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डाॅ. एल. एस. यादव का लेख : स्वदेशी रक्षा उपकरणों को बढ़ावा

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए सरकार ने अगस्त 2020 में 101 रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक लगा दी थी। अब भारत में ही इनके निर्माण किए जा रहे हैं। सरकार ने इन रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए 460 से ज्यादा लाइसेंस जारी कर दिए हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार मौजूदा समय में आयुध कारखानों के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि वे अपनी कुल आय का एक चौथाई हिस्सा राजस्व निर्यात से हासिल करें। यह संभव हुआ तो भारत जल्द ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा। रक्षा एवं वैमानिकी में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से अनुसंधान एवं विकास पर जोर देने का निर्णय लिया है।

डाॅ. एल. एस. यादव का लेख :  स्वदेशी रक्षा उपकरणों को बढ़ावा
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डॉ. एल. एस. यादव

डाॅ. एल. एस. यादव

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भारत को सैन्य प्लेटफार्म तथा उपकरणों के विनिर्माण में निवेश के लिए एक आकर्षक स्थल के रूप में पहले ही पेश कर चुके हैं। गत माह भारत स्वीडन रक्षा उद्योग सहयोग विषय पर एक सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए सिंह ने स्वीडन की अग्रणी रक्षा उत्पादन कंपनियों को भारत देश में विनिर्माण के केन्द्र बनाने के लिए आमंत्रित किया था। उन्होंने कहा था कि भारत सरकार ने अनेक ऐसे सुधार किए हैं जो भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए ही नहीं बल्कि वैश्िवक मांगों को भी पूरा करने में रक्षा उद्योग के लिए काफी मददगार साबित होंगे। रक्षा मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में सरकार ने स्वचालित रूप से 74 प्रतिशत तथा सरकार के रास्ते 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को मंजूरी प्रदान कर दी है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रौद्योगिकी केंद्रित एफडीआई नीति के चलते भारतीय उद्योग प्रामाणिक एवं उपयुक्त सैन्य प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में स्वीडन के उद्योगों के साथ सहयोग कर सकेंगे। विदेश के वास्तविक उपकरण निर्माता अपने बल पर ही संस्थान स्थापित कर सकते हैं और इस काम के लिए वे भारतीय कंपनियों के साथ साझेदारी भी कर सकते हैं। इस तरह स्वीडन की कंपनियां भारत की मेक इन इंडिया पहल का फायदा उठा सकती हैं। स्वीडन की कुछ कंपनियां भारत में पहले से मौजूद हैं और वे अच्छा कार्य कर रही हैं। उस आधार पर नई कंपनियां समझ सकती हैं कि भारत रक्षा निर्माण एवं निवेश के लिए एक प्रमुख स्थल है। इस तरह भारत के रक्षा उद्योग और स्वीडन की कंपनियों के बीच रक्षा उपकरण उत्पादन की विशेष संभावनाएं हैं। इसके सफल रहने पर स्वीडन को आपूर्ति भी कर सकता है।

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के लिए सरकार ने अगस्त 2020 में 101 रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक लगा दी थी। अब भारत में ही इनके निर्माण किए जा रहे हैं। सरकार ने इन रक्षा उपकरणों के निर्माण के लिए 460 से ज्यादा लाइसेंस जारी कर दिए हैं। रक्षा मंत्रालय के अनुसार मौजूदा समय में आयुध कारखानों के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि वे अपनी कुल आय का एक चौथाई हिस्सा राजस्व निर्यात से हासिल करें। यह सब संभव हुआ तो भारत जल्द ही रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन जाएगा। रक्षा आयात के लिए रक्षा उपकरणों की पहली नकारात्मक सूची जो अगस्त 2020 में लाई गई थी, उसमें खींचकर ले जाई जाने वाली आर्टिलरी गन, कम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, क्रूज मिसाइलें, अपतटीय गश्ती जहाज, इलेक्ट्राॅनिक युद्ध प्रणाली, अगली पीढ़ी के मिसाइल जहाज, फ्लोटिंग डाक और पनडुब्बी रोधी राॅकेट लाॅन्चर आदि शामिल थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 31 मई 2021 को 108 सैन्य हथियारों एवं रक्षा उपकरणों के आयात पर रोक लगा दी हैं। इन 108 शस्त्र और रक्षा प्रणालियों में अगली पीढ़ी के कारवेट, एयरबोर्न अर्ली वार्निंग सिस्टम, टैंक के इंजन और राडार जैसे सिस्टम व साजो-सामान शामिल हैं। इस सूची में शामिल सभी 108 उपकरणों के आयात पर प्रतिबंध दिसम्बर 2021 से दिसम्बर 2025 तक की अवधि में उत्तरोत्तर प्रभावी रहेगा। भारत सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि वर्ष 2024 के बाद लम्बी दूरी के ग्लाइड बम भी स्वदेशी कंपनियों से ही खरीदे जाएंगे। ऐसे बमों को अपनी सीमा में रहते हुए एयरक्राफ्ट से दुश्मन की सीमा के काफी अन्दर तक के ठिकानों पर छोड़ा जा सकता है, इसलिए इसी साल से फाइटर एयरक्राफ्ट में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर बमों को स्वदेश में ही बनाया जाएगा। पहाड़ों पर लगने वाले लम्बी दूरी तक की टोह लेने वाले राडार भी इसी साल से भारतीय कंपनियों से ही खरीदे जा सकेंगे। आयात न किए जाने वाले उपकरणों की सूची 209 आइटमों की हो गई है।

