगा। मेगा यानी बड़ी, बाइट यानी बकर-चकर, बहुत बकर-चकर करनेवालों की जीबी ज्यादा बनेगी। संबित पात्रा सौ एमबी के नेता हैं।
आम आदमी पार्टी के दिलीप पांडे दो सौ एमबी के नेता हैं। कांग्रेस के अभिषेक मनु सिंघवी मुश्किल से दस एमबी के नेता हैं। लेफ्ट के नेताओं में तो अब कोई जीबी बची ही नहीं। विकट बकवासी रिश्तेदारों को भी एमबी के हिसाब से नापा जा सकता है। रतलाम वाली बुआजी 1000 एमबी की हैं, पर उनके पतिदेव तो जीरो एमबी के हैं, मुंह से बोल ही ना फूटता। और ये रोहतकवाले चाचाजी, हैं तो 5000 एमबी के पर, कायदे का आऊटपुट एक एमबी का भी निकलता।
पतियों को पत्नियां डांटेंगी-कितनी बार कहा तुम्हें उस काम के लिए, पर तुम्हें याद ही ना रहता, तुम्हारे दिमाग की मेमोरी एक जीबी हो गई है क्या। पति पलट-जवाब दे सकता है-शादी के वक्त 200 जीबी की थी, तुमने इसमें अपनी मांगों के इतने आइटम भर दिए कि दिमाग की फाइल करप्ट हो गई, अब सिर्फ एक जीबी बची है।
वह भी घिस कर निपट ली है। कुछ दिनों बाद तुम्हें शादी का अलबम दिखाकर बताना पड़ेगा कि मैं ही तुम्हारा पति हूं। सामाजिक संबंधों की शब्दावली बदलेगी, दहेज के लेन-देन में पूछा जाएगा कितने जीबी दे रहे हो भाई। दहेज-लोभी महासभा और दहेज-देयक मंडल आपसी समझबूझ के आधार पर शब्दावली तय कर लें। एक जीबी को एक करोड़ मान लिया जाए। पांच करोड़ की शादी को कहा जाए, पांच जीबी की शादी रही।
सास-बहुओं की भी तकनीकी व्याख्या होगी। बहुतै खूंखार सास, दिन भर बहू को ताने मारनेवाली सास को 1000 जीबी की सास घोषित किया जाएगा। सिंपल-सुशील सास को सिर्फ दस जीबी की सास कह कर सम्मानित किया जाएगा। बहुत सीधी बहू है, बताओ इस जमाने में सिर्फ सौ जीबी की बहू है, जुबान ना खुलती सास के आगे, किसी निरीह बहू का सम्मान यह कह कर किया जाएगा।
पुरानी पीढ़ी की अभिनेत्री निरुपा राय पूरे 800 जीबी कपड़े पहनती थीं। वहीदा रहमान ने भी अधिकांश करियर में 700 जीबी रखे। राखी सावंत 100 जीबी पर आ गईं। और पूनम पांडे की तो पूछो ही मत, यह तो आधा जीबी मुश्किल से पहनती हैं और उसे भी उतारने के आफर दिए रहती हैं।
पुलिस भी डिजिटल इंडिया में बदल जाएगी। एकदम नए चैन-स्नेचर को 10 जीबी का क्रिमिनल माना जाएगा। डकैत 900 जीबी का माना जाएगा। नेता को अ-नापनीय माना जाएगा, जिसकी नाप-जोख संभव ही ना हो। लेखक तक जीबी में तुलेंगे। रोज लिखनेवाला 100 जीबी का, कभी-कभार लिखनेवाला एक जीबी का मान लिया जाएगा। आलू किलो के हिसाब से तुलते हैं, तो लेखक जीबी के हिसाब से तुलेंगे। 100 जीबी से ऊपर वाले को वरिष्ठ मान लिया जाएगा, चाहे उसकी उम्र बीस वर्ष ही क्यों ना हो।
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