Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

सीमा पार की साजिशों को विफल करना होगा

सेना के सभी शिविरों को अलर्ट कर दिया गया है।

सीमा पार की साजिशों को विफल करना होगा
X
जम्मू कश्मीर में एक बार फिर सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की कोशिश की गई है। रविवार और सोमवार की रात को करीब एक बजे अखनूर सेक्टर में बटाल गांव में स्थित जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स के शिविर पर घात लगाकर हमला किया गया, जिसमें तीन मजदूरों की मौत हो गई। आतंकियों ने यह हमला जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स के शिविर को निशाना बनाकर किया था। खास बात यह है कि जिस जगह हमला हुआ, वह नियंत्रण रेखा से महज दो किलोमीटर दूर है। इस हमले के बाद सेना के सभी शिविरों को अलर्ट कर दिया गया है।
यहां यह उल्लेख करना जरूरी है कि पिछले कुछ महीनों में कई बार सीमा पार के आतंकवादी सेना और सीमा सुरक्षा बल के जवानों को निशाना बना चुके हैं। पिछले छह महीने में हुए आतंकी हमलों में सौ से ज्यादा जवान शहीद हो चुके हैं। अठारह सितंबर को जम्मू कश्मीर में उरी के सेना मुख्यालय में हुए आतंकी हमले में उन्नीस जवान शहीद हो गए थे। इसके अलावा कुछ घायल भी हो गए थे। तीन अक्टूबर को आतंकवादियों ने बारामूला के जाबांज पोरा इलाके में 47 आरआर के शिविर पर हमला कर दिया था, जिसमें बीएसएफ का एक जवान शहीद हो गया था जबकि एक अन्य घायल हो गया था। हालांकि हमले के बाद सभी आतंकवादी भागने में कामयाब रहे थे।
छह अक्टूबर को कुपवाड़ा जिले में हंदवाड़ा स्थित लंगेट में सेना के शिविर के पास हमले की कोशिश नाकाम कर दी गई थी। आतंकवादियों ने सुबह शिविर के पास गोलीबारी शुरू की, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की और तीन आतंकियों को मार गिराया। दस अक्टूबर को पंपोर में दो से तीन आतंकवादियों ने एक सरकारी इमारत पर हमला बोल दिया। सेना की आतंकियों से तीन दिन तक मुठभेड़ जारी रही, जिसके बाद सभी आतंकियों को मार गिराया गया। तीस नवंबर को जम्मू के पास नगरोटा में आतंकियों ने सैन्य इकाई पर हमला किया। इस हमले में सात जवान शहीद हो गए थे। यह माना जा रहा था कि विमुद्रीकरण के बाद आतंकी समूहों के पास नई मुद्रा पहुंचने में अभी वक्त लगेगा और वे उतनी सक्रियता के साथ हमलों को अंजाम नहीं दे पाएंगे, जितना अब तक करते रहे हैं। विगत दो महीनों में सीमा पार से होने वाले हमलों में कमी भी दर्ज की गई है परन्तु इस ताजी वारदात से सिद्ध हुआ है कि खतरा टला नहीं है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सीमा पार से करीब सौ आतंकी नियंत्रण रेखा पार कर भारत में घुसपैठ की फिराक में हैं। आमतौर पर बर्फबारी से पहले सीमा पार से घुसपैठ होती रही है।
पाकिस्तानी सेना अक्सर कवर फायरिंग कर उन्हें घुसपैठ में मदद देती रही है, परंतु दिल्ली में मोदी सरकार आने के बाद से उनके लिए हालात उतने आसान नहीं रह गए हैं। पाकिस्तान की ओर से युद्ध विराम के लगातार उल्लंघन इसी मकसद से होते रहे हैं ताकि भारतीय सुरक्षाबलों को एक तरफ उलझाकर दूसरी तरफ से घुसपैठ कराई जा सके। अब तक सेना भी पाक की इस साजिश को समझ चुकी है। यही कारण है कि नियंत्रण रेखा के किसी भी छोर पर फायरिंग की जाए, सभी स्थानों पर चौकसी बढ़ा दी जाती है। बीती रात की इस वारदात के बाद भी सभी जगहों पर चौकसी बढ़ाकर वाहनों की सघन जांच की गई।
हाल में इस तरह की खुफिया रिपोर्ट आई थी कि सीमा पार से आतंकी घुसपैठ करने के लिए तैयार बैठे हैं लिहाजा सेना के शिविरों को निशाना बनाया जा सकता है। ध्यान देने वाली बात यह है कि जम्मू कश्मीर में बर्फबारी के बाद रास्तों के बंद हो जाने की वजह से यहां पर जितना मुश्किल सीमा पर गश्त लगाना होता जा रहा है उतना ही मुश्किल घुसपैठ करना भी होता है। साफ है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार हो रही बर्फबारी से जहां सुरक्षाबलों की मुश्किलें बढ़ी हैं, वहीं आतंकी तंजीमों के लिए हमलों को अंजाम देना उतना आसान नहीं रह गया है। हमारी सरहदों के रखवाले बेशक चौकस हैं, परंतु हर कोशिश को नाकाम करना बहुत जरूरी है। यह जांच का विषय है कि इतनी चौकसी के बावजूद आतंकी दो किलोमीटर भीतर तक घुसपैठ करने में आखिर कैसे सफल हो गए हैं।
खबरों की अपडेट पाने के लिए लाइक करें हमारे इस फेसबुक पेज को फेसबुक हरिभूमि, हमें फॉलो करें ट्विटर और पिंटरेस्‍ट पर-

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top