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रंगभेद क्रांति के मसीहा मंडेला का जाना

चिंतन

रंगभेद क्रांति के मसीहा मंडेला का जाना
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बीसवीं सदी के महान हस्तियों की सूची में शामिल शख्सियतों को हम उंगलियों पर गिन सकते हैं। महात्मा गांधी को कौन भूल सकता है भला, जिन्हें देश राष्ट्रपिता का दर्जा देता है और जिन्होंने भारत में राष्ट्रीय चेतना का विकास किया। गांधीजी से प्रभावित होने वाले मार्टिन लूथर किंग जूनियर, जिन्हें दुनिया अमेरिकी गांधी के नाम से जानती है। फ्रैंकलिन रूजवेल्ट, जिन्होंने अमेरिका को महान मंदी तथा द्वितीय विश्वयुद्ध से उबरने में नेतृत्व किया और अमेरिका को एक नई पहचान दी। विंस्टन चर्चिल, जिन्होंने युद्ध के दिनों में ब्रिटेन का सफल नेतृत्व किया और नाजियों से बचाया। वहीं विज्ञान के क्षेत्र में अल्बर्ट आइंस्टाइन और थॉमस एडीसन का नाम आता है, परंतु यह सूची नेल्सन मंडेला के नाम के बिना कभी पूरी नहीं हो सकती, जिन्हें दुनिया अफ्रीकी गांधी के नाम से जानती है बल्कि मंडेला अपने कई समकालीनों से लोकप्रियता में बहुत आगे दिखते हैं।

मंडेला आज हमारे बीच नहीं हैं, उनका पूरा जीवन दक्षिण अफ्रीका या कहें मानवता की मुक्ति का इतिहास है। नेल्सन मंडेला ने अपनी आत्मकथा में लिखा है-‘मैं आजाद होने की भूख के साथ नहीं जन्मा था। मैं तो आजाद ही जन्मा था। हर मुमकिन तरीके से मैं आजाद था। आजादी थी मेरी मां की कुटिया के सामने वाली पगडंडियों पर दौड़ लगाने की। मैं आजाद था अपने गांव से गुजरने वाले साफ सुथरे झरनों में तैरने के लिए, लेकिन बचपन की आजादी महज छलावा थी। बतौर एक नौजवान मैं समझने लगा कि मेरी आजादी मुझसे छीन ली गई है। तब मुझमें आजादी की भूख जगने लगी।’ दुनिया में ऐसी बहुत कम शख्सियतें हैं, जिन्होंने अपने बल पर युग परिवर्तन किया हो, मंडेला उनमें से एक हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन मानवता की सेवा में लगा दिया और ऐसा उन्होंने खुद की कुर्बानी दे कर किया। ऐसे लोगों को ही दुनिया व्यक्ति न मानकर संस्थान का दर्जा देती है। मंडेला ने इंसानियत की आजादी और नस्लीय भेदभाव को खत्म करने के लिए दक्षिण अफ्रीकी लोगों का नेतृत्व किया और इस दौरान उन्हें अपने जीवन के 27 साल जेल की काल कोठरी में बीतानी पड़ी। यहां उन्हें यातनाएं दी गईं, परंतु वे टूटे नहीं न ही निराश हुए, बल्कि उनके इरादे और मजबूत होते गये। आखिरकार उनकी जीत हुई और वे दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति बने। उनकी महानता ही थी कि सत्ता मिलने के बाद उन्होंने उन गोरों को माफ कर दिया, जिन्होंने कभी उन पर जुल्म ढाया था, जबकि वे उनके खिलाफ कार्रवाईकर सकते थे। भारत सरकार ने उनके गांधीवादी विचारधारा को और अलंकृत करते हुए भारत रत्न से विभूषित किया।

उन्होंने सत्ता में रहकर जिस तरह के सेवक का उदाहरण पेश किया वैसा अतीत में विरले ही मिलता है। यही वजह हैकि दुनिया की ऐसी कोई हस्ती नहीं, जिन्होंने इस व्यक्तित्व के जाने पर शोक नहीं जताया हो। बराक ओबामा ने कहा है कि मंडेला ने बेहतरी के लिए बदलाव के अपने वादे को पूरा किया। वहीं ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने कहा है कि विश्व से एक महान रोशनी चली गई। उन्होंने अपने पीछे जो विरासत छोड़ दिया है, उसे दुनिया को मिलकर आगे बढ़ाना चाहिए। दुनिया उन्हें हमेशा याद करेगी। सदी के महान लोगों की जब चर्चा होगी तब-तब उनकी प्रशंसा होगी और उनकी जीवनगाथा दूसरों के लिए प्रेरणादायी बनी रहेगी। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के शब्दों में मानवता के लिए प्रेरणा के एक प्रतीक व भारत के महान मित्र को श्रद्धांजलि।

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