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रीझती और रिझाती आप, केजरीवाल जीतना चाहते हैं जनता का विश्वास

दिल्ली में विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों में आम आदमी पार्टी के हौंसले तो बुलंद है

रीझती और रिझाती आप, केजरीवाल जीतना चाहते हैं जनता का विश्वास
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दिल्ली में विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों में आम आदमी पार्टी के हौंसले तो बुलंद है, लेकिन पहले दिल्ली की कद्दी छोड़कर भागी आप के प्रति लोगों का नजरिया भले ही बदल रहा हो, फिर भी हाल ही में एक टीवी चैनल के सर्वे में आप को 48 प्रतिशत, भाजपा को 40 प्रतिशत और कांग्रेस को आठ प्रतिशत चुनावी सफलता के अनुमान पर आप इतनी रिझ कर चल रही है कि अरविंद केजरीवाल और उनके नेता वोटरों को ऐसी घोषणाओं से रिझाने में लगे हुए हैं जिनके अधिकार दिल्ली सरकार के दायरे से भी बाहर हैं।

दिल्ली विस के चुनाव का ऐलान तक नहीं हुआ, लेकिन चुनाव की तरीखों के ऐलान की आस में भाजपा, कांग्रेस व आप द्वारा प्रत्याशियों के भी ऐलान करने का क्रम जारी है। चर्चाएं जोरों पर हैं कि क्या केजरीवाल दिल्ली के वोटरों में अपने खोए हुए विश्वास को हासिल कर पाएंगे? या फिर मझधार में छोड़ने की आदत के लिए मजबूर नजर आएंगे।

नौ रत्न बनाम विद्या बालन?
मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत कर जागरूकता के लिए ‘नौ रत्न’ फार्मूला अपनाया है, जिसमें उन्होंने सभी क्षेत्रों के प्रसिद्ध हस्तियों का चयन करने में परहेज भी नहीं किया। मसलन यूपीए सरकार के शासनकाल में ग्रामीण विकास मंत्रालय और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री जयराम रमेश ने देश में स्वच्छता और सफाई के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री विद्या बालन को ब्रैंड एंबेसडर बनाया था। बालन शौचालयों के निर्माण को बढ़ावा देने संबंधी विज्ञापनों में हिस्सा लेती आ रही थी। विद्या बालन ने भी इसे राष्ट्रीय आंदोलन करार देते हुए अभियान में भूमिका निभाने के लिए दो साल का समय दिया था। मोदी सरकार ने भी स्वच्छता अभियान को जनांदोलन का रूप दिया है, इसके लिए ग्रामीण विकास, पंचायती राज और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री चौधरी बीरेन्द्र सिंह का नजरिया शायद यूपीए सरकार से अलग नजर आता है। जब बीरेन्द्र सिंह से मीडिया की ओर से एक सवाल किया गया कि क्या विद्या बालन को उनका मंत्रालय अपना ब्रांड एंबेसडर बनाए रखेगा तो तपाक से उनका जवाब आया कि कौन विद्या बालन? उनसे तो मेरी कोई बात तक नहीं हुई।
मोदी के ‘बिजी’ मंत्री
मोदी मंत्रिमंडल के दो केंद्रीय मंत्री बाकियों की तुलना में खासा सक्रिय हैं। जहां शेष मंत्री प्रधानमंत्री के एसोसिएट के तौर पर काम कर रहे, वहीं ये दोनों कैबिनेट मंत्री बढ़ चढ़ कर काम करते दिख रहे हैं। इन दोनों को लेकर भाजपा के गलियारों में दो तरह की चर्चाएं हैं। पहली चर्चा है कि ये दोनों मंत्री खुद को भाजपा में ताकतवर बनाए रखना चाहते हैं। जबकि, दूसरी चर्चा कुछ और ही वजह बयां कर रही है। ऐसी चर्चा है कि इन दोनों कैबिनेट मंत्रियों की सक्रियता का कारण प्रधानमंत्री का दबाव और प्रभाव है।
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