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World Labour Day Speech In Hindi : विश्व मजदूर दिवस पर भाषण हिंदी में

World Labour Day Speech In Hindi: कल्पना कीजिए किसी सुबह आपका नल खराब हो जाए, छत टपकने लगे या फिर घर की एक दीवार गिर जाए। फिर आप क्या करेंगे? स्वाभाविक है आप इन समस्याओं से निजात पाने के लिए मजदूर को खोजेगें। नल खराब होने और मजदूर खोजने के बीच में आपको इनकी जरूरत का अनुभव हो जाता है। लग जाता है कि हमारे समाज में मजदूर न हों तो कैसा हो।

World Labour Day Speech In Hindi : विश्व मजदूर दिवस पर भाषण हिंदी में
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World Labour Day Speech In Hindi : 1 माई यानी मजदूर दिवस (Labour Day), इस दिन के पीछे एक बहुत ही मार्मिक कहानी है। अगर आपको किसी दफ्तर या मंच पर मजदूर दिवस पर भाषण देना है तो हम आपके लिए लाए हैं सबसे बेस्ट मजदूर दिवस पर भाषण.... कल्पना कीजिए किसी सुबह आपका नल खराब हो जाए, छत टपकने लगे या फिर घर की एक दीवार गिर जाए। फिर आप क्या करेंगे? स्वाभाविक है आप इन समस्याओं से निजात पाने के लिए मजदूर को खोजेगें। नल खराब होने और मजदूर खोजने के बीच में आपको इनकी जरूरत का अनुभव हो जाता है। लग जाता है कि हमारे समाज में मजदूर न हों तो कैसा हो।

किसी ने सच ही कहा है कि मजदूरों ने दुनियां को बेहतर बनाया है। ये बड़े-बड़े मॉल, इमारते, फार्म हाउस सब तो उन्हीं मजदूरों ने बनाया है। दुनिया की हर जरूरत को पूरा करने की जैसे सारी जिम्मेदारी उन्हीं को मिली है।

दूसरों के लिए बेहतर बनाने के दौरान वह अक्सर अपनों के लिए बेहतर करना भूल जाते हैं। ऐसा भी कहा जा सकता है कि उनका भला चाहने वालों की संख्या बेहद कम है।

भारत में मजदूर आंदोलन लगातार होते रहे हैं। कभी न्यूनतम मजदूरी को लेकर तो कभी सरकारी सुविधाओं के लाभ को लेकर पर ज्यादातर आंदोलन अपने उद्देश्य को पूरा किए बिना ही खत्म हो जाते हैं।

देश में गरीबी का स्तर महज आंकड़ो से नहीं समझा जा सकता है। लोगों के जीवन स्तर को समझने और उनकी जरूरतों को महसूस करने के लिए उनकी झोपड़पट्टियों तक जाना होगा।

भारत में ज्यादातर लड़ाईयां मजदूरों को उनका हक दिलवाने के लिए लड़ी गई हैं। इस दौरान तमाम बड़े नेता उभरकर भारत की मुख्य राजनीति में आए। दत्तात्रेय नारायण सामंत उर्फ डॉक्टर साहेब ने ग्रेट बाम्बे टेक्सटाइल स्ट्राइक करके पूरे बम्बई के कपड़ा बाजार को हिलाकर रख दिया।

डॉक्टर साहेब के आन्दोलन की ही बदौलत बॉम्बे औद्योगिक कानून 1947 का निर्माण हुआ। मजदूरों की लड़ाई में जार्ज फर्नांडिस का भी बड़ा नाम रहा है। जार्ज के नेतृत्व में देश में रेल हड़ताल हुई। इसी आंदोलन के कारण वह राष्ट्रीय राजनीति आए।

मजदूर दिवस का इतिहास

एक मई को मजदूर दिवस मनाने की परपंरा आज से 130 साल पहले शुरु हुई थी। उस समय मजदूरों का जबरदस्त शोषण हो रहा था। बड़ी कंपनियों में मजदूर एक बार अन्दर आ जाते तो काम खत्म होने के बाद ही उन्हें बाहर जाने दिया जाता।

काम के घंटों की कोई सीमा नहीं तय थी। 1 मई 1886 को अमेरिका की सड़कों पर करीब तीन लाख से ज्यादा मजदूर इस मांग के साथ उतर आए कि उनसे 8 घंटे ही काम लिया जाए।

उनके इस प्रदर्शन को खत्म करने के लिए गोलियां चलवा दी गई। तमाम मजदूर मारे गए, बड़ी संख्या में घायल हुए।

इस आन्दोलन के बाद मजदूरों के तमाम संगठनों ने आवाज उठाना शुरू कर दिया। पेरिस में 1889 को आतंर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन हुआ। जिसमें अमेरिका के हेय मार्केट में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी गई और 1 मई को मजदूर दिवस के रूप में मनाए जाने की शुरुआत हुई।

अमेरिका, रुस ही नहीं बल्कि दुनिया के 80 से ज्यादा देश इस दिन को मई दिवस के रूप में मानते हुए राष्ट्रीय अवकाश रखते हैं। भारत में किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान ने 1 मई 1923 से इसकी शुरुआत की।

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