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भारतीय बैडमिंटन शिखर पर पहुंची साइना, बढ़ाया भारत का गौरव

भारतीय बैडमिंटन को नई ऊंचाई देने वाली साइना नेहवाल के शनिवार को दुनिया की शीर्ष महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनने पर हर देशवासी गर्व महसूस कर रहा है।

भारतीय बैडमिंटन शिखर पर पहुंची साइना, बढ़ाया भारत का गौरव
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भारतीय बैडमिंटन को नई ऊंचाई देने वाली साइना नेहवाल के शनिवार को दुनिया की शीर्ष महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनने पर हर देशवासी गर्व महसूस कर रहा है। साइना यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। उनसे पहले पुरुष सिंगल्स में प्रकाश पादुकोण शीर्ष रैंकिंग हासिल करने का कारनामा कर चुके हैं। इस तरह उन्होंने बैडमिंटन में चीनी और कोरियाई बादशाहत को खत्म कर दिया है। दरअसल, साइना को इंडियन ओपन सुपर सीरीज के सेमीफाइनल में स्पेन की कैरोलिना मारिन की हार से विशेष फायदा हुआ है। हालांकि, साइना 2010 में ही नंबर वन बनने की कगार पर थीं, लेकिन दुर्भाग्यवश चोट के कारण उन्हें कुछ दिन के लिए खेल छोड़ना पड़ा था।
अब शीर्ष पर बने रहना उनके लिए चुनौती होगा। आम तौर पर आम जनता को किसी खिलाड़ी की सफलता ही ज्यादा दिखाईदेती है, लेकिन उसके पीछे उसकी कितनी मेहनत, त्याग और संघर्ष छिपा होता है, वह नहीं दिखता है। साइना नेहवाल के बारे में भी यही कहा जा सकता है। उनमें बैडमिंटन के प्रति खास जुनून ही उन्हें औरों से अलग करती है। उनमें खेल के प्रति गजब का समर्पण और संघर्ष करने की क्षमता है। साइना का जन्म हरियाणा के हिसार जिले में हुआ था। उन्हें खेल की पे्ररणा अपने माता- पिता से विरासत में मिली है। उनके जन्म के दौरान उनके पिता हिसार विश्वविद्यालय में कीट विज्ञानी के तौर पर जुडेÞ थे, लेकिन साइन को बैडमिंटन का बेहतर प्रशिक्षण मिले इसके लिए वे हिसार से हैदराबाद चले गए थे। साइना के जीवन में कई बार उतार-चढ़ाव आए। इससे पहले वे कई बार नंबर दो तक पहुंच चुकी थीं, लेकिन वे आगे नहीं बढ़ पा रही थीं। इसे लेकर उनके मन में मायूसी थी। एक समय में वे लगातार शीर्षखिलाड़ियों से हार रहीथीं।
पिछले साल विश्व चैंपियनशिप के बाद तो वे संन्यास लेने के बारे में भी सोचने लगी थीं। हालांकि उनके कोच विमल कुमार ने उन्हें नए सिरे से तैयार किया और अब उनकी जबरदस्त वापसी हुई है। वे शानदार खेल दिखाते हुए इंडियन ओपन सुपर सीरीज के फाइनल में पहुंच गई हैं। कुछ माह पहले ही उन्होंने चाइना व आॅस्ट्रेलिया ओपन जीता है, वहीं आॅल इंग्लैंड स्पर्धा में वे उपविजेता रहीं। साइना अब तक चौदह अंतरराष्ट्रीय खिताब जीत चुकी हैं। वे 14 साल की कम उम्र में विश्व जूनियर बैडमिंटन चैंपियन बन गई थीं। साइना भारत सरकार द्वारा पद्म श्री, अर्जुन पुरस्कार और सर्वोच्च खेल पुरस्कार राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित हो चुकी हैं।
वे सुपर सीरीज खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं। 2012 के लंदन ओलंपिक में साइना नेहवाल ने इतिहास रचते हुए बैडमिंटन की महिला एकल स्पर्धा में कास्य पदक हासिल किया था। बैडमिंटन में ऐसा करने वाली वे भारत की पहली खिलाड़ी हैं। कोई पुरुष खिलाड़ी भी बैडमिंटन में ऐसी उपलब्धि हासिल नहीं कर पाया है। वे 2008 में हुए बीजिंग ओलंपिक के महिला एकल बैडमिंटन के क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं। अब उनका सपना 2016 में रियो में होने वाले ओलंपिक में बैडमिंटन में स्वर्ण पदक जीतना है। पूरे देश की ओर से इसके लिए उन्हें शुभकामनाएं।
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