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प्रभात कुमार रॉय का लेख : यूनान व इटली से प्रगाढ़ होंगे रिश्ते

विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने ग्रीस (यूनान) और इटली का कूटनीतिक दौरा किया। भारत और ग्रीस के बीच 530 मिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है। भारत की अनेक कंपनियां ग्रीस में कार्यरत हैं। ग्रीस में इनफॉरमेशन टेक्नोलाॅजी और निर्माण क्षेत्रों की भारत की अनेक कंपनियां सक्रिय हैं। ग्रीस की तरह ही भारत और इटली के परस्पर संबंध भी सदियों पुराने हैं। रोमन एंपायर के दौर से भारत और इटली के मध्य घनिष्ठ व्यापारिक संबंध स्थापित हुए थे और रोम के व्यापारियों की एक बड़ी बस्ती दक्षिण भारत में बस गई थी। रोमन एंपायर के पराभव के पश्चात ये व्यापारिक सबंध समाप्त हो गए। भारत में इटली की कंपनियों द्वारा बड़ा पूंजी निवेश किया गया है।

प्रभात कुमार रॉय का लेख :  यूनान व इटली से प्रगाढ़ होंगे रिश्ते
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प्रभात कुमार रॉय 

प्रभात कुमार रॉय

विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने ग्रीस (यूनान) और इटली का कूटनीतिक दौरा किया। तकरीबन 18 वर्ष के बाद किसी भारतीय विदेशमंत्री ने ग्रीस का दौरा किया। ग्रीस की राजधानी एथेंस में ग्रीस के विदेशमंत्री निकोस डेंडियास ने एस.जयशंकर का शानदार स्वागत किया। एथेंस में एस.जयशंकर ने महात्मा गांधी की भव्य मूर्ति का अनावरण किया। ग्रीस के प्रधानमंत्री क्यारीकोस मित्सोटाकिस ने ग्रीस और भारत के मध्य संबंध को और अधिक शक्तिशाली बनाने की दिशा निकोस डेंडियास और एस.जयशंकर के मध्य कूटनीतिक बातचीत को अत्यंत महत्वपूर्ण करार दिया। भारत और यूरोपीय यूनियन के मध्य प्रगाढ़ संबंधों की स्थापना में ग्रीस एक विशिष्ट राष्ट्र रहा है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजी अबुल कलाम ने ग्रीस की राजकीय यात्रा की थी और वर्ष 2008 में ग्रीस के तत्कालीन प्रधानमंत्री पापांद्रेयू ने भारत की यात्रा की थी। ग्रीक प्रधानमंत्री पापांद्रेयू की भारत यात्रा के तत्पश्चात भारत और ग्रीस के मध्य संबंधों ने नए शिखरों को स्पर्श किया। भारत और ग्रीस के मध्य रणनीतिक और व्यापारिक साझेदारी का शानदार आग़ाज हुआ। वर्ष 2017 में ग्रीस के विदेशमंत्री ने भारत की यात्रा अंजाम दी थी। भारत और ग्रीस के बीच 530 मिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है। भारत की अनेक कंपनियां ग्रीस में कार्यरत हैं। ग्रीस में इनफॉरमेशन टेक्नोलाॅजी और निर्माण क्षेत्रों की भारत की अनेक कंपनियां सक्रिय हैं। दोनों देशों के मध्य नियमित तौर से उच्चस्तरीय विमर्श और आदान-प्रदान होते रहते हैं।

ऐतिहासिक तौर पर भारत और ग्रीस के परस्पर ताल्लुकात सदियों पुराने हैं। 326 ईसा पूर्व सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया था। पोरस के साथ सिंकदर के बीच सिंधु नदी के तट पर भीषण युद्ध हुआ और अंततः दोनों योद्धा मित्र बन गए। ईसा पूर्व के ऐतिहासिक दौर में भारत के लोग ग्रीस को यूनान के नाम से जानते थे। दोनों देशों के मध्य राजनीतिक संबंधों के साथ ही साथ सांस्कृतिक संबंध सदियों तक कायम रहे। भारत में प्राचीन यूनानी चिकित्सा पद्धति आज भी प्रचलित है, जबकि ग्रीस में यह पूर्णतः विलुप्त हो चुकी है। भारत को आजादी प्राप्त होने के पश्चात 1950 में दोनों देशों के मध्य कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए। तुर्की और ग्रीस के मध्य भूमध्यसागर में जबरदस्त सैन्य टकराव जारी है। इस्लामिक देशों का सिरमौर बनने की महत्वाकांक्षा में तुर्की ने पाकिस्तान को अपना अंध समर्थन प्रदान कर दिया है, जबकि पाकिस्तान को फाइनेंनशियल एक्शन टास्क फोर्स द्वारा ब्लैक लिस्ट के हवाले किए जाने के अंतरराष्ट्रीय अभियान में भारत का सहयोग करके दृढ़तापूर्वक ग्रीस ने खास किरदार निभाया है। भारत और ग्रीस के मध्य स्थापित हुई रणनीतिक साझेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि ग्रीस के पास यूरोप में शक्तिशाली नेवल शक्ति विद्यमान है। भारत की नौसैन्य शक्ति को और अधिक शक्तिशाली बनाने में ग्रीस भारत का प्रबल सहयोगी राष्ट्र है। वैश्विक ज़ेहादी आतंकवाद का मुकाबला करने वाले देशों में ग्रीस का अहम किरदार रहा है।

