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डा. गौरीशंकर राजहंस का लेख : सावधानी से ही होगा बचाव

सब कुछ एक तरह से ठीक ठाक चल रहा था और लग रहा था कि कोरोना अब धीरे धीरे भारत से समाप्त हो जाएगा और जनजीवन पूरी तरह से सामान्य हो जाएगा, परंतु अचानक ही कोरोना का रौद्र रूप पूरे देश में छा गया, खासकर महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में। दिल्ली मंे तो एक दिन में ही 4 हजार नए मरीज आ गए। ऐसे में लोगों को पूरी तरह सावधान रहने की जरूरत है। भीड़-भाड़ से बचने की जरूरत है और जब तक कोई कारगर दवा नहीं मिलती है तब तक हर व्यक्ति को कोरोना का टीका लगवा लेना चाहिए।

Delhi Coronavirus Update: दिल्ली में कोरोना की चौथी लहर ने मचाई तबाही, अब नाइट कर्फ्यू लगाने पर विचार!
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कोरोना 

डा. गौरीशंकर राजहंस

सब कुछ एक तरह से ठीक ठाक चल रहा था और लग रहा था कि कोरोना अब धीरे धीरे भारत से समाप्त हो जाएगा और जनजीवन पूरी तरह से सामान्य हाे जाएगा, परंतु अचानक ही कोरोना का रौद्र रूप पूरे देश में छा गया, खासकर महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में। दिल्ली में तो एक दिन में ही 4 हजार नए मरीज आ गए। दिल्ली सरकार तेजी से लोगों को टीका लगवाने की कोशिश कर रही है, परंतु इतनी बड़ी जनसंख्या में सभी को इतनी जल्दी टीका लगवाना संभव नहीं है। पूरे देश में 25 दिन में प्रतिदिन 20 हजार से बढ़कर कोरोना के रोगी एक लाख प्रतिदिन हो गए हैं और प्रतिदिन नए मामलों में कोई कमी नहीं हो रही है, बल्कि बढ़ते ही जा रहे हैं। सबसे खराब हालत महाराष्ट्र की है, जहां मुंबई जैसे महानगर में एक तरह से सीमित लॉकडाउन लगा दिया गया है।

मुंबई और महाराष्ट्र के कुछ शहरों में शुक्रवार शाम आठ बजे से सोमवार के सुबह 7 बजे तक लॉकडाउन लगा दिया गया है। प्रतिदिन रात का कर्फ्यू लगा दिया जाता है। दिन में सरकार ने घोषणा की है कि दिन के समय धारा 144 लगा दी जाएगी जिससे ज्यादा लोग एकत्रत नहीं हो सकें। शहरों के बाजार बंद कर दिए जाएंगे। केवल बहुत जरूरी सामान की दुकानें ही खोली जाएंगी। माॅल, सिनेमा और रेस्तरां पूरी तरह बंद कर दिए जाएंगे जिससे लोगों की भीड़ इकट्ठी नहीं हो सके। स्कूल और काॅलेज बंद कर दिए जाएंगे। निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को हिदायत दी गई है वे 'वर्क फ्रोम होम' करें। आटो रिक्शा में तीन से ज्यादा यात्री नहीं बैठ सकेंगे और टैक्सी में सवार लोगों की संख्या भी सीमित रहेगी।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने पक्ष और विपक्ष के नेताओं से निवेदन किया है कि यह बहुत बड़ी विपदा है जैसी पहले कभी नहीं आई थी, इसलिए सभी को सहयोग करना चाहिए और पूरी सावधानी बरतनी चाहिए जिससे इस बीमारी का मुकाबला किया जा सके और यह अधिक नहीं फैल पाए। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले जब कोरोना पर नियंत्रण पाया गया था उस समय यह बीमारी केवल शहरों में सीमित थी, परंतु डर है कि धीरे-धीरे यह बीमारी कहीं गांव देहात में फैल जाएगी। तब इस पर नियंत्रण पाना बहुत ही कठिन हो जाएगा।

प्रधानमंत्री ने अधिकारियों के सम्मेलन में कहा कि कोरोना को नियंत्रित करने के लिए पांच सूत्री रणनीति अपनानी होगी, जिसके तहत टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट और टीकाकरण को महत्व दिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने यह भी ऐलान किया कि जिन राज्यों में कोरोना ने विकराल रूप धारण कर लिया है और जहां मृत्यु दर अधिक है वैसे राज्यों पंजाब, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के लिए तत्काल केंद्रीय सहायता दल रवाना करने होंगे और इस महामारी को और अधिक फैलने से रोकने का प्रयास करना होगा।

