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विधानसभा चुनाव के नतीजे : हिन्दी भाषी राज्यों से सबक लेना जरूरी

विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद मोदी और कांग्रेस सरकार दोनों को इससे सबक लेना चाहिए, क्योंकि राजनीति में आए दिन अप्रत्याशित घटनाएं होती रहती हैं।

विधानसभा चुनाव के नतीजे : हिन्दी भाषी राज्यों से सबक लेना जरूरी

विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद मोदी और कांग्रेस सरकार दोनों को इससे सबक लेना चाहिए, क्योंकि राजनीति में आए दिन अप्रत्याशित घटनाएं होती रहती हैं। विन्सटन चर्चिल ने हिटलर की फौज को हराकर सारे संसार को नाजियों से मुक्त कराया था, परंतु जब चुनाव हुआ तो उसमें उनकी पार्टी बुरी तरह हार गई। ऐसे और भी अनेक उदाहरण हैं, जहां जीतते जीतते सत्तारूढ़ पार्टी चुनाव हार जाती है।

जिन तीन बड़े हिन्दी भाषी राज्यों में चुनाव हुआ और जिसके परिणाम भाजपा के खिलाफ गए वहां कम या अधिक यही बातें देखी जा रही हैं। पीछे मुड़कर देखें तो भाजपा की हार का मुख्य कारण उसके कार्यकर्ताओं का आलस्य था। सभी कार्यकर्ता यह मानकर चल रहे थे कि रमन सिंह जैसे नेता को जो 15 वर्षों से सत्ता में हैं उन्हें कोई हरा ही नहीं सकता है।

मध्य प्रदेश में भी कांटे की टक्कर है और कोई आश्चर्य नहीं कि कांग्रेस भाजपा को हराकर वहां भी सरकार बना ले। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान घोर आत्मविश्वास में थे और उन्हें एक मिनट के लिए भी यह बात समझ में नहीं आ रही थी कि उनकी पार्टी चुनाव हार भी सकती है। वह तो बार-बार यही कहते थे कि ‘एक्जिट पोल' का कोई मतलब नहीं है।

सबसे बड़े ‘सर्वेयर' तो वही हैं। उन्होंने पूरे मध्य प्रदेश में गांव-गांव जाकर हालात का जायजा लिया है और उन्हें घोर आत्मविश्वास है कि उनकी पार्टी अवश्य सत्ता में आ जाएगी, परन्तु उनका आत्मविश्वास ऐन मौके पर उन्हें दगा दे गया और सत्ता उनके हाथ से फिसल गई।

भारत में आम चुनाव में यह देखा गया है कि सभी बड़ी पार्टियां अपने कार्यकर्ताओं को तैनात करती हैं कि वे गांव-गांव घूमकर घरों से मतदाताओं को निकालें और बूथ पर ले जाकर मतदान कराएं,

परंतु इस बार घोर आत्मविश्वास के कारण मतदाताओं के पास कार्यकर्ता यही सोचकर नहीं गए कि उनके नेताओं और उनकी पार्टी को कोई हरा नहीं सकता है। इस संदर्भ में एक पुरानी बौद्ध कहानी याद आती है। पुराने जमाने में भारत में जगह-जगह अकाल पड़ता था और कुएं तथा तालाब सूख जाते थे।

एक बड़े गांव में जब भगवान बुद्ध ठहरे हुए थे तब गांव वालों ने उन्हें कहा कि यहां भीषण अकाल पड़ गया है और पानी का साधन यह बड़ा तालाब ही है जो सूख गया है। कोई उपाय करें कि इस तालाब में फिर से पानी आ जाए। भगवान बुद्ध ने लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि पानी आ जाएगा, परंतु हर किसी को आधी रात में इस तालाब में एक लोटा दूध डालना होगा।

हर किसी ने यही सोचा कि मैं तो आराम से सो जाउं। गांव में सैकड़ों लोग हैं जो तालाब में दूध डाल देंगे। सुबह उठने पर सभी ने देखा कि तालाब पहले की तरह ही सूखा है। वे भगवान बुद्ध के पास गए। भगवान बुद्ध ने पूछा कि सही-सही बताओ कि कितने लोगों ने इस तालाब में दूध डाला था। सभी शर्मिन्दा हो गए। इस पर भगवान बुद्ध ने कहा बिना मेहनत के कुछ नहीं मिलेगा।