एस.जयशंकर की कूटनीतिक यात्रा का ग्रीस के पश्चात इटली दूसरा पड़ाव रहा। तकरीबन सात करोड़ की आबादी वाला इटली यूरोप के प्रमुख राष्ट्रों में एक है। एस.जयशंकर जी-20 देशों की मंत्रीस्तरीय बैठक में शिरक़त करने के लिए इटली पहुंचे। जी-20 देशों विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं। जी-20 देशों में शामिल हैं क्रमशः अमेरिका, अर्जेंटीना, आस्ट्रेलिया, इंडिया, इटली, इंडोनेशिया, इंग्लैंड, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, मैक्सिको, रूस, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब, तुर्की, दक्षिण कोरिया और यूरोपियन यूनियन, जी-20 देशों का शिखर सम्मलेन इटली में इसी वर्ष अक्तूबर में आयोजित किया जाना है। जी-20 देशों का अध्यक्ष पद आजकल इटली के पास है। उम्मीद है कि जी-20 देश का अगला अध्यक्ष भारत होगा। जी-20 का अस्तित्व में आने का वर्ष 1999 है। 1990 के दशक में जबर्दस्त वैश्विक आर्थिक संकट के दौर में जी-7 देशों के वित्तमंत्रियों के सम्मेलन में जी-20 की स्थापना करने के लिए सहमति बन गई, ताकि विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देश एकजुट होकर वैश्विक अर्थ संकट का मुकाबला कर सकें।

ग्रीस की तरह ही भारत और इटली के परस्पर संबंध भी सदियों पुराने हैं। रोमन एंपायर के दौर से भारत और इटली के मध्य घनिष्ठ व्यापारिक संबंध स्थापित हुए थे और रोम के व्यापारियों की एक बड़ी बस्ती दक्षिण भारत में बस गई थी। रोमन एंपायर के पराभव के पश्चात ये व्यापारिक सबंध समाप्त हो गए। भारत के विभिन्न स्थानों पर प्राचीन रोमन मुद्राएं मिल चुकी हैं। 13वीं शताब्दी में मार्को पोलो की भारत यात्रा से इन प्राचीन संबंधों को पुनर्जीवन प्राप्त हो गया। मुगलकाल में इटली और भारत के व्यापारिक संबंध बहुत प्रबल बन गए थे। अंग्रेजों के भारत पर आधिपत्य स्थापित हो जाने के बाद ये व्यापारिक संबंध समाप्त हो गए। भारतीय स्वातंत्र्य संग्राम के सेनानियों ने इटली के एकीकरण के क्रांतिकारियों मैजनी और गैराबल्डी से बहुत प्रेरणा ग्रहण की। द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान इटली को फासीवाद से मुक्त करने में भारतीय सैनिकों के बलिदानों का विशिष्ट किरदार रहा है। आजकल भारत और इटली के मध्य तकरीबन 1100 मिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है, जिसके वर्ष 2025 तक 1500 मिलियन डॉलर तक पहुंच जाने की संभावना है। भारत में इटली की कंपनियों द्वारा बड़ा पूंजी निवेश किया गया है। साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में इटली और भारत के मध्य सहयोग कायम है। भारत की पहल पर प्रारम्भ किए गए अंतरराष्ट्रीय सोलर एलायंस में इटली की अग्रणी भूमिका रही है। उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय सोलर एलायंस में विश्व के 121 देश शिरक़त कर रहे हैं। यूरोपियन यूनियन में इटली एक प्रभावशाली देश है और फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स के तहत फ्रांस के साथ मिलकर पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डालने में इटली की अग्रणी भूमिका रही है। भारत और यूरोपियन यूनियन के देशों के मध्य गहन व्यापारिक और रणनीतिक संबंध स्थापित हो सके, इसका श्रेय वस्तुतः ग्रीस और इटली को दिया जाना चाहिए। यूरोप में जेहादी आतंकवाद का मुकाबला करने में फ्रांस का सहयोग करने में इटली प्रमुख देश रहा है।

भारतीय विदेश नीति को यूरोप में शानदार कामयाबी हासिल हुई, जबकि कोविड 19 के विश्वव्यापी कहर के पश्चात चीन के साथ यूरोपीय देशों के संबंधों में कड़वाहट के दीदार हुए हैं। यूरोप की कंपनियों द्वारा चीन से अपना कारोबार समेटा जा रहा है और भारत में इन कंपनियों द्वारा निवेश की संभावना प्रबल हुई, बशर्ते भारत में आर्थिक निवेश करने में नौकरशाही की अड़चनें खत्म की जाए।

(लेखक विदेश मामलों के जानकार हैं, ये उनके अपने विचार हैं।) लेख पर अपनी प्रतिक्रिया edit@haribhoomi.com पर दे सकते हैं।

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