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दुनिया का कोई भी देश ऐसा नहीं है जिसने विज्ञान और तकनीक के बिना प्रगति की हो : पीएम मोदी

पीएम मोदी ने इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया का कोई भी देश ऐसा नहीं है जिसने विज्ञान और तकनीक के बिना प्रगति की हो।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल को संबोधित किया है। पीएम मोदी ने इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया का कोई भी देश ऐसा नहीं है जिसने विज्ञान और तकनीक के बिना प्रगति की हो। भारत ने कई महान वैज्ञानिक उत्पादित किए हैं, हमारा इतिहास हमें गौरवान्वित करता है और हमारा वर्तमान भी विज्ञान से काफी हद तक प्रभावित है।

पीएम मोदी ने आगे कहा कि भविष्य के प्रति हमारी जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। जिम्मेदारी मानव मूल्यों के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी को लेने की है। सरकार आविष्कार और इनोवेशन दोनों के लिए संस्थागत सहायता प्रदान कर रही है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।

इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल का 5वां एडिशन ऐसे स्थान पर हो रहा है, जिसने ज्ञान-विज्ञान के हर क्षेत्र में मानवता की सेवा करने वाली महान विभूतियों को पैदा किया हैं। ये फेस्टिवल ऐसे समय में हो रहा है, जब 7 नवंबर को सी.वी रमन और 30 नवंबर को जगदीश चंद्र बोस की जन्म जयंती मनाई जाएगी। इसकी थीम, RISEN: Research, Innovation and Science Empowering the Nation तय करने के लिए आयोजकों को मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई।

लाखों छात्रों को अलग-अलग हैकाथॉन में शामिल होने का अवसर दिया गया

देश में साइंस और टेक्नोलॉजी का इकोसिस्टम बहुत मजबूत होना चाहिए। एक ऐसा इकोसिस्टम जो प्रभावी भी हो और पीढ़ी दर पीढ़ी को प्रेरणा देने वाला भी हो। हम इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हमारे विद्यार्थी देश की चुनौतियों को अपने तरीके से हल करें इसके लिए लाखों छात्रों को अलग-अलग हैकाथॉन में शामिल होने का अवसर दिया गया। इसके अलावा नीतियों और आर्थिक मदद के जरिए हजारों स्टार्टअप को सपोर्ट किया गया है। ऐसा लगता है कि साइंस को लेकर हमारे युवा स्टूडेंट में रुचि की एक नई लहर पैदा हुई है। इस शक्ति को, इस ऊर्जा को 21वीं सदी के वैज्ञानिक पर्यावरण में सही दिशा में ले जाना, सही प्लेटफॉर्म देना, हम सबका दायित्व है।

विज्ञान वही उपयोगी है जो समाज के हित में हो

हमारे यहां कहा गया है- तत् रूपं यत् गुणाः। तत् विज्ञानं यत् धर्मः।। यानि आपका बाहरी व्यक्तित्व तभी सार्थक है जब आप गुणवान भी होते हैं। इसी तरह विज्ञान वही उपयोगी है जो समाज के हित में हो। हमें सोचना होगा कि साइंस का उपयोग कैसे लोगों के जीवन को सुगम बनाने में किया जा सकता है। इसलिए साइंस फॉर सोसाइटी का बहुत महत्व है। जब सभी वैज्ञानिक और देशवासी इस सोच के साथ आगे बढ़ेंगे, तो देश का भी लाभ होगा।

साइंस में असफलता नहीं होती, सिर्फ प्रयास होते हैं

हम सभी भली-भांति जानते हैं कि विज्ञान, बिना दो चीजों के संभव ही नहीं है। ये दो चीजें हैं समस्या और सतत प्रयोग। अगर समस्या ही नहीं होगी तो उत्सुकता नहीं होगी। मेरा आपसे आग्रह ये भी होगा कि दीर्घकालिक लाभ, दीर्घकालिक समाधान के बारे में सोचते हुए आगे बढ़िए। इन सारे प्रयासों के बीच आपको अंतरराष्ट्रीय नियमों, उसके मापदंडों का भी हमेशा ध्यान रखना होगा। साइंस में असफलता नहीं होती, सिर्फ प्रयास होते हैं, प्रयोगों होते हैं, और सफलता होती है।इन बातों को ध्यान में रखते हुए आप आगे बढ़ेंगे तो विज्ञान के क्षेत्र में भी आपको दिक्कत नहीं आएगी और जीवन में भी।

वैज्ञानिकों ने चंद्रयान 2 पर बहुत मेहनत की थी

मुझे खुशी है कि देश में आज वैज्ञानिक स्वभाव एक अलग स्तर पर है। मैं आपको हाल ही का एक उदाहरण देता हूं। हमारे वैज्ञानिकों ने चंद्रयान 2 पर बहुत मेहनत की थी और इससे बहुत उम्मीदें पैदा हुई थीं। सब कुछ योजना के अनुसार नहीं हुआ, फिर भी यह मिशन सफल था।

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