तुम तालाब को खोदो फिर बारिश के बाद इसमें पानी अपने आप जमा होने लगेगा, फिर उस पानी को सुरक्षित रखो तभी गांव का कल्याण होगा। गत विधानसभा चुनावों में यही हुआ। सभी आराम से बैठ गए और किसी ने गांव-गांव, घर-घर जाकर मतदाताओं को मतदान केंद्रों पर लाने का प्रयास नहीं किया। दूसरी बात यह हुई कि भाजपा के अंदर ही एक दूसरे के खिलाफ षडयंत्र चल रहा था।

एक नेता दूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास करते रहे कि कुछ ऐसा हो जाए जिससे इससे नेता की साख मिट्टी में मिल जाए। अंत में हुआ भी वही। सभी की साख मिट्टी में मिल गई। यह तो मानना ही होगा कि अधिकतर किसान भाजपा से नाराज हो गए थे। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह ऐलान कर दिया कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आई तो 10 दिनों के अन्दर की किसानों का कर्ज माफ कर दिया जाएगा।

अनुभव से यही देखा गया है कि विभिन्न कारणों से भारत के किसान कर्ज में डूबे रहते हैं और यह कर्ज पुश्त दर पुश्त चलता रहता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने किसानों को कर्ज मुक्त कराने का पूरा प्रयास किया, परंतु उनकी बात आम किसानों तक नहीं पहुंच पाई। अब किसान यह सोच बैठे हैं कि एक महीने के अन्दर उनके सारे कर्ज माफ हो जाएंगे।

यदि ऐसा हुआ तो कांग्रेस की वाहवाही हो जाएगी और भाजपा को बहुत नीचा देखना पड़ेगा। भाजपा में संगठन तो बहुत मजबूत है, परंतु उसके कार्यकर्ता लोगों तक यह संदेह नहीं पहुंचा पाए कि आम जनता के कल्याण के लिए भाजपा सरकार ने क्या-क्या किया है। ज्ञान के अभाव में लोगों ने भाजपा के खिलाफ मतदान कर दिया।

यह संतोष की बात है कि चुनाव परिणाम आने के बाद रमन सिंह ने रेडियो और टेलीविजन पर यह वक्तव्य दिया कि वे स्वयं इस हार की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हैं। पंद्रह वर्ष तक उन्होंने लोगों की सेवा की। अब बैठकर यह विश्लेषण करेंगे कि उनसे और उनकी पार्टी से कहां गलती हुई। फिर उस गलती को सुधारने की कोशिश करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कांग्रेस को उसकी जीत पर बधाई दी और आश्वस्त किया कि भाजपा नई सरकार के साथ पूरा सहयोगी करती रहेगी। मध्य प्रदेश में यद्यपि कांटे की टक्कर है, परंतु लगता ऐसा है कि कांग्रेस वहां भी सरकार बना लेगी। भाजपा एक अनुशासित पार्टी है। उसको नए सिरे से जनकल्याण के लिए प्रयास करना होगा और इस बात का विश्लेषण करना होगा कि विधानसभा चुनाव में उसकी कहां पर चूक हो गई।

राजस्थान के बारे में यह शुरू से ही कहा जा रहा था कि कोई भी पार्टी दोबारा वहां सत्ता में नहीं आती है। इसी धारणा में लोगों ने भाजपा के खिलाफ कांग्रेस को अपने मत दे दिए। आगे इन चुनावों पर बहुत विश्लेषण आएंगे और यह पूरे देश के लोगों के लिए आंखें खोलने वाली बात होगी कि अति आत्मविश्वास के कारण लोगों ने किस तरह किनारे पर ही नाव को डूबो दिया। किसी ने ठीक कहा है, ‘हमें अपनों ने मारा, गैरों में कहां दम था, किश्ती वहीं पर डूबी पानी जहां पर कम था।'

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