Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

चुनावी व्यंग्य : हाथी सियार गठबंधन

क्रंदनवन के उस तालाब में एक हाथी पानी पीने जाया करता था। वह हाथी उसी परिवार का था जिसके एक बडेरे हाथी को विष्णु ने एक मगरमच्छ से छुड़ाया था। उस बडेरे हाथी ने एक कमल का फूल टिकाकर भगवान से हेल्प मांगी थी।

चुनावी व्यंग्य : हाथी सियार गठबंधन
X

क्रंदनवन के उस तालाब में एक हाथी पानी पीने जाया करता था। वह हाथी उसी परिवार का था जिसके एक बडेरे हाथी को विष्णु ने एक मगरमच्छ से छुड़ाया था। उस बडेरे हाथी ने एक कमल का फूल टिकाकर भगवान से हेल्प मांगी थी। एकाध पीढ़ी तक मगरमच्छ और हाथी के परिवारों में दुश्मनी भी रही थी। जिस रोज विष्णु ने मगरमच्छ की गर्दन काटी उस रोज मगरमच्छ का एक बेटा भूख से तड़प - तड़प कर मर भी गया था। फलत: मगरमच्छ के परिवार और हाथी के परिवार में दुश्मनी स्थापित हो गई। यह दुश्मनी अभी हाल ही में दोस्ती में बदली, जब जंगल में प्रजातंत्र स्थापित हो गया। शेर और सियार के गठबंधन में चलने वाली सरकार पूरी 'ठगबंधन' ही साबित हुई। ऐसे में प्रजातंत्र अब 'मर-जा-तंत्र' का रूप ले चुका था। शेर और सियार की कूटनीति अक्सर 'कूटोनीति' उर्फ 'बूटोनीति' ही साबित होती थी, जो अंततः 'झूठनीति' में बदल जाती । ऐसे में कुर्सी की खातिर मगरमच्छ और हाथी को संयुक्त सी असंयुक्तता के साथ गठबंधन का मोर्चा स्थापित करना पड़ा।

राजनीति और प्रेम में सब कुछ जायज है। इसी मंत्र के सहारे इलेक्शन नजदीक देखते हुए हाथी प्राय: मगरमच्छ के पास जाता। वोट लेने की फिराक में दोनों घर-घर 'पैर पर सिर' रखकर वोट मांगते फिर मौका पाकर 'सिर पर पैर' रखकर भाग खड़े होते। सड़ियल भेड़ के बच्चे को मगरमच्छ झील में सैर कराता। खरगोश व बंदर को हाथी अपने ऊपर बैठाता। बकरियों की बस्ती में कंबल बांटने का कार्य करता। इस तरह से संयुक्त गठबंधन असली 'ठगबंधन' के विस्तार में लग गया। हमेशा की भांति मगरमच्छ और हाथी देश के किसी होटल में प्रेस कांफ्रेस में शिरकत कर रहे थे। किसी बात पर दोनों में ठन गई और वे ठनठनाते ही गए। हाथी मगरमच्छ की सरकार में अविश्वास जताने लगा। वह शीघ्र ही महाअसंतुष्ट हो गया।

वे आपस में घनघोर प्रेमंकर असंतुष्ट होकर जूतमपैजार नामक धार्मिक कार्यक्रम करने लग गए। तब मगरमच्छ ने हाथी के बारे में मीडिया में पोल खोलो रिपोर्ट दी। उसने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा - 'यह हाथी किसी काम का नहीं है। यह बात - बात पर झूठ बकता है। इसका झूठ देश के लिए बड़ा ही घातक है। यह मगरमच्छ के आंसू दिखाकर जनता को भुलावे में डाल रहा है।' इधर हाथी ने भी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उसने भी मगरमच्छ पर एक से बढ़कर एक आरोप लगाए। दोनों ही ओर से गालियों का लेन-देन हो रहा था। तब हाथी ने मीडिया मंडी में बयान दिया- 'इस मगरमच्छिये की दोस्ती चलने लायक नहीं है। हमने कई मौकों पर इसे सहन किया। इसी मगरमच्छ के बडेरे ने मेरे परदादा के दादा का पेट फाड़ खाया था। वह तो एंड मौके पर उसने गॉड विष्णु को कमल का फूल देकर पटाया था। वरना मगरमच्छ का क्या ? यह जीव ही मांस भक्षी है।' ऐसा कहकर हाथी ने अपने दिखाने वाले दांतो पर हाथ फेरा और प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त की। मौका पाकर शेर और सियार कुछ बकरियों के साथ महागठबंधन बनाकर महा ठगबंधन के लिए अपनी कमर कस चुके थे।

और पढ़े: Haryana News | Chhattisgarh News | MP News | Aaj Ka Rashifal | Jokes | Haryana Video News | Haryana News App

Next Story
Top