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कश्मीरियों को भड़काने में सफल नहीं होगा पाक

पाकिस्तान आतंकवाद और कश्मीर मुद्दा को जिंदा रखना चाहता है।

कश्मीरियों को भड़काने में सफल नहीं होगा पाक

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के एलओसी दौरे की टाइमिंग पाक के नीतिगत संकट की पोल खोलती है। लग रहा है कि भारत से दुश्मनी निभाने को लेकर पाक फौज नवाज सरकार को स्पष्ट संकेत देना चाहती है।

पाक जनरल के एलओसी पर जाने के समय को देखें तो यह साफ हो रहा है कि कजाखिस्तान की राजधानी अस्ताना में पाक पीएम नवाज शरीफ की शराफत बाजवा को पसंद नहीं आई है।

अस्ताना में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन सम्मेलन के दौरान जहां भारत ने इस ग्लोबल मंच का इस्तेमाल करते हुए बिना नाम लिए पाक को बेनकाब किया, वहीं पाक पीएम नवाज शरीफ चीन के दबाव में दिखे।

चूंकि पीएम मोदी के बाद उन्हें बोलने का मौका मिला था, तो वे भारत को खरी-खोटी सुना सकते थे, लेकिन जब से भारत ने चीन के ओबीओआर सम्मेलन का बहिष्कार किया है,

तब से चीन को लग रहा है कि भारत की नाराजगी के रहते वह न ही पाक में अपना सीपेक प्रोजेक्ट आसानी से पूरा कर सकते हैं और न ही उसका ओबीओआर (वन बेल्ट वन रोड) प्रोजेक्ट सिरे चढ़ सकता है।

अस्ताना में चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान जिस तरह से मोदी ने कूटनीतिक बाजीगरी दिखाते हुए यह कहा कि सीमा पर तनाव के बावजूद चीन व भारत सीमा पर 40 साल से एक भी गोली नहीं चली है, ऐसे में चीन नहीं चाहता था कि अस्ताना सम्मेलन भारत व पाक के कश्मीर विवाद का अखाड़ा बने।

इसलिए उन्होंने पाक को सख्त हिदायत दी की नवाज अपने संबोधन के दौरान भारत पर किसी तरह का अटैक नहीं करें। ऐसा ही हुआ। लेकिन नवाज की किरकिरी उस समय हो गई, जब संबोधन के दौरान उनके कान में पाक फौज के अफसर कुछ कहते दिखे।

शायद वे एसओसी पर संघर्ष विराम तोड़ने का मुद्दा उठाने के लिए कह रहे हों। बात जो भी हो, इतना साफ है कि पाक सेना पाकिस्तान की नवाज सरकार से खुद को ऊपर साबित करने की कोशिश कर रही है।

इसलिए जब देखा कि नवाज ने एलओसी पर सीजफायर को लेकर भारत को नहीं घेरा तो वे खुद एलओसी का दौरा करने आ पहुंचे और वहां वे पाक रेंजरों के सामने कश्मीर को लेकर जहर उगल गए।

पाक सेना इसलिए भी बौखलाई हुई है कि उसका कश्मीर में चिरपरिचित आतंकी घुसपैठ कराने का तरीका कामयाब नहीं हो पा रहा है। भारत लगातार पाक के घुसपैठिये का मार गिरा रहा है।

ऐसे में पाक जनरल बाजवा ने एलओसी पर आकर कश्मीर को भड़काते रहेंगे, कह कर जहां अपने जवानों को मनोबल बढ़ाने की कोशिश की हो, वहीं नवाज सरकार को संदेश दिया कि कश्मीर पर आपकी नहीं चलने वाली है।

यह सभी जानते हैं कि पाक की लोकतांत्रिक सरकार जब-जब भारत के साथ कश्मीर को लेकर कुछ सकारात्मक करने की चेष्टा करती है, पाक की फौज और आईएसआई उसमें अड़ंगा लगाती हैं।

दोनों कश्मीर मुद्दा और आतंकवाद को जिंदा रखना चाहती हैं। यह पाकिस्तान का दुर्भाग्य ही है कि उसके खजाने का बड़ा हिस्सा भारत से दुश्मनी निभाने में खर्च हो रहा है। भारत ने आईएसआई की अलगाववादियों को फंडिंग की रणनीति की कमर भी तोड़ दी है।

इससे भी पाक सेना सदमे में है। चीन जहां सीमा पर तनाव के बावजूद भारत के साथ कारोबारी व कूटनीतिक रिश्तों को सामान्य रखना चाहता है, वहीं पाकिस्तान 1947 के भारत से दुश्मनी के दौर से निकल नहीं पा रहा है।

सीपेक में दो चीनी नागरिक के मारे जाने के बाद चीन पाकिस्तान से नाराज भी है। यह अस्ताना में भी दिखा। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग पाक पीएम नवाज से अलग से नहीं मिले।

पाक जनरल अपने पीएम नवाज से जैसा भी बर्ताव करें या उन्हें जो भी संदेश दें, पर कश्मीर को लेकर भारत का रुख साफ है कि कोई भी घाटी पर आंख उठाकर नहीं देख सकता है।

ऐसी हिमाकत करने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। अब कश्मीर में पाक फौज और आईएसआई की गंदी रणनीति सफल नहीं होने वाली है। वे कश्मीरियों को भड़काने में कभी सफल नहीं होंगे।

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