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आधी आबादी की सुरक्षा के प्रति गंभीरता जरूरी

इस घटना ने पूरे देश को शर्मसार किया है।

आधी आबादी की सुरक्षा के प्रति गंभीरता जरूरी

सोलह दिसंबर आने में कुछ ही दिन शेष है, लेकिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर से निर्भया कांड दोहराया जा चुका है। एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने वाली 27 वर्षीय महिला के साथ कैब सर्विस देने वाली ऊबर कंपनी के कार ड्राइवर द्वारा बलात्कार के मामले की जितनी निंदा की जाए कम है। इस घटना ने पूरे देश को शर्मसार किया है। जिस तरह से दो साल पूर्व राजधानी के वसंत विहार में घटी उस बर्बर घटना के प्रति जनता में रोष देखा गया था, इस बार भी वैसा ही आक्रोश देखा जा रहा है। संसद से सड़क तक महिला सुरक्षा का मुद्दा गूंज रहा है।

हालांकि मोदी सरकार ने इस घटना के प्रति संवदेनशीलता दिखाते हुए सख्त कदम उठाए हैं। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में घटना की जानकारी देते हुए बताया है कि पीड़ित महिला ने बीते शुक्रवार को रात के करीब ग्यारह बजे ऊबर कंपनी की कैब ली थी, जिसमें बैठने के कुछ ही देर बाद उसे झपकी आ गई। करीब पंद्रह मिनट बाद उसने पाया कि ड्राइवर कार को किसी सुनसान जगह ले आया है। उसके बाद ड्राइवर ने उसकी पिटाई की फिर बलात्कार किया। इतना ही नहीं, उसने महिला को जान से मारने की धमकी दी और फिर घर छोड़ गया। गनीमत इतनी ही थी कि जाते-जाते महिला ने कार की फोटो खींच ली। रात करीब एक बजे उसने पुलिस को मामले की जानकारी दी और अगले दिन आरोपी की मथुरा से गिरफ्तारी हो गई। निर्भया कांड के बाद कई स्तरों पर सुधार किए गए थे जिसमें पैट्रोलिंग से लेकर एफआईआर के तौर-तरीकों और ट्रैफिक व्यवस्था तक में फेरबदल किए गए थे। साथ ही आपराधिक कानून में भी संशोधन कर उसे और कड़ा किया था, परंतु ये सुधार उतने प्रभावी साबित नहीं हो रहे हैं। लोगों में कानून का भय किस कदर कम हो गया है इसका उदाहरण वह कैब ड्राइवर है जिसने पूर्व में बलात्कार के मामले में ही एक बार सजा भुगतने के बाद भी फिर वही दरिंदगी की है। वहीं कंपनियां किस तरह व्यवस्था का मखौल उड़ा रही हैं वह ऊबर कंपनी के कामकाज से समझा जा सकता है। जैसे कि कैब में जीपीएस नहीं लगा था, जो कि कानूनन अनिवार्य बनाया गया है। आरोपी ड्राइवर ने मोबाइल सिम किसी और के नाम पर ले रखा था और पता भी गलत दिया था। साथ ही कंपनी को फर्जी चरित्र प्रमाणपत्र दे रखा था।

ताज्जुब होता है कि ऐसे व्यक्ति को कंपनी अपने यहां काम पर रखी हुई थी। इसमें उसकी साफ लापरवाही दिखाई दे रही है। केंद्र सरकार ने ऊबर जैसी कैब कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के साथ ही देश में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई प्रभावी कदम उठाने के संकेत दिए हैं। पुलिस भी सक्रियता दिखा रही है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे लोगों में कानून का भय व्याप्त हो सके और जो लोग इस तरह की घटनाओं को अंजाम देने की मंशा पाले हुए हैं उनकी रूह कांप जाए। केंद्र व राज्य सरकारों को नए सिरे से ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे महिलाओं के खिलाफ इस तरह के अपराधों पर रोक लगाई जा सके ताकि वे घर में या घर से बाहर निकलते समय खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। जब तक महिलाएं असुरक्षित रहेंगी तब तक भारत एक स्वस्थ व संवेदनशील लोकतंत्र का हकदार नहीं हो सकता।

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