रक्षा एवं वैमानिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के उद्देश्य से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अनुसंधान एवं विकास पर जोर देने का निर्णय लिया है। इसके लिए उन्होंने अगले पांच वर्षों के लिए रक्षा उत्कृष्टता में नवाचार के लिए रक्षा नवाचार संगठन को पिछले माह 499.8 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता को मंजूरी प्रदान कर दी है। इस धनराशि से रक्षा क्षेत्र में इस नए अन्वेशण के साथ आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि रक्षा उत्कृष्टता में नवाचार व रक्षा नवाचार संगठन का रक्षा और वैमानिकी क्षेत्र में आत्मनिर्भरता एवं स्वदेशीकरण को हासिल करना प्रमुख उद्देश्य है। आगामी पांच वर्षों के लिए दी गई 498.8 करोड़ रुपये की बजटीय सहायता वाली इस योजना का उद्देश्य रक्षा नवाचार संगठन फ्रेमवर्क के साथ लगभग 300 स्टार्ट अप्स, एमएसएमई, व्यक्तिगत नवोन्मेशकों और 20 साझेदार इनक्यूवेटर को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह कदम रक्षा जरूरतों के बारे में भारतीय नवाचार पारितंत्र में जागरूकता बढ़ाने और इसके विपरीत भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान में उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अभिनव समाधान देने की क्षमता के प्रति जागरूकता पैदा करेगा। इससे रक्षा नवाचार संगठन अपनी टीम के साथ नवोन्मेशकों के लिए चैनल बनाने में सक्षम होगा जिससे वे भारतीय रक्षा उत्पादन उद्योग के साथ जुड़ सकें। इस योजना का उद्देश्य भारतीय रक्षा और वैमानिकी क्षेत्र के लिए नई स्वदेशी तथा अभिनव प्रोद्योगिकियों के तेजी से विकास को सरल बनाना है। इसकी सफलता से अल्प समय सीमा में उनकी जरूरतों को पूरा किया जा सकेगा। भारतीय रक्षा और वैमानिकी के लिए सह-निर्माण को प्रोत्साहन के लिए अभिनव स्टार्ट-अप्स से संबंध स्थापित करने के लिए संस्कृति का विकास रक्षा और वैमानिकी क्षेत्र में प्रोद्योगिकी सह-निर्माण और सह-नवाचार की संस्कृति सशक्त बनाना और स्टार्ट-अप्स के बीच नवाचार को बढ़ावा देकर उन्हें इस व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए प्रेरित करना है।

रक्षा उत्पादन विभाग पार्टनर इनक्यूवेटर के रूप में रक्षा उत्कृष्टता में नवाचार नेटवर्क की स्थापना और प्रबन्धन के लिए रक्षा नवाचार संगठन को धन जारी करेगा। यह रक्षा एवं वैमानिकी जरूरतों के बारे में विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी विभाग के पार्टनर इनक्यूवेटर सहित अन्य प्रौद्योगिकी केन्द्रों के साथ संवाद करेगा। यह विभाग संभावित प्रौद्योगिकियों और संस्थाओं को शार्टलिस्ट करने तथा रक्षा एवं वैमानिकी सेटअप पर उनकी उपयोगिता व प्रभाव के संदर्भ में प्रौद्योगिकियों और उत्पादों का मूल्यांकन करेगा। रक्षा क्षेत्र की अन्य गतिविधियों में पायलटों को सक्षम करने के उद्देश्य के लिए निर्धारित नवाचार विधियों का उपयोग करके उन्हें सक्षम बनाना तथा उनका वित्तपोषण करना है। साथ ही प्रमुख नवीन प्रौद्योगिकियों के बारे में सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व के साथ बातचीत करके उपयुक्त सहायता के साथ रक्षा प्रतिष्ठानों में उनको अपनाए जाने को प्रोत्साहित किया जाना शामिल है। प्रौद्योगिकियों को सफलता पूर्वक संचालित करते हुए स्वदेशीकरण को सुगम बनाना है।

(ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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