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यात्री विमान को निशाना बनाना अक्षम्य अपराध

यूक्रेन का आरोप है कि रूस विद्रोहियों को मदद कर रहा है।

यात्री विमान को निशाना बनाना अक्षम्य अपराध
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मलेशियाई एयरलाइंस के यात्री विमान के कथित मिसाइल हमले में दुर्घटनाग्रस्त होने से सभी 298 यात्रियों की मृत्यु की खबर से दुनिया स्तब्ध है। यूक्रेन में सेना और रूस सर्मथक विद्रोहियों के बीच जारी हिंसक संघर्ष कितना भयानक हो सकता है उसकी यह एक बानगी है। विमान पर किसने मिसाइल दागी यह तो जांच के बाद ही पता चल पाएगा, परंतु अभी शक की सुई रूस सर्मथिक विद्रोहियों की ओर है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसके लिए यूक्रेन को जिम्मेदार ठहराया है। वहीं यूक्रेन सरकार ने भी साफ किया हैकि उसकी सेना का इसमें हाथ नहीं है, उनके पास ऐसी मिसाइल भी नहीं है। आरोप है कि विमान को बक मिसाइल से निशाना बनाया गया जो कि रूस ने विद्रोहियों को मुहैया कराया है। वहीं हमले के कुछ ही देर बाद दो रूसी अधिकारियों के बीच हुई वार्ता का टेप भी संदेह पैदा कर रहा है। इसे जिसने भी निशाना बनाया हो, यह अक्षम्य अपराध है।
मलेशिया के यात्री विमान के साथ छह माह में यह दूसरा बड़ा हादसा है। मार्च में कुआलालंपुर से बीजिंग जा रही एमएच 370 विमान समुद्र में किसी अज्ञात स्थान पर गिर गया था। आज तक उसका सुराग नहीं मिल सका है। हालांकि यह मामला उससे अलग है। दो गुटों के बीच संघर्ष में आम नागरिकों के साथ इस तरह के खूनी खेल बंद होने चाहिए। इराक व सीरिया में सुन्नी चरमपंथियों की बर्बरता और इजरायल व हमास के बीच हिंसा-प्रतिहिंसा में भी निदरेष मारे जा रहे हैं। दरअसल, इस हादसे की वजह रूस-यूक्रेन का झगड़ा है।
यूक्रेन के जिस इलाके में मलेशियाई विमान को मार गिराया गया, वह पिछले करीब पांच महीने से रूस सर्मथकों और शेष यूरोप सर्मथक यूक्रेन के बीच जंग का अखाड़ा बना हुआ है। सोवियत संघ से अलग होने के बाद यूक्रेन अलग देश बना था। अब रूस से सटे यूक्रेन के पूर्वी इलाके क्रीमिया के लोग एक बार फिर रूस के साथ मिलना चाहते हैं जिसका यूक्रेन विरोध कर रहा है। क्रीमिया रूसी बहुल है। वहीं पश्चिमी भाग कीव यूरोप व अमेरिकी सर्मथक है। अप्रैल में दोनेत्स्क ने भी यूक्रेन से अलग होने का ऐलान कर दिया था। इससे पहले मार्च में विद्रोही प्रांत क्रीमिया को रूस ने अपने कब्जे में ले लिया था। इसी बात को लेकर रूस और यूक्रेन के बीच तनातनी चल रही है।
यूक्रेन का आरोप है कि रूस विद्रोहियों को मदद कर रहा है। अब भारत, फ्रांस, इंग्लैंड समेत कई देशों ने यूक्रेन के वायुमार्ग से अपनी उड़ाने रद्द करने का फैसला किया है। वहीं जिन देशों के नागरिक इसमें मारे गए हैं उनके राजनेता और कूटनीतिज्ञ बेहद सक्रिय हो गए हैं, इससे लगता है कि मामला बहुत आगे तक जाएगा। यह हादसा विश्व राजनीति में उलट फेर ला सकता है। अब सब कुछ मलेशियाई विमान के ब्लैक बॉक्स, रिकॉर्डर आदि से हासिल आखिरी पलों के सही और प्रामाणिक आंकड़ों और सूचनाओं पर निर्भर है। यदि यह पता चलता है कि रूस से भेजे गए हथियारों से एमएच-17 को विद्रोहियों ने गिराया तो इसके बाद यूक्रेन संकट की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। इससे अमेरिका, यूरोपीय यूनियन और रूस के कूटनीतिक संबंधों में बड़ा बदलाव आ सकता है। अर्थात दुनिया शीत युद्ध के दौर में पहुंच सकती है। बहरहाल, जिस तरह के कठोर आर्थिक प्रतिबंध अमेरिका ने रूस पर लगाए हैं और इस पर रूस की कड़ी प्रतिक्रिया देखकर कहा जा सकता है कि उसका आगाज हो गया है।
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