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सेना में महिलाओं को भी मिलेगा स्थाई कमीशन का लाभ, जानें आखिर क्यों पहुंचा था ये मामला सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को तीन महीने के अंदर सेना में सभी महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का आदेश दे दिया है। इसके बाद सभी अधिकारियों के चेहरे पर खुशी दिख रही है। उन्हें कमांड पोस्टिंग देने पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं होगा।

सेना में महिलाओं को भी मिलेगा स्थाई कमीशन का लाभ, जानें आखिर क्यों पहुंचा था ये मामसा सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने सेना में महिलाओं को बराबर अधिकार का दिया आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना में महिला अधिकारियों के हक में एक बड़ा फैसला सुनाया है। सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन का दर्जा मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार तीन महीने के अंदर लागू करने के लिए कहा है और फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महिलाओं को कमांड पोस्टिंग मिलनी चाहिए, ये उनका अधिकार है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को तीन महीने के अंदर फैसला लागू करने के लिए समय दिया है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कॉम्बैट विंग छोड़कर बाकी सभी विंग पर लागू होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि इस मामले में पुरुषों के समान महिलाओं को सभी अधिकार मिलने चाहिए। केंद्र सरकार को महिलाओं के प्रति अपनी सोच को बदलना चाहिए। साथ ही उन्होनें कहा कि अभी तक 30 फीसदी महिलाएं देश की सेवा में तैनात हैं। उदाहरण के तौर पर तान्या शेरगिर और कैप्टन मधुमिता का जिक्र किया।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के खिलाफ केंद्र की अपील पर फैसला सुनाते हुए फटकार लगाई। रक्षा मंत्रालय ने उच्च न्यायालय के 2010 के एक फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें फैसला सुनाया गया था कि सेना और वायु सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन दिया जाना चाहिए।

केंद्र ने कोर्ट में रखी अपनी ये बात

केंद्र ने सरकार के प्रस्ताव वाले सुप्रीम कोर्ट में एक लिखित नोट दिया, जिसमें कहा गया कि जो कई मुद्दों की ओर इशारा करता है, जिसमें शारीरिक कौशल और शारीरिक सीमाएं शामिल हैं, क्योंकि सेना में सेवा की जरूरतों को पूरा करने के लिए महिला अधिकारियों के लिए चुनौतियां हैं।

परिणामस्वरूप, महिला अधिकारियों के लिए गर्भावस्था, मातृत्व और अपने बच्चों और परिवारों के प्रति लंबे समय तक अनुपस्थिति के कारण सेवा के खतरों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती है, खासकर जब पति और पत्नी दोनों सेवा अधिकारी बनते हैं।

महिला अधिकारियों ने कोर्ट में रखी ये दलीलें

महिला अधिकारियों ने कोर्ट में कहा कि वे पिछले 27 से 28 सालों से 10 कॉम्बैट सपोर्ट आर्म्स में सेवारत हैं और उन्होंने अपने पराक्रम और साहस को हमेशा साबित किया है। उन्हें संगठन द्वारा ही उपयुक्त पाया गया है और 10 कॉम्बैट सपोर्ट आर्म्स में शत्रु स्थानों और संचालन के साथ-साथ शत्रु स्थानों पर भी प्लेटन और कंपनियों के सैनिकों का नेतृत्व किया है। महिला अधिकारियों ने प्रदर्शित किया है कि उन्हें उन भूमिकाओं में किसी भी तरह की कमी नहीं है जो उन्हें सौंपी गई हैं।






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