एम्स, दिल्ली के निदेशक डाक्टर गुलेरिया ने कहा कि लेागों की नासमझी के कारण कोरोना अचानक से फिर बढ़ गया। लोगों ने समझा कि अब तो इस बीमारी का टीका आ गया है, इसलिए इससे अब डरने की आवश्यकता नहीं है। अब तो यह बीमारी धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी, परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ। लोगों ने पूरी तरह लापरवाही बरती और कोरोना संक्रमण काबू से बाहर हो गया। अब तक देश में सात करोड़ से ज्यादा टीके लगाए जा चुके हैं। भारत जैसा देश जहां की जनसंख्या 130 करोड़ है, वहां इतने टीके लगाने से सफलता नहीं मिल पाएगी। एम्स, दिल्ली के निदेशक ने कहा कि अभी भी यदि शत-प्रतिशत लोग मास्क पहनें और दो गज की दूरी बरकरार रखें तो इस बीमारी पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकेगा। आये दिन टीवी चैनलों पर यह दिखाया जा रहा है कि देश के विभिन्न क्षेत्रों में लोग बेतहाशा मास्क पहनने और आपस में दूरी रखने से बच रहे हैं जिसके कारण यह बीमारी तेजी से फैल रही है।

सरकार ने यह पता लगाने के लिए पूरे प्रयास किए कि आखिर यह बीमारी फैली कैसे? संसार के अनेक देशों ने चीन जाकर यह पता लगाने की भी कोशिश की कि चमगादड़ों के कारण तो यह बीमारी नहीं फैली, परंतु गहन अध्ययन और खोजबीन के बाद भी वे इस नतीजे पर नहीं पहुंचे कि यह बीमारी चमगादड़ों के कारण फैली है। सारे संसार के देशों में प्रमुख रूप से यह कहा जा रहा है कि जिस तरह से यह बीमारी दिन दुनी और रात चौगुनी फैल रही है उससे निकट भविष्य में छूटकारा पाने की उम्मीद बहुत कम है, इसलिए लोगों को पूरी सावधान रखकर इस बीमारी से दूर रहने का प्रयास करना होगा। भारत सरकार अत्यन्त ही चिंतित है कि जिस तरह से यह बीमारी तेजी से फैल रही है उससे कैसे छुटकारा पाया जा सकेगा। अभी तक इस बीमारी की कोई कारगर दवा नहीं आई है। सबसे अधिक आश्चर्य की बात है, फिल्मी कलाकार दर्जनों की संख्या में संक्रमित होकर आईसोलेशन में भर्ती हैंै। कभी किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि फिल्मी कलाकार भी इतनी बड़ी संख्या में इस बीमारी से ग्रसित हो जाएंगे।

आज पूरा देश यह सोचकर चिंतित है कि आखिर इस बीमारी से कब छुटकारा मिलेगा। अभी तो यही कहा जाता था कि यह बीमारी बच्चों तक नहीं पहुंचेगी, परंतु यूरोप के कई देशों में सघन जांच पड़ताल के बाद यह साबित हो गया कि यह बीमारी किसी से परहेज नहीं करती है। अतः लोगों के लिए अपने बच्चों को इस बीमारी से बचाए रखना अत्यन्त ही कठिन है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि यदि कोई घर में काम करने आता है तो हम लोगों को तो पता नहीं कि उसे कोरोना बीमारी है और जब उसकी इस बीमारी का पता चलता है तब तक देर हो चुकी होती हैै और ठीक से पता भी नहीं चलता कि किस व्यक्ति से यह बीमारी फैली है।

कुल मिलाकर स्थिति यह है कि इस बीमारी के कारण पूरे देश में हाहाकार मचा हुआ है। ऐसे में लोगों को पूरी तरह सावधान रहने की जरूरत है। भीड़-भाड़ से बचने की जरूरत है और जब तक कोई कारगर दवा नहीं मिलती है तब तक हर व्यक्ति को कोरोना का टीका अवश्य लगवा लेना चाहिए। ऐसे हालात में जरा सी लापरवाही भी बहुत भारी पड़ सकती है। यह मानकर चलना चाहिए कि स्वतंत्र भारत में ऐसी विपदा पहले कभी नहीं आई थी और लोगों की सावधानी और बृहत रूप से टीकाकरण के बाद ही इस विश्वव्यापी महामारी पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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