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नीलम महाजन सिंह का लेख : पंजाब में कांग्रेस के सियासी दुश्मन

नवजोत सिंह सिद्धू को कमान सौंपकर हाईकमान ने पार्टी को पटरी से उतार दिया है। दशकों से पंजाब में कांग्रेस के लिए तन-मन से समर्पित रहे नेता इस फैसले के बाद खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। राजनीतिक रूप से आजकल कांग्रेस 'पार्टी इन क्राइसिस'। पंजाब कांग्रेस में नया नेतृत्व 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद तैयार करना चाहिए था। अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल ने नवजोत सिंह सिद्धू को 'मिसगाइडेड मिसाइल' कहा था। कांग्रेस को यह बात समझनी चाहिए थी। कांग्रेस नेतृत्व को अपने नेताओं को नियंत्रित करना आना चाहिए, नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब कांग्रेस अपनी बची-खुची जमीन भी गंवा देगी।

नीलम महाजन सिंह का लेख : पंजाब में कांग्रेस के सियासी दुश्मन
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पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू में चल रही तनातनी के बीच पंजाब प्रभारी हरीश रावत पर भी साधा जा रहा है निशाना। 

नीलम महाजन सिंह

पंजाब में कांग्रेस की जीती बाजी हार की ओर है। कैप्टन अमरिंदर सिंह व सिद्धू में ताजा खटपट से यही संकेत हैं। सिद्धू के समर्थक जिस तरह लगातार कैप्टन अमेरिंदर सिंह पर अटैक कर रहे हैं, उससे लग रहा है कि पंजाब कांग्रस का तूफान शांत नहीं हुआ है और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और सांसद राहुल गांधी पंजाब कांग्रेस में मचे तूफान को शांत नहीं कर पा रहे हैं। पंजाब में कांग्रेस की बनी बनाई ज़मीन पर नवजोत सिंह सिद्धू को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के फैसले को पूर्ण रूप से कैप्टन अमरिंदर सिंह की प्रतिष्ठा पर प्रहार माना जा रहा है। फिर भी कैप्टन ने बड़ा दिल दिखा कर, नवजोत सिंह सिद्धू के शपथ समारोह में हिस्सा लिया था। 2017 में जब पूरे देश में कांग्रेस का सफाया हो गया था, तब पंजाब में अपने बलबूते पर कांग्रेस की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनाने वाले कैप्टन अमरिंदर सिंह की मुख्य भूमिका है। लेकिन अब कैप्टन अलग राह अपना लें तो कोई बड़ी बात नहीं है। 'पिपलज़ कैप्टन' अपने दम पर बाजी पलटने वाले नेता हैं और भाजपा बहुत करीब से पंजाब कांग्रेस की दंगल राजनीति को देख रही है। पंजाब में 2022 में विधानसभा चुनाव हैं।

कैप्टन ने हाईकमान के फैसले का सम्मान करते हुए सिद्धू को प्रधान बनाने पर सहमति जता दी थी। उनकी मामूली शर्त कि सिद्धू उन पर की गई अभद्र टिप्पणियों के लिए सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें, को भी पूरी नहीं करवाई गई। हाईकमान के अपने प्रति इस बर्ताव को कैप्टन अपमान के रूप में ले सकते हैं। कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धू के साथ जिन नेताओं को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है, वे भी सिद्धू के पक्षधर हैं। कुलजीत नागरा, पवन गोयल, सुखविंदर सिंह डैनी और संगत सिंह, सिद्धू खेमे के हैं। इस तरह पंजाब कांग्रेस में कैप्टन और पुराने कांग्रेसियों का स्थान खत्म सा हो गया है। कैप्टन समर्थक विधायकों का मानना है कि पंजाब में कांग्रेस का एकमात्र चेहरा कैप्टन अमरिंदर ही हैं व उनके नेतृत्व में ही कांग्रेस अगले चुनाव में पूरे विश्वास के साथ उतर कर जीत हासिल कर सकती है। 'सिद्धू प्रकरण' के कारण पंजाब में कांग्रेस की छवि खराब हुई है।

