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डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट जारी, पेट्रोल-डीजल पर राहत के छींटे

डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट जारी रहने के बावजूद केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने की हिम्मत दिखा कर जनता को बड़ी राहत दी है।

डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट जारी, पेट्रोल-डीजल पर राहत के छींटे
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डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट जारी रहने के बावजूद केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने की हिम्मत दिखा कर जनता को बड़ी राहत दी है। इससे लोगों का दैनिक बजट में बोझ कम होगा। हाल के महीनों में लगातार पेट्रो उत्पादों के दाम बढ़ने से सरकार पर टैक्स में कटौती का दबाब बढ़ रहा था।

सरकार विपक्ष के निशाने पर भी थी। पेट्रोल व डीजल के दाम बार-बार बढ़ते रहने से लोगों में असंतोष भी बढ़ रहा था। हालांकि पेट्रोलियम के दाम बढ़ने के पीछे अंतरराष्ट्रीय कारण हैं। एक तरफ जहां कच्चे तेल के दाम बढ़ हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ रुपया के कमजोर होने से तेल आयात महंगा पड़ रहा है।

इस विकट परिस्थिति के बावजूद वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले एक्साइज ड्यूटी में डेढ़ रुपये प्रति लीटर घटाने का ऐलान किया। ऑइल मार्केटिंग कंपनियां (ओएमसी) एक रुपया घटाएंगी। इससे उपभोक्ता को तुरंत प्रति लीटर पेट्रोल-डीजल पर 2.50 रुपये की राहत मिलेगी।

कटौती से एक्साइज रेवेन्यू में इस साल 10,500 करोड़ रुपये का प्रभाव पड़ेगा। केंद्र सरकार पेट्रोल पर 19.48 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 15.33 रुपए प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी लेती है। वित्त मंत्री ने राज्यों से भी पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट में 2.50 रुपये प्रति लीटर की कटौती करने की अपील की।

इससे जनता को 5 रुपये प्रति लीटर की राहत मिलेगी। वित्त मंत्री की अपील के बाद महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, त्रिपुरा, हरियाणा और झारखंड ने वैट को 2.50 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से कम कर दिया। इससे इन राज्यों में सीधे 5 रुपये प्रति लीटर पेट्रोल व डीजल सस्ते हो गए।

आने वाले एक दो दिनों में और राज्य भी कदम उठाएंगे। डीजल के महंगा होने से कृषि समेत खाने-पीने के अधिकांश वस्तुओं पर लागत बढ़ रही थी। खाद्य आपूर्ति की बहुत से वस्तुएं एक राज्य से दूसरे राज्य जाती हैं, जो डीजल गाड़ियों से ढोयी जाती हैं। इसलिए महंगे डीजल के चलते ढुलाई की लागत बढ़ जाती है।

जिसका अंतिम असर महंगाई दर बढ़ने के रूप में देखने को मिलता है। सरकार का लक्ष्य महंगाई दर को चार फीसदी से नीचे रखने का है। पेट्रोलियम में इस कटौती के बाद मुद्रास्फीति लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी। हालांकि पेट्रोल-डीजल के भाव कम होने का नकारात्मक असर दलाल स्ट्रीट स्टीट में देखने को मिली।

शेयर बाजार में कोहराम मच गया। सेंसेक्स 806 अंक तो निफ्टी 259 अंक टूट गए। इससे बाजार को 3.31 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। एक दिन पहले से शेयर निवेशकों को 1.79 लाख करोड़ की हानि उठानी पड़ी थी। यह भी सही है कि जब अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की हालत दुरुह हो, रुपये पर भारी दबाव हो, घरेलू आर्थिक स्थिति सुस्त हो, उसमें एक्साइज ड्यूटी में कटौती साहस भरा फैसला है।

यह स्वागत योग्य है। इस फैसले को चुनावों से जोड़कर भी नहीं देखा जाना चाहिए, कारण वैश्विक परिस्थितियों की वजह से कटौती का असर कितने दिन रहेगा, कहना मुश्किल है। हालांकि पेट्रोलियम पर विपक्ष की राजनीति दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन सरकार को टैक्स के लिए पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम करनी चाहिए और कच्चे तेल के उत्पादक देशों में बड़े पैमाने पर निवेश करना चाहिए।

देश में भी बायो ईंधन व एथनॉल जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से ध्यान देना चाहिए, ताकि हम अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल के आगे बेबस न हों। बहरहाल पेट्रोल-डीजल के दाम कम होने से जनता राहत महसूस करेगी।

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