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Union Budget 2019 Highlights : इनकम टैक्स स्लैब में हो सकता है बदलाव, आगामी बजट से उम्मीद की जानें वाली 5 प्रमुख बातें

पिछले साल फरवरी में मोदी सरकार-1 ने अंतरिम बजट पेश किया और अब पूर्ण बहुमत की जीत के बाद मोदी सरकार-2 आगामी 5 जुलाई को संसद में बजट पेश करने की पूरी तैयारी में है। आगामी बजट में जनता को सरकार से महंगाई, टैक्स व अन्य सुधारों से संबंधित बड़ी उम्मीदें हैं। अब देखना यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमष कैसे इन चुनौतियों से सामना करती हैं।

Union Budget 2019 Highlights : इनकम टैक्स स्लैब में हो सकता है बदलाव, आगामी बजट से उम्मीद की जानें वाली 5 प्रमुख बातें
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Union Budget 2019 Highlights

पिछले साल फरवरी में मोदी सरकार-1 ने अंतरिम बजट पेश किया और अब पूर्ण बहुमत की जीत के बाद मोदी सरकार-2 आगामी 5 जुलाई को संसद में बजट पेश करने की पूरी तैयारी में है। आगामी बजट में जनता को सरकार से महंगाई, टैक्स व अन्य सुधारों से संबंधित बड़ी उम्मीदें हैं। अब देखना यह है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमष कैसे इन चुनौतियों से सामना करती हैं। करदाताओं को नव नियुक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से बड़ी उम्मीदें हैं। हम आपको बताने जा रहे हैं कि 5 ऐसी मुद्दे हैं जिनपर केंद्रीय बजट 2019 में महत्वपूर्ण घोषणाएं हो सकती हैं।

डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा

साल 2009 में कांग्रेस सरकार द्वारा एक ही दिन में 10,000 रुपये से अधिक की निकासी पर 0.1% का बैंकिंग नकद लेनदेन टैक्स पेश किया गया था। हालांकि उस साल के बाद इसे खत्म कर दिया गया था। यदि कुछ मीडिया रिपोर्टों पर विश्वास किया जाए तो वर्तमान सरकार विभिन्न नियमों और शर्तों के साथ नकद निकासी कर (CWT) को फिर से पेश कर सकती है। यह उम्मीद की जाती है कि इस बार सीडब्ल्यूटी लगाया जाएगा यदि एक वित्तीय वर्ष में बैंक से कुल नकद 10 लाख रुपए से अधिक हो।

बता दें कि CWT के पीछे मकसद डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देना और काले धन के प्रचलन पर अंकुश लगाना है। भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल ही में एनईएफटी और आरटीजीएस पर लगने वाले शुल्क हटा दी है जिसे डिजिटल लेनदेन में तेजी लाने के संबंध में देखा जा सकता है। केंद्रीय बैंक ने हाल ही में एटीएम निकासी पर शुल्क की समीक्षा के लिए एक समिति बनाई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार का मानना है कि अधिकांश खाताधारकों को अपनी नियमित आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक वर्ष में 10 लाख रुपये से अधिक नकद निकालने की आवश्यकता नहीं है।

ई-पेमेंट पर टैक्स में सब्सिडी

इस बजट में सरकार द्वारा ई-पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए बड़े कदम उठाने की उम्मीद है। सरकार के इस पहल में आयकर और जीएसटी करदाताओं के लिए राहत की उम्मीद जताई जा सकती है। दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि सरकार टैक्स के नकद भुगतान की परंपरा को कम कर सकती है।

टैक्स स्लैब में हो सकता है परिवर्तन

आयकर में कटौती आम तौर पर किसी भी सरकार से करदाताओं की सबसे बड़ी उम्मीद रही है। करदाताओं की कुछ ऐसी ही उम्मीद इस साल भी है। टैक्स पेयर्स की मांग को ध्यान में रखते हुए सरकार ने इस साल के शुरू में यानी फरवरी में पेश अंतरिम बजट में करदाताओं को 5 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स न लेने की बात कही थी। अब ऐसी उम्मीदें हैं कि टैक्स छूट का लाभ अन्य करदाताओं को भी दिया जाएगा, जिसमें स्लैब दर में बदलाव किया जाएगा।

विश्लेषकों का कहना है कि टैक्स स्लैब में बेसिक एग्जेंप्शन की लिमिट अब 5 लाख के बजाय इससे अधिक हो सकती है और 10 लाख से कम आय वालों पर 10 फीसदी, 10 लाख से 15 लाख के स्लैब पर 20 फीसदी का टैक्स व 15 लाख के ऊपर वालों पर 30 फीसदी टैक्स की घोषणा सरकार कर सकती है।

इनकम टैक्‍स में 80सी के तहत मिल सकती है छूट

I-T अधिनियम के टैक्स कटौती लाभ U/S 80C कई करदाताओं विशेष रूप से वेतनभोगी लोगों के लिए प्रमुख निवेश और कर बचत उपकरण में से एक है। ऐसी उम्मीदें हैं कि सरकार कर कटौती सीमा U/S 80C को बढ़ाकर 3 लाख कर सकती है। 80C की सीमा में वृद्धि होम लोन वाले लोगों के लिए बहुत आसान हो सकती है क्योंकि वे ब्याज भुगतान पर टैक्स में लाभ प्राप्त करने में सक्षम हो सकते हैं।

घर खरिदारों के लिए खुशखबरी

वर्तमान सरकार के सबसे बड़े लक्ष्यों में से एक है 'हाउसिंग फॉर ऑल' विजन को समय पर हासिल करना। इसलिए, प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) को आगे ले जाते हुए, ऐसी उम्मीदें हैं कि सरकार पहली बार घर खरिदने वाले लोगों के लिए टैक्स में राहत दे सकती है। इससे पहले, सरकार ने अपनी क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) की अंतिम तिथि 31 मार्च 2020 तक बढ़ा दी थी, और अब इसे और बढ़ाया जा सकता है।

केंद्रीय बजट 2019 से उपर्युक्त अपेक्षाओं के अलावा सरकार रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (आरईआईटी) में निवेश के लिए टैक्स में छूट दे सकती है। वहीं जीएसटी के दायरे में पेट्रोल और डीजल लाने के लिए कदम उठा सकती है, इसके अलावा सरकार '59 मिनट की ऋण योजना' के साथ छोटे व्यवसायों के लिए लोन का लाभ दे सकती है।

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