नवजोत सिंह सिद्धू को कमान सौंपकर हाईकमान ने पार्टी को पटरी से उतार दिया है। दशकों से पंजाब में कांग्रेस के लिए तन-मन से समर्पित रहे नेता इस फैसले के बाद खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। राजनीतिक रूप से आजकल कांग्रेस 'पार्टी इन क्राइसिस'। पंजाब ही एक ऐसा राज्य है जहां कांग्रेस मज़बूत है, वह भी कैप्टन अमरिंदर सिंह के सियासी बूते पर। ऐसा कोई भी उदाहरण नहीं है, जब कांग्रेस के राजनैतिक संकट में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पी.वी. नरसिम्हा राव, सोनिया गांधी, डा. मनमोहन सिंह आदि को पूर्ण सहयोग न दिया हो। पार्टी के प्रति वफादारी का यह सिला तो नहीं होना चाहिए था। किसान आंदोलन में जिस प्रकार कैप्टन ने सूझबूझ से पंजाब में कांग्रेस की सियासी ज़मीन मजबूत की है, उसमें कांग्रेस को लाभ है। अभी प्रताप सिंह बाजवा, सुनील जाखड़, मनप्रीत बादल राणा गुरमीत सिंह, ब्रह्म मोहिंद्रा, ओम प्रकाश सोनी, चरण जीत सिंह चन्नी समेत अनेक दिग्गज वरिष्ठ कांग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ हैं। पंजाब कांग्रेस में नया नेतृत्व 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद तैयार करना चाहिए था। अकाली नेता सुखबीर सिंह बादल ने नवजोत सिंह सिद्धू को 'मिसगाइडेड मिसाइल' कहा था। कांग्रेस को यह बात समझनी चाहिए थी। 2017 में ही तो सिद्धू ने कांग्रेस का हाथ पकड़ा है व चार साल में उनको पार्टी अध्यक्ष बना देना पुराने नेता को नहीं पच रहा होगा। पंजाब कांग्रेस के पांच अध्यक्षों में नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार, मालविंदर माली ने अपने ही मुख्यमंत्री पर तंज कसा और कहा है कि 'पंजाब के अंदर अली बाबा और 40 चोरों का बोलबाला है'। माली ने कहा कि 'विजय इंदर सिंगला, पी.डब्ल्यू.डी. डिपार्टमेंट में बड़े-बड़े घोटाले कर रहे हैं'व पूर्व सांसद मनीष तिवारी को 'भगोड़ा' करार दिया। माली ने दावा किया कि अब पंजाब में सबकुछ बदलेगा। ऐसी बयानबाजी कांग्रेस हित में नहीं है।

मलविंदर माली को अपने बयानों के लिए कांग्रेस से त्यागपत्र देना पड़ा। सिद्धू गुट पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह के खिलाफ बगावती रुख अपनाने के एक दिन बाद, चार कैबिनेट मंत्री- तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, सुखजिंदर सिंह रंधावा और चरणजीत सिंह चन्नी देहरादून में कांग्रेस महासचिव व पंजाब के प्रभारी हरीश रावत से मिले। ये मंत्री सीएम अमरिंदर सिंह के विरोधी माने जाते हैं। इनके साथ करीब 24 विधायकों ने सीएम अमरिंदर को हटाने की मांग करते हुए कहा कि वादे पूरे न करने को लेकर उनका 'मुख्यमंत्री पर से भरोसा उठ गया है'। उन्होंने 2015 में एक धार्मिक ग्रंथ की बेअदबी किए जाने के मामले में न्याय में देरी और ड्रग्स एवं मादक पदार्थ गिरोहों में शामिल 'बड़े लोगों' की गिरफ्तारी जैसे चुनावी वादे पूरे न करने को लेकर मुख्यमंत्री की क्षमता पर सवाल उठाए हैं। ये नेता सोनिया गांधी से भी मिलेंगे। कश्मीर और पाकिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विवादास्पद टिप्पणियां करने के लिए पंजाब कांग्रेस प्रमुख नवजोत सिंह सिद्धू के दो सलाहकारों की कड़ी आलोचना के बीच यह बैठक हुई है। मुख्यमंत्री बदलने की मांग ने पंजाब कांग्रेस में एक नया संकट पैदा कर दिया है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि सिद्धू की नियुक्ति के साथ कांग्रेस की प्रदेश इकाई में असंतोष को दबाने के पार्टी के हालिया प्रयास विफल रहे हैं। हरीश रावत भी इसमें असफल साबित हुए हैं।

असंतुष्ट नेताओं के एक समूह का नेतृत्व कर रहे, प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि वे कांग्रेस अध्यक्षा से मुलाकात का समय मांगेंगे व उन्हें स्थिति से अवगत कराएंगे। उन्होंने कहा कि 'कठोर' कदम उठाने की जरूरत है और अगर मुख्यमंत्री बदलने की आवश्यकता है तो यह भी किया जाना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि क्या मुख्यमंत्री को हटाने की कोशिश की जा रही है, तो बाजवा ने कहा कि यह कोशिश नहीं है बल्कि जनता की मांग है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में एक धारणा बन गयी है कि कैप्टन और शिरोमणि अकाली दल की एक-दूसरे के साथ 'मिलीभगत' है। निष्कर्षार्थ यह कहना उचित होगा कि पंजाब कांग्रेस में विश्वासघातियों के कारण कांग्रेस को राजनैतिक क्षति पहुंचेगी। इतनी गुटबाज़ी क्या भाजपा में बर्दाश्त होती? क्या कारण है कि बार-बार पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू कांग्रेस दिग्गज कांग्रेसी सीएम अमरिंदर सिंह को हटाने का अभियान चलाते हैं? क्या कांग्रेस के दुश्मन कांग्रेसी ही हैं। क्या मज़बूरी है कि अकाली दल से निष्कासित, सोनिया गांधी और डा. मनमोहन सिंह को अपशब्द कहने वाले नवजोत सिंह सिद्ध आज कांग्रेस हाईकमान के आंख के तारे हैं। पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के बिना 'कांग्रेस मुक्त' पंजाब की संभावना प्रबल है। कांग्रेस नेतृत्व को अपने नेताओं को नियंत्रित करना आना चाहिए, नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब कांग्रेस अपनी बची-खुची जमीन भी गंवा देगी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं, ये उनके अपने विचार हैं।)

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