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वाड्रा पर सोनिया-राहुल को जवाब देना चाहिए

दस साल से सत्ता पर काबिज कांग्रेस ने अपनी उपलब्धियां बताना मुनासिब नहीं समझा।

वाड्रा पर सोनिया-राहुल को जवाब देना चाहिए
नई दिल्ली. लोकसभा चुनावों के शबाब पर पहुंचने के साथ ही भाजपा-कांग्रेस के बीच वार और पलटवार की जुबानी जंग भी तल्ख होती जा रही है। कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत भाजपा के पीएम उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर निजी हमले में झोंक दी है, तो भाजपा कांग्रेस की कमजोर नस ‘रॉबर्ट वाड्रा’ पर हमला कर रही है। दोनों राष्ट्रीय पार्टियों ने अपने-अपने चुनाव प्रचार अभियान में जिस तरह देश के अहम मसले को भुला कर निजी हमलों को तरजीह दी है, उससे चिंता तो पैदा होती है कि क्या निजी हमले ही चुनाव का मकसद है और क्या चुनाव प्रचार ऐसा ही होता है? आखिर भ्रष्टाचार, महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, सुशासन, विकास जैसे अह्म मुद्दे कहां गए? इन पर बहस क्यों नहीं होती है? पार्टियों का यह दायित्व नहीं है कि वह जनता को बताए कि उसका एजेंडा क्या है, लेकिन दस साल से सत्ता पर काबिज कांग्रेस ने अपनी उपलब्धियां बताना मुनासिब नहीं समझा।
कमजोर, भ्रष्ट और लचर सरकार देने वाली कांग्रेस सत्ता हाथ से जाती देख आकंठ हताशा में डूबकर निजी हमले की शुरुआत कर दी। सबसे पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी पर निजी हमले किए। उसके बाद इधर कुछ दिनों से राहुल के साथ-साथ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा ने भी मोदी पर निजी हमलों की बौछार कर दी है। ये और बात है कि भाजपा और नरेंद्र मोदी खुद आरएसपी (राहुल-सोनिया-प्रियंका) के निजी हमलों का तथ्य के साथ जवाब देते हैं। दिक्कत यह है कि मोदी पर निजी हमले के फेर में राहुल कई बार हंसी का पात्र बन जाते हैं। उन्होंने जब कहा कि ‘गुजरात में लोकायुक्त होता तो मोदी जेल में होते’ तो मोदी ने तथ्य के साथ जवाब दिया कि ‘राहुल को पता ही नहीं है कि गुजरात में लोकायुक्त है।’ जब राहुल ‘गुजरात में टॉपी मॉडल की बात करते हैं’ तो मोदी जवाब देते हैं कि ‘गुजरात में जमीन अधिग्रहण के लिए पारदर्शी नीति है और राज्य के उद्योगीकरण के लिए भी उद्योग नीति है।
राहुल के आरोप झेल रहे अदानी ग्रुप के मुखिया उद्योगपति गौतम अदानी ने भी जवाब दिया है कि गुजरात में मोदी ने उन्हें कोई रियायत नहीं दी है, बल्कि गुजरात की उद्योग नीति के तहत बंजर जमीन पर उन्होंने निवेश किया है। यह बहुत कम लोगों को मालूम है कि राजस्थान, मध्यप्रदेश के बाद गुजरात में ही सबसे अधिक बंजर जमीन है और मोदी ने बंजर जमीन पर ही उद्योग को बढ़ावा दिया है। अब जब भाजपा ने कांग्रेस के ‘दामादवाद’ पर प्रहार किया है और ‘दामादजी’ नाम से पुस्तिका जारी कर पूछा है कि एक लाख रुपये से चंद दिनों में 300 करोड़ का साम्राज्य रॉबर्ट वाड्रा ने कैसे खड़ा कर लिया, कांग्रेस शासित राज्य राजस्थान और हरियाणा में नियम को ताक पर रखकर कैसे रॉबर्ट की खरीदी जमीन का लैंड यूज केवल 18 दिनों में बदल दिया गया, इन्हीं दो राज्यों में रॉबर्ट ने निवेश क्यों किया, डीएलएफ ने रॉबर्ट की कंपनी को बिना ब्याज, बिना साख करोड़ों रुपये का उधार कैसे दे दिया और क्या यह सब सोनिया -राहुल के प्रोत्साहन के बिना संभव था? तो इस समय चुनाव के इस मोड़ पर सोनिया-राहुल-प्रियंका को भी दरिया जैसा दिल दिखाते हुए आवाम को ‘रॉबर्ट का सच’ बताना चाहिए।
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