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कब रुकेगा उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़

उत्तर प्रदेश के खाद्य और दवा प्रशासन ने दूध के दो नमूनों की जांच में मिलावट पाया है।

कब रुकेगा उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़
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उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ करने के मामले में मैगी बनाने वाली कंपनी नेस्ले के बाद अब दूध उत्पादन से जुड़ी मदर डेयरी भी सवालों में घिर गई है। उत्तर प्रदेश के खाद्य और दवा प्रशासन ने दूध के दो नमूनों की जांच में मिलावट पाया है। एक नमूने में डिटज्रेंट और दूसरा नमूना गुणवत्ता के लिहाज से हल्का पाया गया है। ये दोनों नमूने गत वर्ष नवंबर में मदर डेयरी के कलेक्शन सेंटर से लिए गए थे। वहीं मदर डेयरी अपने दूध में किसी तरह की मिलावट होने से इंकार कर रही है। उसने कहा है कि पैकेट में भरने से पहले दूध को कई तरह के परीक्षणों से गुजरना पड़ता है। यदि इस दौरान उसमें मिलावट की बात सामने आती है, तो उसे अस्वीकार कर दिया जाता है। अब इस सच्चाई का पता लगाने के लिए उसके पैकेट दूध की भी जांच की जानी चाहिए। मदर डेयरी कई राज्यों में बड़े पैमाने पर दूध की आपूर्ति करती है। इसके साथ ही देश में अभी कई कंपनियां दूध के कारोबार में शामिल हैं। यह हमारे स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। बच्चे-बूढ़े हर वर्ग के लोग इसका सेवन करते हैं। ऐसे में इसमें मिलावट कई गंभीर बीमारियों को न्योता दे सकता है। डिटज्रेंटयुक्त दूध के सेवन से लोगों की जान भी जा सकती है। पहले भी दूध में भारी मात्रा में मिलावट की बातें सामने आती रही हैं। जिसे देखते हुए सुप्रीम कोर्टने दूध में मिलावट को आपराधिक कृत करार दिया है। और मिलावटखोरों को कड़ी से कड़ी सजा देने का प्रावधान किया गया है। इसके बावजूद मिलावट का खेल जारी है, जो कि चिंताजनक है।

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अभी मैगी में बड़े पैमाने में शीशा और मोनो सोडियम ग्लूटामेट मिलने की बात सामने आई है। देश भर में किए गए परीक्षणों में दोनों तय मानक से अधिक पाए गए। जिसके बाद इसकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है। साथ ही इसे बनाने वाली कंपनी पर जवाबदेही भी तय की गई है। मैगी में अशुद्धि का मामला सामने आने के बाद सरकार सक्रिय हुई और देश में नूडल्स बनाने वाली दर्जनों दूसरी कंपनियों के उत्पादों की जांच आरंभ किया गया है। हालांकि जिस तरह से देश में कंपनियों द्वारा नियमों की अनदेखी करने की खबरें आती रही हैं, उसे देखते हुए इस जांच की रिपोर्ट संतोषजनक आने की उम्मीद कम ही है। दरअसल, दूध और नूडल्स ही नहीं ज्यादातर उपभोक्ता वस्तुओं में मिलावट का गोरखधंधा चरम पर है। मिलावटखोर चंद फायदे के लिए उपभोक्ताओं को दलदल में धकेल रहे हैं।

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खाने पीने के सामानों में किसी भी तरह की अशुद्धि जहर से कम नहीं है, जो सेवन करने वालों को धीरे धीरे मौत के मुंह में ले जाती है। यह उपभोक्ताओं के साथ सरासर अन्याय है, एक तरफ तो कंपनियां उनसे तय मूल्य वसूलती हैं, लेकिन बदले में हानिकारक रसायनयुक्त सामान देती हैं। देश में इस तरह का गोरखधंधा बढ़ने की एक वजह इन पर नजर रखने वाली एजेंसियों की निष्क्रियता भी है। कंपनियों से सांठगांठ व भ्रष्टाचार में लिप्त होने की वजह से भी ये अपना काम सही से नहीं करती हैं। इन एजेंसियों को और पारदर्शी व जवाबदेह बनाते हुए सरकार को मिलावटखोरों पर नकेल कसनी चाहिए। जो भी उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ करते हुए पकड़े जाएं उन्हें सख्त से सख्त सजा दी जाए, तभी इससे निपटा जा सकता है।

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