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सुप्रीम कोर्ट : 63 साल में नहीं लिया गया यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कोई कदम

सुप्रीम कोर्ट की बैंच ने आज एक संपत्ति विवाद के मामले में समान नागरिक संहिता पर टिप्पणी की है। यह मुद्दा भाजपा के मुल विषयों में से एक रहा है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा का विषय बन सकता है।

सुप्रीम कोर्ट : 63 साल में नहीं लिया गया यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कोई कदम
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Supreme Court: No Step has been taken in 63 years to implement Uniform Civil Code

जस्टीस दीपक गुप्ता व जस्टिस अनिरुद्ध बोस की बैंच ने कहा कि सरकार नागरिकों की लिए यूसीसी (Unifrom Civil Code) लाने में असफल रही है। 63 वर्षों में कभी समान नागरिक संहिता को लागू करने का प्रयास नहीं किया गया । सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी गोवा के एक संपत्ति विवाद मामले में की गई है। बैंच ने कहा कि शीर्ष अदालत ने कई बार कहा लेकिन यूसीसी लागू नहीं किया गया।

1956 में बना लिया गया था हिदू लॉ

बैंच ने गोवा को समान नागरिक संहिता के लिए एक बेहतरीन उदाहरण बताया है। क्योंकि वहां हर एक धर्म के व्यक्ति के लिए समान कानून है। जैसे कि जिस मुस्लिम व्यक्ति की शादी गोवा में पंजीकृत है वह एक से अधिक शादी नहीं कर सकता। गोवा में मुस्लिमों के लिए भी बोलकर तीन तलाक देने का प्रावधान नहीं था। कोर्ट ने कहा कि हिंदू लॉ 1956 में बना लिया गया था लेकिन यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाने का अभी तक प्रयास नहीं हुआ।

बीजेपी की मूल विषयों में शामिल रहा है

यूनिफॉर्म सिविल कोड, पर्सनल लॉ को लेकर कमीशन की रिपोर्ट पिछले साल पेश की गई थी तब कमीशन ने कहा था कि इस समय यूनिफॉर्म सिविल कोड की जरूरत नहीं है। अदालत की यह टिप्पणी भाजपा के लिए प्रेरणात्मक साबित हो सकती है। भाजपा सरकार की पहले से ही सोच है कि समान नागरिक संहिता मोदी सरकार द्वारा ही लाई जा सकती है। बीजेपी ने पहले बी कई बार न्यायालय के फैंसलों का साहरा लेते हुए यूसीसी के लिए आवाज उठाई है। यह लंबे समय से भाजपा के मुल विषयों में से एक मुद्दा रहा चुका है।

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