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भारतीय अर्थव्यवस्था में अच्छे दिनों के संकेत

हालांकि नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

भारतीय अर्थव्यवस्था में अच्छे दिनों के संकेत

भारतीय अर्थव्यवस्था अब पटरी पर लौट आई है। रिजर्व बैंक ने गुरुवार को अपने मुख्य नीतिगत ब्याज दरों में कटौती करते हुए इसमें र्इंधन भरने का काम किया। रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 0.25 अंकों की कटौती करते हुए इसे 7.75 फीसदी के स्तर पर बरकरार रखा है। इसके साथ ही रिवर्स रेपो रेट में भी इतने ही अंकों की कटौती करते हुए 6.75 फीसदी रखा गया है। हालांकि नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) में कोईबदलाव नहीं किया गया है। उसे अभी भी चार फीसदी के स्तर पर रखा गया है। रेपो रेटवह दर है जिस पर रिजर्व बैंक देश के दूसरे व्यावसायिक बैंकों को कर्जदेता है। जाहिर है, इसमें कटौती से बैंकों से लिए जाने वाले ऋण सस्ता होने की संभावना बढ़ गई है। उद्योग जगत लंबे समय से रिजर्व बैंक से कर्ज को सस्ता करने की मांग कर रहा था। केंद्र सरकार भी देश में नए निवेश को बढ़ाने के लिए रिजर्व बैंक को नीतिगत ब्याज दरों में कटौती की सलाह दे रही थी।

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हालांकि देश में महंगाईकी ऊंची दर होने से रिजर्व बैंक जनवरी 2014 से ही इस तरह की मांगों को कड़ाईसे टालता आ रहा था। अब देश में महंगाई करीब करीब काबू में है। मईमें देश में सत्ता परिवर्तन हुआ था। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में एनडीए सरकार के आने के बाद से कई नीतिगत फैसले लिए गए, तब से महंगाई में उल्लेखनीय कमी आई है। खुदरा महंगाई दिसंबर में पांच फीसदी, जबकि नवंबर में 4.38 फीसदी थी। वहीं थोक महंगाई दिसंबर में 0.11 फीसदी के स्तर पर थी, जबकि नवंबर में तो वह शून्य के स्तर पर पहुंच गई थी। रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने भी कहा हैकि मौजूदा वातावरण में अगले एक साल तक देश में महंगाई दर के छह फीसदी के नीचे रहने की संभावना है। जाहिर है, महंगाई को लेकर रिजर्व बैंक की चिंता दूर हो गई है, इसी वजह से उसने मौद्रिक नीति की समीक्षा की तय तिथि से पहले ही ब्याज दरों में कटौती का निर्णय लिया। बाजार ने इस फैसले को हाथों हाथ लिया है।

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परिणामस्वरूप बंबई शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स एक ही दिन में करीब आठ सौ अंक ऊपर चढ़ गया। आज भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी मानक सही दिशा में हैं। विश्व बैंक ने अपने ग्लोबल आउटलुक रिपोर्ट में कहा भी है कि दुनिया में जहां मंदी के आसार दिख रहे हैं, वहीं भारत में बेहतरी के लक्षण नजर आ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2017 तक विकास के मामले में भारतीय अर्थव्यवस्था चीन को भी पीछे छोड़ देगी। इसके संकेत अभी से नजर आने लगे हैं।

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आज चीन मंदी की चपेट में है, जिससे निवेशक भारत की ओर देखने लगे हैं। मांग में वृद्धि से दिसंबर में औद्योगिक उत्पादन में 3.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विश्व बैंक ने इसका श्रेय मोदी सरकार द्वारा हाल ही में उठाए गए सुधारवादी कदमों को दिया है। आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माहौल भी भारतीय अर्थव्यवस्था के अनुकूल है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई है। देश में र्इंधन की कीमतों में तेज गिरावट से सरकार को महंगाई, चालू खाता घाटा और सब्सिडी को नियंत्रण में रखने में काफी मदद मिल रही है। ऐसे में कह सकते हैं कि अर्थव्यवस्था में अच्छे दिन आ गए हैं।

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